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Kushinagar: ऊंट पकड़कर फंस गई पुलिस, अब कहां से आए चारा-पानी

Sat, 17 Sep 2022 10:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 17 Sep 2022 10:29 AM IST
सार

चेकिंग के दौरान मवेशियों के पकड़े जाने पर पुलिस उन्हें आसपास के ग्रामीणों को सौंप देती है। ऊंटों को मुक्त कराने पर पुलिस को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि यहां के लोगों के लिए ऊंट किसी काम के नहीं होते हैं। ऊंटों को राजस्थान ले जाकर छोड़ने में पुलिस को दिक्कत होती है।

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Police got trapped by holding a camel, now where did the fodder and water come from
टहेरवा थाना परिसर में मुक्त कराए गए ऊंट।संवाद। - फोटो : KUSHINAGAR

विस्तार

राजस्थान से बिहार होते हुए बांग्लादेश ले जाए जा रहे ऊंटों को मुक्त कराना पुलिस का भारी पड़ रहा है। थाना परिसर में ऊंटों को रखकर पुलिस उनकी देखभाल कर रही है। इनमें तीन ऊंटों मौत हो चुकी है। अन्य की सुरक्षा के लिए पुलिस की चिंता बढ़ती जा रही है। ऊंटों के निवाले में हलकान पुलिसकर्मी उनकी परवरिश के लिए ट्रस्ट या एनजीओ की तलाश में जुटे हैं।

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पटहेरवा के एसएचओ अखिलेश सिंह ने बताया कि ऊंटों को क्रूरता पूर्वक ट्रक में लादा गया था, जिससे वह घायल हो गए थे। इस वजह से उनकी मौत हुई है। अन्य ऊंटों की देखभाल का समुचित प्रबंध किया गया है। फोरलेन से गोपालगंज होते हुए पशुओं की तस्करी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक हो रही है। इसकी रोकथाम के लिए एसपी धवल जायसवाल ने नियमित जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
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12 सितंबर को चेकिंग के दौरान हाईवे पर राजस्थान के जैसलमेर से बिहार होते हुए बांग्लादेश ले जाए जा रहे 13 ऊंटों को पटहेरवा पुलिस ने मुक्त कराया था। पुलिस का कहना है कि ऊंटों को जब जब ट्रक से उतारा गया तो उनमें से अधिकांश घायल ें थे। ट्रक में उन्हें बर्बरता पूर्वक बांधा गया था। पुलिस ने ऊंटों को थाना परिसर में छोड़कर उनके लिए भोजन का इंतजाम किया। इस दौरान तीन ऊंटों की मौत हो गई। इन्हें दफना दिया गया। 10 ऊंट पुलिस थाने में हैं। थानाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने बताया कि ऊंटों के भोजन की व्यवस्था की नियमित की जा रही है। ऊंटों को किसी ट्रस्ट या स्वयं सेवी संस्था को सौंपने के संबंध में बातचीत चल रही है।
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नौ साल पहले 67 ऊंट कराए गए थे मुक्त, आधे की हुई थी मौत
चेकिंग के दौरान मवेशियों के पकड़े जाने पर पुलिस उन्हें आसपास के ग्रामीणों को सौंप देती है। ऊंटों को मुक्त कराने पर पुलिस को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि यहां के लोगों के लिए ऊंट किसी काम के नहीं होते हैं। ऊंटों को राजस्थान ले जाकर छोड़ने में पुलिस को दिक्कत होती है।


ऐसे में उनकी देखभाल के लिए किसी संस्था को पुलिस सौंप देती है। नौ साल पहले चेकिंग के दौरान तत्कालीन एसओ अतुल सिंह और फाजिलनगर चौकी प्रभारी एमपी चतुर्वेदी ने दो ट्रकों से 67 ऊंटों को मुक्त कराया था। थाना परिसर में रखे गए ऊंटों को किसी संस्था को सौंपने में विलंब हो गया। इससे करीब 30 ऊंटों की मौत हो गई थी। बाद में एक ट्रस्ट ने बचे ऊंटों को अपनी सुपुर्दगी में लिया था।

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