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Kushinagar News: बारिश ने चौपट की मेहनत, खेतों में बिछी फसल

Sun, 01 Nov 2026 03:01 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2026 03:01 AM IST
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Rain ruins hard work; crops flattened in the fields
पडरौना। बेमौसम बारिश किसानों पर आफत बनकर बरसी है। 24 घंटे में 18.5 मिलीमीटर बारिश और तेज हवा से खेतों में पककर तैयार धान की फसल बिछ गई, जबकि गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में जलभराव से रबी फसलों की बुवाई पिछड़ने की आशंका है। मौसम की मार से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विभाग ने 10-15 फीसदी तक नुकसान की आशंका जताई है।
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बेमौसम बारिश किसानों के लिए राहत के बजाय आफत बनकर बरसी। खेतों में पककर तैयार धान की फसल बारिश और हवा के चलते जमीन पर बिछ गई। कई जगह कटाई के बाद खेतों में सुखाने के लिए रखी धान की फसल पानी में डूब गई। वहीं, खेतों में जलभराव और नमी के कारण आलू, सरसों, दलहन और तिलहन की बुवाई ठप हो गई है। इसका असर गन्ने की छिलाई और चीनी मिलों की पेराई पर भी पड़ने की आशंका है।
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किसानों को धान की फसल में नुकसान के साथ रबी की खेती पिछड़ने और आर्थिक संकट की चिंता सताने लगी है। चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ के असर से जिले में 28 से 30 अक्तूबर के बीच करीब 20 से 21 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। 30 अक्तूबर को मौसम का सबसे ज्यादा असर रहा। इस दौरान 24 घंटे में करीब 18.5 मिलीमीटर बारिश हुई। कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के अध्यक्ष नवीन प्रताप सिंह ने बताया कि मौसम विभाग ने खराब मौसम को लेकर जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था।
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हालांकि, 31 अक्तूबर को दोपहर बाद मौसम साफ होने लगा। अगले एक सप्ताह तक भारी बारिश का कोई नया अलर्ट नहीं है। बारिश और तेज हवा से धान और गन्ने की फसल गिरने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है। खेतों में गिरी फसल की कटाई और उपज को सुरक्षित करना भी उनके लिए चुनौती बन गया है। खासकर उन किसानों की चिंता बढ़ गई है, जिनकी फसल पककर तैयार होने वाली थी।
जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि 28 से 30 अक्तूबर के बीच चक्रवात, ओलावृष्टि और तेज आंधी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण खेत में सुखाने के लिए रखी गई कटी हुई उपज को नुकसान पहुंचने पर भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। यह सुविधा फसल कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक खेत में सुखाने के लिए रखी गई उपज पर लागू होगी। ऐसे में प्रभावित किसान समयसीमा के भीतर नुकसान की सूचना दर्ज कराएं, ताकि उन्हें बीमा योजना का लाभ मिल सके।
80 हजार गन्ना किसानों के सामने दोहरी चुनौती : पिपरा बाजार। रामकोला की पंजाब चीनी मिल के परिक्षेत्र में करीब 22 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। इस क्षेत्र के लगभग 80 हजार किसान मिल को गन्ने की आपूर्ति करते हैं। इनमें 45 हजार से अधिक किसान छोटी जोत वाले हैं। पिछले वर्षों में मिल में 11 नवंबर के आसपास पेराई शुरू होती रही है। इस बार बारिश के कारण गन्ने की छिलाई और ढुलाई प्रभावित होने से पेराई शुरू होने में देरी की आशंका है।

किसानों की परेशानी यह भी है कि वे गन्ने के साथ सरसों, धनिया, मसूर, आलू और लहसुन की सहफसली खेती करते हैं। ऐसे में गन्ने की छिलाई में देरी का असर दूसरी फसलों की बुवाई पर भी पड़ेगा। इससे किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।
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