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Kushinagar News: गंडक का जलस्तर घटने से राहत, पर रास्तों पर पानी से मुश्किलें बढ़ीं

Thu, 16 Jul 2026 02:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Thu, 16 Jul 2026 02:44 AM IST
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Receding Gandak water level brings relief, but water on roads adds to difficulties.
मरचहवा बसंतपुर सड़क पर नदी का पानी भर जाने से बल्ली के सहारे आते-जाते लोग।संवाद - फोटो : संवाद
खड्डा। नेपाल की पहाड़ियों में बारिश के बाद वाल्मीकि नगर बैराज से छोड़े गए पानी के चलते उफनाई गंडक नदी का जलस्तर अब घटने लगा है। बुधवार को डिस्चार्ज और जलस्तर दोनों में कमी आने से प्रशासन और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है है। हालांकि, नदी पार बसे गांवों के संपर्क मार्ग डूब जाने से आवागमन में परेशानी हो रही है।
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गंडक नदी का पानी शिवपुर, हरिहरपुर, नारायणपुर, मरचहवा और वसंतपुर गांवों के करीब तक पहुंच गया है। खेतों और निचले रास्तों में पानी भर जाने से ग्रामीण इलाकों में जनजीवन प्रभावित है। मरचहवा दक्षिण टोला और वसंतपुर को जोड़ने वाले मार्ग पर पानी बहने के कारण लोग लोहे की अस्थाई बल्ली के सहारे जान जोखिम में डालकर आ-जा रहे हैं। खेतों में जलभराव के चलते पशु पालकों के सामने मवेशियों के चारे का संकट गहरा गया है। खेती-किसानी के काम भी पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।
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ग्रामीण विनोद राजभर, जंतरी, चंद्रिका, दिलीप कुशवाहा और नथुनी का कहना है कि पानी अभी आबादी के अंदर तो नहीं घुसा है, लेकिन चारों तरफ पानी फैलने से रोजमर्रा के काम और पशुओं के चारे के इंतजाम में भारी दिक्कत आ रही है।
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खतरे के निशान के करीब पहुंचकर नीचे आया पानी
मंगलवार रात बैराज से करीब 2.24 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद भैंसहा गेज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान (96.00 मीटर) से महज 10 सेंटीमीटर नीचे यानी 95.90 मीटर तक पहुंच गया था। इससे बाढ़ का खतरा गहरा गया था, लेकिन बुधवार को इसमें गिरावट दर्ज की गई। सुबह 8 बजे भैंसहा गेज पर जलस्तर 95.66 मीटर (चेतावनी बिंदु से 66 सेंटीमीटर ऊपर) पर रहा, जो शाम 4 बजे तक 95.38 मीटर रह गया।

वहीं बैराज से छोड़े जा रहे पानी के डिस्चार्ज में भी कमी आई। सुबह 6:0 बजे 1,94,800 क्यूसेक, 8:0 बजे 1,91,200 क्यूसेक, 10:0 बजे 1,75,000 क्यूसेक, दोपहर 12:0 बजे 1,83,400 क्यूसेक, दोपहर बाद 2:0 बजे 1,75,000 क्यूसेक व शाम 4 बजे 1,65,800 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलस्तर कम होने से फिलहाल तटवर्ती गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा टल गया है, लेकिन जलभराव के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें अभी जस की तस बनी हुई हैं। प्रशासन पूरी स्थिति पर निगरानी रख रहा है।

मरचहवा बसंतपुर सड़क पर नदी का पानी भर जाने से बल्ली के सहारे आते-जाते लोग।संवाद

मरचहवा बसंतपुर सड़क पर नदी का पानी भर जाने से बल्ली के सहारे आते-जाते लोग।संवाद- फोटो : संवाद

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