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प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान रहे मरीज
कुशीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 29 Jul 2018 01:23 AM IST
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प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान रहे मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भंग कर नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल लागू किए जाने के विरोध में आईएमए के डॉक्टरों ने सुबह छह से शाम छह बजे तक ओपीडी बंद रखा। निजी डॉक्टरों ने एकत्र होकर बैठक की और उसके बाद डीएम से मिलकर ज्ञापन सौंपा। डॉक्टरों ने अपनी मांगों से केंद्र और प्रदेश सरकार को अवगत कराए जाने की मांग की। प्राइवेट डॉक्टरों के हड़ताल के कारण मरीजों को इधर-भटककर परेशान होना पड़ा। साथ ही सरकारी अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ गया।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र वानखेड़े के आह्वान पर संगठन से जुड़े प्राइवेट डॉक्टरों ने शनिवार को सुबह छह से शाम छह बजे तक अपने-अपने अस्पतालों की ओपीडी (वाह्य रोगी कक्ष) बंद रखी। उसके बाद सुबह दस बजे आईएमए के सदस्य डॉ. ज्ञानप्रकाश राय के आवास पर एकत्र हुए। यहां बैठक में डॉक्टरों ने संगठन की तरफ से अपनी मांगों का ज्ञापन डीएम को सौंपने का निर्णय लिया। आईएमए कुशीनगर के अध्यक्ष डॉ. बीके बर्नवाल ने कहा कि संगठन के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार एमसीआई को भंग कर नेशनल मेडिकल कमीशन को वर्तमान लोकसभा सत्र में पारित करने पर अडिग है। यह आम जन के खिलाफ है। इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव गरीब मरीजों पर पड़ेगा। संगठन के सचिव डॉ. अजय कुमार शुक्ल का कहना था कि एनएमसी में 25 सदस्य हैं। जिनमें पांच डॉक्टर और 20 नॉन मेडिको होंगे। ऐसे में डॉक्टरों का पक्ष मजबूत नहीं होगा। बैठक को आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. केएन सिंह, डॉ. रामायन सिंह, डॉ. वीके सिंह, डॉ. ज्ञानप्रकाश सिंह, डॉ. योगेश्वर मद्धेशिया, महिला सदस्य डॉ. सुरभि श्रीवास्तव और डॉ. भावना गुप्ता ने भी संबोधित करते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन बिल को डॉक्टरों के हित के खिलाफ बताया। बैठक के बाद सभी डॉक्टर कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां डीएम से मिलकर अपनी मांगों से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा। इस दौरान डॉ. एसके अब्दुस समद, डॉ. सीके त्रिपाठी, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. आरएस यादव, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. विनय मद्धेशिया, डॉ. पीएन गुप्ता, डॉ. राजीव मिश्र, डॉ. देवशरण सिंह, डॉ. वाईके मद्धेशिया, डॉ. केपी गौड़, डॉ. राजेश आदि मौजूद रहे।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र वानखेड़े के आह्वान पर संगठन से जुड़े प्राइवेट डॉक्टरों ने शनिवार को सुबह छह से शाम छह बजे तक अपने-अपने अस्पतालों की ओपीडी (वाह्य रोगी कक्ष) बंद रखी। उसके बाद सुबह दस बजे आईएमए के सदस्य डॉ. ज्ञानप्रकाश राय के आवास पर एकत्र हुए। यहां बैठक में डॉक्टरों ने संगठन की तरफ से अपनी मांगों का ज्ञापन डीएम को सौंपने का निर्णय लिया। आईएमए कुशीनगर के अध्यक्ष डॉ. बीके बर्नवाल ने कहा कि संगठन के विरोध के बावजूद केंद्र सरकार एमसीआई को भंग कर नेशनल मेडिकल कमीशन को वर्तमान लोकसभा सत्र में पारित करने पर अडिग है। यह आम जन के खिलाफ है। इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव गरीब मरीजों पर पड़ेगा। संगठन के सचिव डॉ. अजय कुमार शुक्ल का कहना था कि एनएमसी में 25 सदस्य हैं। जिनमें पांच डॉक्टर और 20 नॉन मेडिको होंगे। ऐसे में डॉक्टरों का पक्ष मजबूत नहीं होगा। बैठक को आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. केएन सिंह, डॉ. रामायन सिंह, डॉ. वीके सिंह, डॉ. ज्ञानप्रकाश सिंह, डॉ. योगेश्वर मद्धेशिया, महिला सदस्य डॉ. सुरभि श्रीवास्तव और डॉ. भावना गुप्ता ने भी संबोधित करते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन बिल को डॉक्टरों के हित के खिलाफ बताया। बैठक के बाद सभी डॉक्टर कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां डीएम से मिलकर अपनी मांगों से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा। इस दौरान डॉ. एसके अब्दुस समद, डॉ. सीके त्रिपाठी, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. आरएस यादव, डॉ. विवेक सिंह, डॉ. विनय मद्धेशिया, डॉ. पीएन गुप्ता, डॉ. राजीव मिश्र, डॉ. देवशरण सिंह, डॉ. वाईके मद्धेशिया, डॉ. केपी गौड़, डॉ. राजेश आदि मौजूद रहे।
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