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Kushinagar News: कुपोषण दूर भगाने के लिए सरकार दे रही मुफ्त में चावल, स्वाद न मिलने पर बेच दे रहे

Mon, 24 Apr 2023 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 24 Apr 2023 12:05 AM IST
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Selling rice for free, not getting the taste
हाथ में लेकर दिखाते चावल।संवाद

कुशीनगर जनपद में राशन के चावल का खेल लाखों रुपये महीने का है। लोगों को मुफ्त में मिल रहा सरकारी फोर्टिफाइड चावल किराने की दुकानों और साप्ताहिक मंडियों में बिक रहा है। बहुत कम ही लोग इसे पकाते हैं। कुछ ऐसे हैं, जो कोटेदार से अनाज की जगह रुपये ही ले लेते हैं। कुछ आटा चक्की वाले भी यह चावल खरीदकर पीसने के बाद बेसन के नाम पर बेच देते हैं।

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दूसरी ओर कुछ लोग दुकानों पर सरकारी चावल बेचकर उसकी जगह अच्छी गुणवत्ता का चावल, चायपत्ती, सोनी मसाला आदि सामान बदल लेते हैं, जबकि कोटे के अनाज की कालाबाजारी रोकने के लिए ढुलाई वाले ट्रकों में जीपीएस लगा है, बायोमीट्रिक तरीके से राशन का उठान होता है। पारदर्शिता के लिए पॉश मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।
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आयरन, विटामिन, फोलिक एसिड सहित अनेक पौष्टिक तत्वों से युक्त इस चावल को लोग स्वाद ठीक न होने की बात कहकर खाने से परहेज कर रहे हैं। इसकी मोटाई भी अन्य चावलों से अधिक है। यह चावल सरकार की ओर से अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी के कार्डधारकों को मुफ्त में दिया जा रहा है। सरकार की तरफ से जिले में 7.12 लाख पात्र गृहस्थी एवं अंत्योदय राशन कार्डधारकों को यह चावल मुफ्त में दिया जा रहा है।
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किराना की दुकानों पर बिक रहा सरकारी चावल

सरकार पहले राशन की दुकानों के माध्यम से सामान्य मोटा चावल लोगों को मुफ्त उपलब्ध कराती थी, लेकिन अब जो चावल मिलता है वह फोर्टिफाइड है। इस चावल में आयरन, विटामिन, बी-12, फॉलिक एसिड, जिंक, विटामिन ए व बी के मिश्रण की लेयर चढ़ती है। इससे यह प्लास्टिक कोटेड दिखता है। एक क्विंटल सामान्य चावल में एक किलो फोर्टीफाइड चावल मिलाया जाता है। सरकार की तरफ से पात्र गृहस्थी एवं अंत्योदय राशनकार्ड धारकों को मुफ्त में दिया जाने वाला यह राशन अधिकांश लाभार्थी बाजारों और साप्ताहिक मंडियों में बेच दे रहे हैं।

पडरौना की एक किराने की दुकान पर काम करने वाले मोहन ने बताया कि शहर में भी ऐसी दुकानें हैं, जहां लोग कोटे का चावल बेच देते हैं। दुकानदार उनसे 18 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदते हैं और 22 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचते हैं। ऐसी दुकानों में मोटे अनाज की कई वैरायटी रहती है। चावल बेचने वाले लोग उसे बदलकर अपने पसंद का चावल खरीद लेते हैं। इनमें ज्यादातर मजदूर तबके के लोग होते हैं। मेन बाजार के एक दुकानदार का कहना है कि राशन बेचने वाले कहते हैं कि यह चावल कौन खाएगा, जिसका स्वाद ही ठीक नहीं लगता है। देखने में भी मोटा होता है। फोर्टिफाइड चावल के बदले कुछ लोग दूसरा सामान ले लेते हैं।

राशन की कालाबाजारी रोकने के लिए किए गए हैं कड़े इंतजाम
पूर्ति विभाग से जुड़े लोगों की मानें तो सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर राशन की कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। राशन अब शासन से सीधे एफसीआई के गोदाम में आता है। कोटेदारों को एक दिन पहले सूचना दी जाती है। फिर एफसीआई के गोदाम से राशन को ट्रक से कोटेदार तक पहुंचाया जाता है। जिस ट्रक से राशन आता है, उसमें जीपीएस लगा होता है।

इसके अलावा राशन उसी को दिया जाता है, जिसका फिंगरप्रिंट बायोमीट्रिक मशीन में मैच करता है। ई पॉश मशीनों का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में बिचौलियों की सक्रियता खत्म हो गई है। दो-तीन कोटेदारों का राशन एक ट्रक में भेजा जाता है। जो कार्डधारक अपना राशन नहीं उठाते हैं, उनका उस महीने का राशन वापस हो जाता है। इसके अलावा यह सुविधा भी है कि यदि कोई कार्डधारक दूसरे प्रांत में है तो वहां भी पोर्टिबिलिटी के माध्यम से अपने राशन का उठान कर सकता है।
 

फोर्टिफाइड चावल खरीदकर बना रहे बेसन

ग्रामीण क्षेत्र के बड़े बाजारों में कोटे की दुकान पर मिलने वाले चावल को कुछ चावल व्यवसायी खरीद रहे हैं। उस चावल को बेसन बनाने वाली चक्की एवं फैक्ट्री वाले एक से दो रुपये अधिक देकर खरीद ले रहे हैं और बाजार में सस्ता बेसन उपलब्ध करा रहे हैं। बाजार में चना का बेसन 80 रुपये किलोग्राम है, जबकि यह मिलावटी बेसन 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम में मिल जा रहा है। इसे पकौड़ी बनाने वाले दुकानदार खरीद ले रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कार्डधारक राशन उठाने के बाद उसे बनाकर खाने के बजाय दुकानदार से 16 से 17 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच देते हैं।उसके बदले में महंगा चावल खरीद लेते हैं या जरुरत का अन्य सामान खरीद लेते हैं।

लोगों ने क्या कहा
कोटे की दुकान पर सफेद चमकीला रंग का चावल आ जाता है। पकाने पर जल्दी पकता नहीं है। इसलिए उसको खाया नहीं जाता है। -गोपीचंद कुशवाहा, कंठीछपरा

कोटे की दुकान पर सफेद चावल मिलता है। उसे पकाकर खाने पर कोई स्वाद नहीं मिलता है। उस चावल को पकाने पर बहुत अधिक समय लगता है।-फेंकनी देवी, बबुइया हरपुर

चावल की छंटाई कराकर बेच देते हैं पैकेट में
सूत्रों के अनुसार राशन का चावल एकत्र कर कुछ बड़े राइसमिल संचालक उसकी राइसमिल में छंटाई कराकर पतला करा देते हैं। उसके बाद उसे एक किलोग्राम, दो किलोग्राम और पांच किलोग्राम के सादे और रंगीन पैकेट में पैक कराकर बेच देते हैं। छंटाई के बाद यह चावल साफ और पतला हो जाता है, जिसे लोग आसानी से खरीद लेते हैं। यह बाजार के अन्य चावल से कुछ कम दर पर बिकता है।

जिले में राशन कार्डों एवं लाभार्थियों की संख्या
पात्र गृहस्थी के राशनकार्ड-598821
लाभार्थी- 2421944

अंत्योदय राशनकार्ड-117134
लाभार्थी- 367988

कुल राशनकार्ड-
712955
कुल लाभार्थी-
2789932

कितना मिलता है राशन
विभाग के मुताबिक जनवरी से न्यूनतम दर पर कोटे की दुकानों पर राशन बिकना बंद है। जनवरी से पात्र गृहस्थी एवं अंत्योदय राशनकार्ड के लाभार्थियों को मुफ्त में राशन दिया जा रहा है। अंत्योदय राशनकार्ड पर 35 किलोग्राम राशन दिया जाता है। इसमें 14 किलोग्राम गेहूं और 21 किलोग्राम चावल दिया जाता है। पात्र गृहस्थी के लाभार्थियों को प्रति यूनिट दो किलोग्राम गेहूं और तीन किलोग्राम चावल दिया जाता है।
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