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पाकिस्तानी नागरिक प्रकरण : मदरसा में शिक्षक है गिरफ्तार सीएससी संचालक, जांच में जुटी पुलिस

Fri, 13 Jun 2025 01:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Fri, 13 Jun 2025 01:57 AM IST
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Pakistani citizen case: CSC operator arrested is a teacher in madrasa, police engaged in investigation
कुशीनगर। पाकिस्तानी नागरिक सेराजुल हक के साथ पकड़ा गया सीएससी संचालक शब्बीर आजम दुदही कस्बे में स्थित एक मदरसा में शिक्षक है। पुलिस इस दिशा में जांच में जुट गई है। बुधवार को पटहेरवा पुलिस ने लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रहे पाकिस्तानी नागरिक सहित उसके दो मददगारों को पकड़ा था। इन दोनों ने फर्जी कागजात बनाने मदद की थी। जिले में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर रहने और बांग्लादेशी रोहिंग्या कनेक्शन को लेकर पहले भी एटीएस और पुलिस की टीम कार्रवाई कर चुकी हैं।
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आमतौर पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों (हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) के लिए जारी किए जाने वाले एलटीवी (लॉन्ग टर्म वीजा) के तहत पांच साल के लिए अनुमति मिलती है। सेराजुल ने फर्जी पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड) बनवाकर छह दशक तक भारतीय नागरिक की तरह तमाम योजनाओं का लाभ लिया। सूत्रों के अनुसार देश विरोधी गतिविधियों में भी उसकी संलिप्तता होने का संदेह है। वहीं जिस सीएससी संचालक के सहारे सेराजुल हक ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए उसका कनेक्शन मदरसे से जुड़ा हुआ है। यह कोई पहला मामला नहीं है, जब जिले में बांग्लादेशी, पाकिस्तानी नागरिकों की संलिप्तता मिली है। इसके पहले भी अवैध गतिविधियों से सीएससी और सीएसपी संचालक फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुके हैं। एक मामले में हाथरस पुलिस ने भी गिरफ्तारी की थी।
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एलटीवी पर भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिक और उसे बसाने वाले स्थानीय मददगार हिरासत में लिए गए तो हड़कंप मच गया। पूर्व में कुशीनगर से बांग्लादेशी नागरिक भी गिरफ्तार हो चुका है। अब पाकिस्तानी कनेक्शन मिलने के बाद लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और खुफिया एजेंसी सक्रिय हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार इस मामले में यह भी अंदेशा है कि पकड़ा गया सेराजुल हक देश विरोधी गतिविधियों में भी संलिप्त हो सकता है। भारत-पाकिस्तान के बीच हाल में उत्पन्न हुए तनाव के बाद हुई इस गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और सतर्कता बरत रही है। हालांकि उसके जिले में कई सगे संबंधी हैं और वह सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन व्यतीत करता था, लेकिन फिर भी फर्जी तरीके से नागरिकता हासिल कर शरण लेना और यहां आयुष्मान योजना से लेकर सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेना सवालिया निशान खड़ा करता है। दूसरी ओर फर्जी पहचान पत्र बनाने वाले का भी कनेक्शन मदरसे से मिला है। वह मदरसे में शिक्षक है। इस मामले में पुलिस ने विवेचना में कई अन्य इनपुट्स को जांच का हिस्सा बनाया है। सूत्रों के अनुसार संभव है कि एटीएस और एसटीएफ भी जांच में सम्मिलित हो सकती हैं।
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फर्जी प्रमाण पत्र पर पहले भी बसाए गए परिवार



अगस्त 2024 में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की ओर से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में पूछताछ के बाद जिले के तरयासुजान और विशुनपुरा क्षेत्र से दो युवकों को गिरफ्तार कर लखनऊ ले जाया गया था, जिसका कनेक्शन बांग्लादेशी और रोहिंग्या से निकलकर सामने आया था। तब इस बात की चर्चा थी कि जन्म प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े के जरिए बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को नागरिकता दिलाने में मदद की गई है। इसके संकेत मिलने के बाद उन्हें कहां बसाया गया और उसमें कितने परिवार शामिल हैं? इसकी चर्चा हुई थी। अब सूत्र बता रहे हैं कि उक्त प्रमाण पत्र फर्जीवाड़े से ही कई लोगों को नागरिकता देने में मदद तो नहीं की गई। यह भी एक सवाल उभकर कर सामने आया है।
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