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कार्य और दिन तय, पूर्ण बजट का पता नहीं
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कार्य और दिन तय, पूर्ण बजट का पता नहीं
गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत 1049 ग्राम पंचायतों में बनने हैं सामुदायिक शौचालय
315 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का भी कराना है निर्माण
राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त के बजट से कराए जाने हैं दोनों काम
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत शासन ने जिले में 315 पंचायत भवन और 1049 सामुदायिक शौचालय बनाने का लक्ष्य तय कर दिया है। इसके लिए 125 दिन का समय तय है। यह कार्य ग्राम पंचायतों को राज्य व केंद्रीय वित्त की निधि से मिली रकम से कराना है। सच यह है कि ग्राम पंचायतों के पास इतना बजट नहीं होता कि वे करीब 25 लाख रुपये की इन परियोजनाओं को बिना अतिरिक्त बजट के पूरा कराना आसान नहीं है।
जिले के 14 ब्लाकों में 1049 ग्राम पंचायतें हैं। यहां हर वर्ष छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए राज्य वित्त आयोग (पंचम वित्त) व केंद्रीय वित्त आयोग (15वें वित्त) से धन मिलता है। आबादी के आधार पर इस रकम का आवंटन होता है। जिन ग्राम पंचायतों की आबादी पांच हजार से अधिक हैं वहां इस मद में करीब 10 से 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष मिलते हैं। छोटी ग्राम पंचायतों जिनकी आबादी एक से दो हजार के बीच है उन्हें करीब एक लाख रुपये तक मिलते हैं। सामान्यत: इस बजट से ग्राम पंचायतें नाली मरम्मत, हैंडपंप मरम्मत, चबूतरा निर्माण, स्कूल व पंचायत भवन समेत अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों की मरम्मत आदि का कार्य कराती हैं।
लॉकडाउन के दौरान बाहर से घर वापस लौटे प्रवासी अकुशल श्रमिकों को अपने गांव में ही अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार की तरफ से गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरूआत की है। इसके तहत जुलाई से अक्तूबर के बीच ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए शासन ने गाइड लाइन भी जारी कर दी है। निर्देश है कि इन कार्यों को जल्दी शुरू कराते हुए पूर्ण कराया जाए जिससे कि अकुशल श्रमिकों को अधिक से अधिक कार्य मिल सके। परंतु ग्राम प्रधानों की असल दिक्कत यह है कि जितना बजट राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त आयोग से मिलता है उतने में यह दोनों कार्य संभव नहीं हैं। अगर किसी बड़ी ग्राम पंचायत में जैसे-तैसे कार्य हो भी गया तो वहां इसके बाद पूरे वर्ष अन्य छोटे-छोटे कार्यों के लिए कोई धन उपलब्ध नहीं होगा।
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क्या कहते हैं ग्राम प्रधान
प्रधान संघ विशुनपुरा के ब्लॉक अध्यक्ष ओमप्रकाश यादव का कहना है कि राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त के बजट से पहले ही ग्राम पंचायतों ने नाली मरम्मत, हैंडपंप मरम्मत, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों के सुंदरीकरण का कार्य दिया है। अब इसी धन से सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन का निर्माण कराना संभव नहीं है।
सिसवा गोईती के ग्राम प्रधान व प्रधान संघ विशुनपुरा के महामंत्री विष्णु प्रताप सिंह का कहना है कि अकेले पंचायत भवन के निर्माण का बजट ही 18 लाख रुपये से अधिक का है जबकि ग्राम पंचायतों को इस मद में अधिकतम 12 लाख रुपये ही मिलते हैं। ऐसे में बिना अतिरिक्त बजट मिले यह कार्य करा पाना संभव नहीं है।
दुदही ब्लाक के गांव ठाढ़ीभार के प्रधान प्रतिनिधि जयप्रकाश यादव, पडरौना मडुरही के शिवशंकर कुशवाहा, मोतीचक ब्लॉक की ग्राम पंचायत सिरसिया के प्रधान प्रतिनिधि नौरंग सिंह व बहुआस के प्रधान आकाश सिंह ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायतों को इस मद में औसतन आठ से 10 लाख रुपये मिलते हैं जिससे आम लोगों की सुविधा के लिए कई कार्य कराना होता है। ऐसे में बिना अतिरिक्त बजट मिले सामुदायिक शौचालय या पंचायत भवन का निर्माण करा पाना संभव नहीं है।
ग्राम पंचायतों में चतुर्थ वित्त व 14 वें वित्त की बची हुई और पांचवें वित्त व 15वें वित्त की आवंटित धनराशि से यह कार्य कराना है। सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण होगा। वहीं केवल 315 ग्राम पंचायतों में ही पंचायत भवन भी बनेगा। पंचायत भवन निर्माण में मजदूरी मनरेगा के खाते से दी जाएगी। सरकार की मंशानुरूप कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। बजट कम पड़ा तो इसके लिए शासन को डिमांड भेजी जाएगी। जब समस्या आएगी तभी समाधान निकलेगा।
-राघवेंद्र द्विवेदी, डीपीआरओ
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गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत 1049 ग्राम पंचायतों में बनने हैं सामुदायिक शौचालय
315 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन का भी कराना है निर्माण
राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त के बजट से कराए जाने हैं दोनों काम
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत शासन ने जिले में 315 पंचायत भवन और 1049 सामुदायिक शौचालय बनाने का लक्ष्य तय कर दिया है। इसके लिए 125 दिन का समय तय है। यह कार्य ग्राम पंचायतों को राज्य व केंद्रीय वित्त की निधि से मिली रकम से कराना है। सच यह है कि ग्राम पंचायतों के पास इतना बजट नहीं होता कि वे करीब 25 लाख रुपये की इन परियोजनाओं को बिना अतिरिक्त बजट के पूरा कराना आसान नहीं है।
जिले के 14 ब्लाकों में 1049 ग्राम पंचायतें हैं। यहां हर वर्ष छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए राज्य वित्त आयोग (पंचम वित्त) व केंद्रीय वित्त आयोग (15वें वित्त) से धन मिलता है। आबादी के आधार पर इस रकम का आवंटन होता है। जिन ग्राम पंचायतों की आबादी पांच हजार से अधिक हैं वहां इस मद में करीब 10 से 12 लाख रुपये प्रतिवर्ष मिलते हैं। छोटी ग्राम पंचायतों जिनकी आबादी एक से दो हजार के बीच है उन्हें करीब एक लाख रुपये तक मिलते हैं। सामान्यत: इस बजट से ग्राम पंचायतें नाली मरम्मत, हैंडपंप मरम्मत, चबूतरा निर्माण, स्कूल व पंचायत भवन समेत अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों की मरम्मत आदि का कार्य कराती हैं।
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लॉकडाउन के दौरान बाहर से घर वापस लौटे प्रवासी अकुशल श्रमिकों को अपने गांव में ही अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार की तरफ से गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरूआत की है। इसके तहत जुलाई से अक्तूबर के बीच ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए शासन ने गाइड लाइन भी जारी कर दी है। निर्देश है कि इन कार्यों को जल्दी शुरू कराते हुए पूर्ण कराया जाए जिससे कि अकुशल श्रमिकों को अधिक से अधिक कार्य मिल सके। परंतु ग्राम प्रधानों की असल दिक्कत यह है कि जितना बजट राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त आयोग से मिलता है उतने में यह दोनों कार्य संभव नहीं हैं। अगर किसी बड़ी ग्राम पंचायत में जैसे-तैसे कार्य हो भी गया तो वहां इसके बाद पूरे वर्ष अन्य छोटे-छोटे कार्यों के लिए कोई धन उपलब्ध नहीं होगा।
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क्या कहते हैं ग्राम प्रधान
प्रधान संघ विशुनपुरा के ब्लॉक अध्यक्ष ओमप्रकाश यादव का कहना है कि राज्य वित्त व केंद्रीय वित्त के बजट से पहले ही ग्राम पंचायतों ने नाली मरम्मत, हैंडपंप मरम्मत, ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों के सुंदरीकरण का कार्य दिया है। अब इसी धन से सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन का निर्माण कराना संभव नहीं है।
सिसवा गोईती के ग्राम प्रधान व प्रधान संघ विशुनपुरा के महामंत्री विष्णु प्रताप सिंह का कहना है कि अकेले पंचायत भवन के निर्माण का बजट ही 18 लाख रुपये से अधिक का है जबकि ग्राम पंचायतों को इस मद में अधिकतम 12 लाख रुपये ही मिलते हैं। ऐसे में बिना अतिरिक्त बजट मिले यह कार्य करा पाना संभव नहीं है।
दुदही ब्लाक के गांव ठाढ़ीभार के प्रधान प्रतिनिधि जयप्रकाश यादव, पडरौना मडुरही के शिवशंकर कुशवाहा, मोतीचक ब्लॉक की ग्राम पंचायत सिरसिया के प्रधान प्रतिनिधि नौरंग सिंह व बहुआस के प्रधान आकाश सिंह ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायतों को इस मद में औसतन आठ से 10 लाख रुपये मिलते हैं जिससे आम लोगों की सुविधा के लिए कई कार्य कराना होता है। ऐसे में बिना अतिरिक्त बजट मिले सामुदायिक शौचालय या पंचायत भवन का निर्माण करा पाना संभव नहीं है।
ग्राम पंचायतों में चतुर्थ वित्त व 14 वें वित्त की बची हुई और पांचवें वित्त व 15वें वित्त की आवंटित धनराशि से यह कार्य कराना है। सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण होगा। वहीं केवल 315 ग्राम पंचायतों में ही पंचायत भवन भी बनेगा। पंचायत भवन निर्माण में मजदूरी मनरेगा के खाते से दी जाएगी। सरकार की मंशानुरूप कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। बजट कम पड़ा तो इसके लिए शासन को डिमांड भेजी जाएगी। जब समस्या आएगी तभी समाधान निकलेगा।
-राघवेंद्र द्विवेदी, डीपीआरओ