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Kushinagar News: गो आश्रय स्थल बनेंगे आत्मनिर्भर, गोबर से तैयार होंगे रोजगारपरक उत्पाद
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डीएम ने पशुपालन विभाग की योजनाओं की समीक्षा कर दिए निर्देश, कंडे, पंचगव्य उत्पाद, दीये और वर्मी कंपोस्ट तैयार करने पर जोर
पडरौना। गो आश्रय स्थलों को सिर्फ गोवंश संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है। इसके लिए गोबर से कंडे, पंचगव्य उत्पाद, दीये और वर्मी कंपोस्ट समेत अन्य उपयोगी सामग्री तैयार कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी संजय चौहान ने अधिकारियों को इस दिशा में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
डीएम संजय चौहान ने कहा कि गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं में नवाचार को बढ़ावा दिया जाए ताकि वहां उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर आय के स्रोत विकसित किए जा सकें। इसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) और डीसीएमआरएलएम के साथ समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि गोबर से तैयार होने वाले उत्पादों को स्थानीय स्तर पर तैयार कर उनकी बिक्री की व्यवस्था की जाए।
इससे गो आश्रय स्थलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ही स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। डीएम ने खुले में घूम रहे छुट्टा गोवंश को संबंधित विभागों के सहयोग से गो आश्रय स्थलों में संरक्षित कराने के निर्देश दिए। साथ ही आश्रय स्थलों में साफ-सफाई, गोवंश के भरण-पोषण, हरे चारे और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने को कहा। इस दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. प्रकाश द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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पडरौना। गो आश्रय स्थलों को सिर्फ गोवंश संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है। इसके लिए गोबर से कंडे, पंचगव्य उत्पाद, दीये और वर्मी कंपोस्ट समेत अन्य उपयोगी सामग्री तैयार कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे। बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी संजय चौहान ने अधिकारियों को इस दिशा में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
डीएम संजय चौहान ने कहा कि गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं में नवाचार को बढ़ावा दिया जाए ताकि वहां उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर आय के स्रोत विकसित किए जा सकें। इसके लिए जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) और डीसीएमआरएलएम के साथ समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि गोबर से तैयार होने वाले उत्पादों को स्थानीय स्तर पर तैयार कर उनकी बिक्री की व्यवस्था की जाए।
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इससे गो आश्रय स्थलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ही स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। डीएम ने खुले में घूम रहे छुट्टा गोवंश को संबंधित विभागों के सहयोग से गो आश्रय स्थलों में संरक्षित कराने के निर्देश दिए। साथ ही आश्रय स्थलों में साफ-सफाई, गोवंश के भरण-पोषण, हरे चारे और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करने को कहा। इस दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. प्रकाश द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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