{"_id":"6a457419fddb853a8106d1fc","slug":"rise-in-respiratory-patients-in-hospitals-due-to-weather-changes-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-162886-2026-07-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: मौसम के बदलाव से अस्पतालों में बढ़े सांस के रोगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: मौसम के बदलाव से अस्पतालों में बढ़े सांस के रोगी
विज्ञापन
पडरौना। जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज का असर अब अस्पतालों में दिखने लगा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में खांसी, जुकाम, अस्थमा और सांस फूलने के मरीजों की लंबी कतार लग रही है। मेडिकल कॉलेज रविंद्रनगर में बीते एक सप्ताह में अस्थमा के मरीजों की संख्या 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में नमी और एलर्जन बढ़ने से अस्थमा-अलर्जिक ब्रोंकाइटिस के केस सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं।
सोमवार व मंगलवार की बारिश के बाद जिले का तापमान तो गिरा, लेकिन हवा में नमी बढ़ गई। इसी के साथ धूल-मिट्टी के कण हवा में तैर रहे हैं। इससे सांस के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट एवं टीबी विभाग में बीते सात दिन में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उपेंद्र चौधरी ने बताया कि सामान्य दिनों में ओपीडी में रोज 60-70 सांस के मरीज आते थे। अब ये संख्या 100 तक पहुंच गई है। उन्हाेंने बताया कि बुधवार को चेष्ट विभाग की ओपीडी में कुल 250 मरीज पहुंचे, जिसमें से करीब 100 मरीज सांस की समस्या के चिह्नित हुए। उन्होंने बताया कि रात और सुबह के समय मरीज सबसे ज्यादा दिक्कत महसूस कर रहे हैं। कई मरीजों को नेब्युलाइजेशन और स्टेरॉयड की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने बताया कि बारिश के बाद फफूंद, धूल के कण और पराग हवा में बढ़ जाते हैं। यही अस्थमा के मुख्य ट्रिगर हैं। इसके अलावा रात में तापमान गिरने और सुबह ठंडी हवा से सांस की नली सिकुड़ जा रही है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी है उन्हें खांसी-घरघराहट और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इस मौसम में वायरल फ्लू भी अटैक कर रहा है। खांसी-जुकाम के साथ सांस फूलना शुरू हो जा रहा है। धूम्रपान करने वाले और प्रदूषण वाले इलाके में रहने वालों को ज्यादा दिक्कत है।
विज्ञापन
सोमवार व मंगलवार की बारिश के बाद जिले का तापमान तो गिरा, लेकिन हवा में नमी बढ़ गई। इसी के साथ धूल-मिट्टी के कण हवा में तैर रहे हैं। इससे सांस के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट एवं टीबी विभाग में बीते सात दिन में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उपेंद्र चौधरी ने बताया कि सामान्य दिनों में ओपीडी में रोज 60-70 सांस के मरीज आते थे। अब ये संख्या 100 तक पहुंच गई है। उन्हाेंने बताया कि बुधवार को चेष्ट विभाग की ओपीडी में कुल 250 मरीज पहुंचे, जिसमें से करीब 100 मरीज सांस की समस्या के चिह्नित हुए। उन्होंने बताया कि रात और सुबह के समय मरीज सबसे ज्यादा दिक्कत महसूस कर रहे हैं। कई मरीजों को नेब्युलाइजेशन और स्टेरॉयड की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने बताया कि बारिश के बाद फफूंद, धूल के कण और पराग हवा में बढ़ जाते हैं। यही अस्थमा के मुख्य ट्रिगर हैं। इसके अलावा रात में तापमान गिरने और सुबह ठंडी हवा से सांस की नली सिकुड़ जा रही है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी है उन्हें खांसी-घरघराहट और सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इस मौसम में वायरल फ्लू भी अटैक कर रहा है। खांसी-जुकाम के साथ सांस फूलना शुरू हो जा रहा है। धूम्रपान करने वाले और प्रदूषण वाले इलाके में रहने वालों को ज्यादा दिक्कत है।
विज्ञापन