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गूंजी शहनाई, 35 जोड़े एक हुए
अमर उजाला ब्यूरो कुशीनगर
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:00 AM IST
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विवाह
- फोटो : अमर उजाला
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नवनिकेतन ज्ञान स्थली तुर्कपट्टी में लगातार 14वें वर्ष सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन हुआ। बिहार, उत्तर प्रदेश तथा पड़ोसी देश नेपाल से भी वर-कन्या और उनके घरवाले शामिल हुए। आयोजन में कुछ मुस्लिम जोड़े भी शामिल थे, जिनका निकाह होना था। पूरे नवनिकेतन नगर को सजाया गया था।
मंगलवार की शाम पांच बजे से ही घरातियों और बरातियों का आना शुरू हो गया था। आयोजक मंडल के अध्यक्ष पूर्व विधान परिषद सदस्य महेंद्र यादव, उपाध्यक्ष दीपनारायण अग्रवाल, प्रबंधक सुधीर शाही और संयोजक शैलेंद्र दत्त शुक्ल तथा विक्रम अग्रवाल बारातियों और घरातियों को माला पहनकर स्वागत किए।
पारंपरिक शहनाई वाद्य के बीच सैकड़ों की संख्या में आई महिलाओं ने सभी को तिलक लगा मंगल गीत गाया। पारंपरिक रीति रिवाज से सभी का स्वागत किया जा रहा था। वर-वधू पक्ष्ा को जलपान, भोजन सहित अलग अलग ठहरने की व्यवस्था की गई थी। जलपान के बाद सभी जोड़ों को एक बड़े पांडाल में बैठाया गया। जहां वर-कन्या ने अपने होने वाले जीवन साथी को वरमाला पहनाया।
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बहुत से लोगों ने विभिन्न प्रकार के उपहार देकर अपना आशीष दिया। आशीर्वाद के क्रम में सुधीर शाही ने कहा कि जोड़ियां ऊपर से बनकर आती हैं, हम सभी इन्हें एक साथ चलने और सुख दु:ख बांटने के लिए साधन मात्र हैं। कन्या लक्ष्मी की दूसरी रूप होती हैं।
जो खुद लक्ष्मी है, वह भला निर्धन कैसे होती है। शैलेंद्र दत्त शुक्ल और दीप नारायण अग्रवाल ने कहा कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि पूजा की योग्य हैं। इस प्रकार के आयोजन से जुड़ना और मदद करना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। संचालन विक्रम अग्रवाल ने किया। बारातियों के मनोरंजन के लिए लिए मैतुल मस्ताना के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया। इस समारोह में तीन मुस्लिम और 32 हिंदू जोड़ों की शादी हुई।
इस दौरान सुमित बंका, पप्पू पांडेय, मनोज बंका, शिव कुमार रुंगटा, उमाशंकर बगड़िया, डॉ. सीबी सिंह, डॉ. अरुण गौतम आदि मौजूद रहे।
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मंगलवार की शाम पांच बजे से ही घरातियों और बरातियों का आना शुरू हो गया था। आयोजक मंडल के अध्यक्ष पूर्व विधान परिषद सदस्य महेंद्र यादव, उपाध्यक्ष दीपनारायण अग्रवाल, प्रबंधक सुधीर शाही और संयोजक शैलेंद्र दत्त शुक्ल तथा विक्रम अग्रवाल बारातियों और घरातियों को माला पहनकर स्वागत किए।
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पारंपरिक शहनाई वाद्य के बीच सैकड़ों की संख्या में आई महिलाओं ने सभी को तिलक लगा मंगल गीत गाया। पारंपरिक रीति रिवाज से सभी का स्वागत किया जा रहा था। वर-वधू पक्ष्ा को जलपान, भोजन सहित अलग अलग ठहरने की व्यवस्था की गई थी। जलपान के बाद सभी जोड़ों को एक बड़े पांडाल में बैठाया गया। जहां वर-कन्या ने अपने होने वाले जीवन साथी को वरमाला पहनाया।
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बहुत से लोगों ने विभिन्न प्रकार के उपहार देकर अपना आशीष दिया। आशीर्वाद के क्रम में सुधीर शाही ने कहा कि जोड़ियां ऊपर से बनकर आती हैं, हम सभी इन्हें एक साथ चलने और सुख दु:ख बांटने के लिए साधन मात्र हैं। कन्या लक्ष्मी की दूसरी रूप होती हैं।
जो खुद लक्ष्मी है, वह भला निर्धन कैसे होती है। शैलेंद्र दत्त शुक्ल और दीप नारायण अग्रवाल ने कहा कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि पूजा की योग्य हैं। इस प्रकार के आयोजन से जुड़ना और मदद करना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। संचालन विक्रम अग्रवाल ने किया। बारातियों के मनोरंजन के लिए लिए मैतुल मस्ताना के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया। इस समारोह में तीन मुस्लिम और 32 हिंदू जोड़ों की शादी हुई।
इस दौरान सुमित बंका, पप्पू पांडेय, मनोज बंका, शिव कुमार रुंगटा, उमाशंकर बगड़िया, डॉ. सीबी सिंह, डॉ. अरुण गौतम आदि मौजूद रहे।