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Kushinagar News: नदी में उतार-चढ़ाव के बीच छितौनी तटबंध पर दबाव
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खड्डा। गंडक नदी के डिस्चार्ज में सोमवार को लगभग 70 हजार क्यूसेक की कमी के बावजूद छितौनी तटबंध के तीन संवेदनशील स्थानों पर दबाव बना हुआ है। बीरभार ठोकर के नोज (अग्रभाग) का कुछ हिस्सा धंसने के बाद यहां भी खतरा बढ़ा है। ठोकर संख्या तीन पर करीब 15 दिनों से नदी टकरा रही है। बाढ़ खंड ने बचाव सामग्री का स्टाक बढ़ाना शुरू कर दिया है। बोरियों में मिट्टी भरकर पहुंचाई जा रही हैं। संवेदनशील स्थानों पर पत्थर भी जमा किए जा रहे हैं।
छितौनी तटबंध के किलोमीटर 12.700 पर स्थित बीरभार ठोकर पनियहवा रेलपुल और सड़क पुल की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस वर्ष बाढ़ खंड ने बीरभार ठोकर के पुनर्स्थापना कार्य पर 789.44 लाख रुपये खर्च किए हैं। पानर के दबाव से ठोकर के नोज का कुछ हिस्सा धंस गया था। सोमवार को पानी कम होने के बावजूद दबाव है। ठोकर संख्या तीन पर कंक्रीट ब्लॉक का कुछ हिस्सा पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका है। अब यहां बचाव सामग्री जुटाई जा रही है।
ठोकर संख्या दो पर भी नदी का दबाव बढ़ा है। धारा के दबाव में पीपल का पेड़ गिरने के कगार पर पहुंच गया था, जिसे फिलहाल सुरक्षित कर लिया गया है। हालांकि, यहां भी खतरा टला नहीं है। एसडीओ बाढ़ खंड संजय कुमार गौड़ ने बताया कि डिस्चार्ज कम होने के बाद भी ठोकर संख्या दो, तीन और बीरभार ठोकर पर दबाव बना हुआ है। बचाव सामग्री का स्टाक तैयार रखा जा रहा है। विभागीय टीम निगरानी कर रही है। जरूरत पड़ने पर तत्काल बचाव कार्य कराया जाएगा।
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छितौनी तटबंध के किलोमीटर 12.700 पर स्थित बीरभार ठोकर पनियहवा रेलपुल और सड़क पुल की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस वर्ष बाढ़ खंड ने बीरभार ठोकर के पुनर्स्थापना कार्य पर 789.44 लाख रुपये खर्च किए हैं। पानर के दबाव से ठोकर के नोज का कुछ हिस्सा धंस गया था। सोमवार को पानी कम होने के बावजूद दबाव है। ठोकर संख्या तीन पर कंक्रीट ब्लॉक का कुछ हिस्सा पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुका है। अब यहां बचाव सामग्री जुटाई जा रही है।
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ठोकर संख्या दो पर भी नदी का दबाव बढ़ा है। धारा के दबाव में पीपल का पेड़ गिरने के कगार पर पहुंच गया था, जिसे फिलहाल सुरक्षित कर लिया गया है। हालांकि, यहां भी खतरा टला नहीं है। एसडीओ बाढ़ खंड संजय कुमार गौड़ ने बताया कि डिस्चार्ज कम होने के बाद भी ठोकर संख्या दो, तीन और बीरभार ठोकर पर दबाव बना हुआ है। बचाव सामग्री का स्टाक तैयार रखा जा रहा है। विभागीय टीम निगरानी कर रही है। जरूरत पड़ने पर तत्काल बचाव कार्य कराया जाएगा।
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