{"_id":"699e0e36dc4c3e4b56047056","slug":"quality-innovation-and-research-will-bring-recognition-in-the-world-kushinagar-news-c-205-1-ksh1001-155393-2026-02-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: गुणवत्तायुक्त नवाचार व शोध विश्व में दिलाएगा पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: गुणवत्तायुक्त नवाचार व शोध विश्व में दिलाएगा पहचान
विज्ञापन
पडरौना पीजी कालेज सभागर में गोष्ठी को संबोधित करतीं कुलपती ।स्रोत-सोशल मीडिया
- फोटो : Samvad
पडरौना। शहर के उदित नारायण पीजी काॅलेज के पुस्तकालय सभागार में मंगलवार को संगोष्ठी में वक्ताओं ने बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर चर्चा की। छात्र-छात्राओं को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा ग्रहण करने के साथ अधिक से अधिक शोध के लिए प्रेरित किया।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि गुणवत्तायुक्त नवाचार और शोध ही दुनिया के समक्ष देश की पहचान बना सकती है। इसलिए छात्र-छात्राओं को निरंतर नवाचार के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। कॉलेज में शोध, नवाचार और पेटेंट के प्रति की जा रही है जागरूकता विकसित भारत की संकल्पना को सफल बनाने में मददगार होगी। डॉ. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि शोध को वस्तुनिष्ठ, रेप्लीकेबल और गुणवत्ता पूर्ण होना चाहिए, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने नवाचार के विभिन्न स्वरूप जैसे- उत्पाद नवाचार, प्रक्रिया नवाचार, पेटेंट प्राप्त करने की प्रक्रिया, कानूनी पक्ष और महत्व पर चर्चा की। संगोष्ठी को प्रोफेसर रामवंत गुप्ता, प्रोफेसर दिनेश यादव, प्रोफेसर प्रमोद कुमार साहू, डॉ. विकास कुमार आदि ने संबोधित किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर ममता मणि त्रिपाठी ने की।
इस दौरान डॉ. मनीष प्रताप सिंह, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. नरेंद्र त्रिपाठी, डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. अनूप कुमार, शमशेर मल्ल, मनीष सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि गुणवत्तायुक्त नवाचार और शोध ही दुनिया के समक्ष देश की पहचान बना सकती है। इसलिए छात्र-छात्राओं को निरंतर नवाचार के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। कॉलेज में शोध, नवाचार और पेटेंट के प्रति की जा रही है जागरूकता विकसित भारत की संकल्पना को सफल बनाने में मददगार होगी। डॉ. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि शोध को वस्तुनिष्ठ, रेप्लीकेबल और गुणवत्ता पूर्ण होना चाहिए, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने नवाचार के विभिन्न स्वरूप जैसे- उत्पाद नवाचार, प्रक्रिया नवाचार, पेटेंट प्राप्त करने की प्रक्रिया, कानूनी पक्ष और महत्व पर चर्चा की। संगोष्ठी को प्रोफेसर रामवंत गुप्ता, प्रोफेसर दिनेश यादव, प्रोफेसर प्रमोद कुमार साहू, डॉ. विकास कुमार आदि ने संबोधित किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर ममता मणि त्रिपाठी ने की।
विज्ञापन
इस दौरान डॉ. मनीष प्रताप सिंह, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. नरेंद्र त्रिपाठी, डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. अनूप कुमार, शमशेर मल्ल, मनीष सिंह आदि मौजूद रहे।