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Kushinagar News: रिहायशी इलाकों में बाघ और तेंदुए के बार-बार हमलों से दहशत
Wed, 08 Nov 2023 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 08 Nov 2023 01:11 AM IST
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- जंगल से निकलकर जिले और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में आ जा रहे हिंसक जानवर
- खेती के लिए घरों से निकलने में भी घबरा रहे हैं सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग
खड्डा। जंगल से निकलकर यूपी-बिहार सीमा के रिहायशी इलाके में बाघ व तेंदुए लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। एक वर्ष पहले बाघ के हमले में नौ लोगों की जान चली गई थी। वहीं एक बाघ को आदमखोर घोषित कर गोली मार दी गई थी। खड्डा क्षेत्र में तेंदुए ने एक महिला व एक बच्ची को मार डाला था। इनके अलावा कई लोगों को घायल को चुके हैं। हिंसक जानवर मवेशियों व बकरियों आदि का शिकार कर डालते हैं।
जनपद से सटे विहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व 899.38 वर्ग किलोमीटर फैला है। इसमें लगभग 54 बाघ मौजूद हैं। तेंदुओं की संख्या भी अच्छी खासी है। जंगल की सीमा खुली हुई है। इसी तरह कुशीनगर जनपद के बगल में ही महराजगंज जनपद का सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य जंगल हैं। इसमें भी बाघ, तेंदुआ सहित हिंसक जानवर हैं। इस जंगल की भी सीमा खुली है।
दोनों जंगलों से खड्डा क्षेत्र की सीमा जुड़ती हैं। इसके साथ ही बिहार के लगभग 150 गांवों सहित संवेदनशील जोन में 260 गांव जुड़े हुए हैं। जंगल से निकलकर जानवर, जीव-जंतु ग्रामीण क्षेत्रों में आ जाते हैं। रविवार शाम जनपद से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से निकले बाघ ने गोनौली गांव के किसान नारायण की चार बकरियां मार डाली थीं। नारायण की जान बड़ी मुश्किल से बची थी।
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कुछ दिन पहले खड्डा क्षेत्र के रामपुर गोनहा गांव के पास सरेह में एक बछड़े को हिंसक जानवर ने मार डाला था।
हिंसक जानवरों ने ऐसे पहुंचाई क्षति
- वर्ष 2022 में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से निकले बाघ के हमले में बबिता देवी व उनके पुत्र शिवम, संजय महतो, बगड़ी कुमारी, रामप्रसाद उरांव, प्रेमकुमारी देवी, धर्मराज काजी, पार्वती देवी और राजकुमार बैठा की मौत हो गई थी।
- खड्डा क्षेत्र के लखुआ लखुई, कोपजंगल आदि क्षेत्र में वर्ष 2021 में तत्कालीन रेंजर खड्डा बीके यादव सहित 14 लोगों को बाघ ने घायल कर दिया था।
- इसी तरह तेंदुए ने भैसहा गांव के कोटवा टोला में घुसकर 6 वर्ष की बच्ची व 25 वर्ष की युवती को घायल कर दिया था। इसमें आरती की मौत हो गई थी। मदनपुर सुकरौली गांव की कोईली देवी को तेंदुए ने मार डाला था।
डंडे के सहारे कैसे करें बाघ और तेंदुए का सामना
खड्डा के वन कर्मियों के पास बाघ और तेंदुआ जैसे हिंसक जानवरों का सामना करने के लिए संसाधन नहीं हैं। डंडे के सहारे खतरनाक जानवरों को काबू करने की कोशिश की जाती है। खड्डा तहसील क्षेत्र एवं आंशिक पडरौना क्षेत्र में फैले खड्डा वन क्षेत्र की सीमा बीटीआर व सोहगीबरवा वन क्षेत्र से सीधे जुड़ी हुई है। इस क्षेत्र से गंडक नदी गुजरती है। संसाधन व प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की वर्षो से मांग हो रही है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है।
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- खेती के लिए घरों से निकलने में भी घबरा रहे हैं सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग
खड्डा। जंगल से निकलकर यूपी-बिहार सीमा के रिहायशी इलाके में बाघ व तेंदुए लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। एक वर्ष पहले बाघ के हमले में नौ लोगों की जान चली गई थी। वहीं एक बाघ को आदमखोर घोषित कर गोली मार दी गई थी। खड्डा क्षेत्र में तेंदुए ने एक महिला व एक बच्ची को मार डाला था। इनके अलावा कई लोगों को घायल को चुके हैं। हिंसक जानवर मवेशियों व बकरियों आदि का शिकार कर डालते हैं।
जनपद से सटे विहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व 899.38 वर्ग किलोमीटर फैला है। इसमें लगभग 54 बाघ मौजूद हैं। तेंदुओं की संख्या भी अच्छी खासी है। जंगल की सीमा खुली हुई है। इसी तरह कुशीनगर जनपद के बगल में ही महराजगंज जनपद का सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य जंगल हैं। इसमें भी बाघ, तेंदुआ सहित हिंसक जानवर हैं। इस जंगल की भी सीमा खुली है।
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दोनों जंगलों से खड्डा क्षेत्र की सीमा जुड़ती हैं। इसके साथ ही बिहार के लगभग 150 गांवों सहित संवेदनशील जोन में 260 गांव जुड़े हुए हैं। जंगल से निकलकर जानवर, जीव-जंतु ग्रामीण क्षेत्रों में आ जाते हैं। रविवार शाम जनपद से सटे बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से निकले बाघ ने गोनौली गांव के किसान नारायण की चार बकरियां मार डाली थीं। नारायण की जान बड़ी मुश्किल से बची थी।
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कुछ दिन पहले खड्डा क्षेत्र के रामपुर गोनहा गांव के पास सरेह में एक बछड़े को हिंसक जानवर ने मार डाला था।
हिंसक जानवरों ने ऐसे पहुंचाई क्षति
- वर्ष 2022 में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल से निकले बाघ के हमले में बबिता देवी व उनके पुत्र शिवम, संजय महतो, बगड़ी कुमारी, रामप्रसाद उरांव, प्रेमकुमारी देवी, धर्मराज काजी, पार्वती देवी और राजकुमार बैठा की मौत हो गई थी।
- खड्डा क्षेत्र के लखुआ लखुई, कोपजंगल आदि क्षेत्र में वर्ष 2021 में तत्कालीन रेंजर खड्डा बीके यादव सहित 14 लोगों को बाघ ने घायल कर दिया था।
- इसी तरह तेंदुए ने भैसहा गांव के कोटवा टोला में घुसकर 6 वर्ष की बच्ची व 25 वर्ष की युवती को घायल कर दिया था। इसमें आरती की मौत हो गई थी। मदनपुर सुकरौली गांव की कोईली देवी को तेंदुए ने मार डाला था।
डंडे के सहारे कैसे करें बाघ और तेंदुए का सामना
खड्डा के वन कर्मियों के पास बाघ और तेंदुआ जैसे हिंसक जानवरों का सामना करने के लिए संसाधन नहीं हैं। डंडे के सहारे खतरनाक जानवरों को काबू करने की कोशिश की जाती है। खड्डा तहसील क्षेत्र एवं आंशिक पडरौना क्षेत्र में फैले खड्डा वन क्षेत्र की सीमा बीटीआर व सोहगीबरवा वन क्षेत्र से सीधे जुड़ी हुई है। इस क्षेत्र से गंडक नदी गुजरती है। संसाधन व प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की वर्षो से मांग हो रही है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है।