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आत्मनिर्भर बनाने की योजना ‘फेल’
कुशीनगर
Updated Wed, 23 Mar 2016 04:11 PM IST
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राकेश कुमार गौंड़
पडरौना। 14 से 35 वर्ष तक के बेरोजगारों को रोजगारपरक अल्पकालिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली कौशल विकास मिशन योजना जिले में फेल होती दिख रही है। परीक्षा के मानक के अनुरूप 80 प्रतिशत उपस्थिति किसी के यहां नहीं रही। यही वजह रही कि प्रशिक्षणार्थियों की परीक्षा तक नहीं हो पा रही है।
विभागीय सूत्रों की माने तो वित्तीय वर्ष 2014-15 में राजकीय आईटीआई पडरौना में दो बैचों में प्रशिक्षण के लिए 54 अभ्यर्थियों का एक-एक हफ्ते का बैच बनाया गया, लेकिन पूरी ट्रेनिंग नहीं दी गई।
सेवरही के सरकारी आईटीआई में कोई बैच नहीं बना, जबकि नौरंगिया में चार बैच बनाए गए थे। प्रशिक्षण के लिए पडरौना आईटीआई में स्टोर लिपिक, सेवरही में कनिष्ठ सहायक और नौरंगिया में कार्यदेशक को प्रबंधक की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन प्रशिक्षाणार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए फिंगर प्रिंट्स की व्यवस्था कर दी गई।
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ऐसी दशा में प्रशिक्षाणार्थियों की उपस्थिति ही संतोषजनक नहीं हो पा रही है। राजकीय आईटीआई में वित्तीय वर्ष 2015-16 में भी प्रशिक्षण की दशा बेहद खराब है। क्याेंकि इसकी परीक्षा के लिए 80 प्रतिशत उपस्थिति का लक्ष्य पाना तो दूर 50 प्रतिशत भी किसी बैच में नहीं हो पाने की बात कही जा रही है।
एनजीओ के जरिए भी प्रशिक्षण संतोषजनक नहीं है। ऐसी दशा में इन आईटीआई में दो वर्षों से प्रशिक्षणार्थियों का प्रशिक्षण पूरा नहीं हो रहा है और न ही किसी को रोजगार दिलाया जा सका।
प्रत्येक बैच में 27 लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण 720 घंटे का होता है। प्रशिक्षण पूरा नहीं होने से राजकीय आईटीआई के जरिए किसी को रोजगार नहीं मिला है।
अनिल वर्मा, प्राचार्य, राजकीय आईटीआई एवं
नोडल अधिकारी कौशल विकास मिशन, कुशीनगर।
कुछ ऐसे है हालात
वर्ष 2014 में 99089 युवाआें का पंजीकरण किया गया। 2014-15 में शासन से 3452 बेरोजगाराें को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य था, जिसमें से 1323 की ट्रेनिंग हुई। 2015-16 में 3463 के प्रशिक्षण का लक्ष्य था, उनमें 751 का प्रशिक्षण चल रहा है। स्वयंसेवी संस्थाओं ने पिछले वर्ष 137 को रोजगार उपलब्ध कराया। राजकीय आईटीआई पडरौना, सेवरही और नौरंगिया कोे 250-250 का लक्ष्य मिला था। नौरंगिया के चार बैचों में 108 और पडरौना के तीन बैचों में 81 युवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि सेवरही में अभी बैच ही नहीं बना है।
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पडरौना। 14 से 35 वर्ष तक के बेरोजगारों को रोजगारपरक अल्पकालिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली कौशल विकास मिशन योजना जिले में फेल होती दिख रही है। परीक्षा के मानक के अनुरूप 80 प्रतिशत उपस्थिति किसी के यहां नहीं रही। यही वजह रही कि प्रशिक्षणार्थियों की परीक्षा तक नहीं हो पा रही है।
विभागीय सूत्रों की माने तो वित्तीय वर्ष 2014-15 में राजकीय आईटीआई पडरौना में दो बैचों में प्रशिक्षण के लिए 54 अभ्यर्थियों का एक-एक हफ्ते का बैच बनाया गया, लेकिन पूरी ट्रेनिंग नहीं दी गई।
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सेवरही के सरकारी आईटीआई में कोई बैच नहीं बना, जबकि नौरंगिया में चार बैच बनाए गए थे। प्रशिक्षण के लिए पडरौना आईटीआई में स्टोर लिपिक, सेवरही में कनिष्ठ सहायक और नौरंगिया में कार्यदेशक को प्रबंधक की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन प्रशिक्षाणार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए फिंगर प्रिंट्स की व्यवस्था कर दी गई।
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ऐसी दशा में प्रशिक्षाणार्थियों की उपस्थिति ही संतोषजनक नहीं हो पा रही है। राजकीय आईटीआई में वित्तीय वर्ष 2015-16 में भी प्रशिक्षण की दशा बेहद खराब है। क्याेंकि इसकी परीक्षा के लिए 80 प्रतिशत उपस्थिति का लक्ष्य पाना तो दूर 50 प्रतिशत भी किसी बैच में नहीं हो पाने की बात कही जा रही है।
एनजीओ के जरिए भी प्रशिक्षण संतोषजनक नहीं है। ऐसी दशा में इन आईटीआई में दो वर्षों से प्रशिक्षणार्थियों का प्रशिक्षण पूरा नहीं हो रहा है और न ही किसी को रोजगार दिलाया जा सका।
प्रत्येक बैच में 27 लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण 720 घंटे का होता है। प्रशिक्षण पूरा नहीं होने से राजकीय आईटीआई के जरिए किसी को रोजगार नहीं मिला है।
अनिल वर्मा, प्राचार्य, राजकीय आईटीआई एवं
नोडल अधिकारी कौशल विकास मिशन, कुशीनगर।
कुछ ऐसे है हालात
वर्ष 2014 में 99089 युवाआें का पंजीकरण किया गया। 2014-15 में शासन से 3452 बेरोजगाराें को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य था, जिसमें से 1323 की ट्रेनिंग हुई। 2015-16 में 3463 के प्रशिक्षण का लक्ष्य था, उनमें 751 का प्रशिक्षण चल रहा है। स्वयंसेवी संस्थाओं ने पिछले वर्ष 137 को रोजगार उपलब्ध कराया। राजकीय आईटीआई पडरौना, सेवरही और नौरंगिया कोे 250-250 का लक्ष्य मिला था। नौरंगिया के चार बैचों में 108 और पडरौना के तीन बैचों में 81 युवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि सेवरही में अभी बैच ही नहीं बना है।