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कुशीनगर जिले का हाल: 35 लाख की आबादी के लिए सिर्फ चार एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस
Mon, 03 Oct 2022 09:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 03 Oct 2022 09:02 AM IST
सार
एएलएस एंबुलेंस एक आईसीयू की तरह होती है। इसमें गंभीर मरीज के लिए हर सुविधा उपलब्ध रहती है। यदि किसी गंभीर मरीज को रेफर किया जाता है तो देश के किसी भी अस्पताल में सुरक्षित ले जाने का काम यह एंबुलेंस करती है। इसमें सभी जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध होते हैं।
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एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस। संवाद
- फोटो : KUSHINAGAR
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विस्तार
कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर में मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं हो पाई है। जनपद में 35 लाख की आबादी पर सिर्फ चार एएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को रेफर करने पर उन्हें ले जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है।
कोरोना संक्रमण काल में एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस काफी काम आए थे। तब ऑक्सीजन की कमी या अन्य कारणों से गंभीर हालत वाले मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में इनका काफी प्रयोग हुआ था। उस समय भी इनकी संख्या चार ही थी। तब से अब तक इनकी संख्या में वृद्धि नहीं हो पाई है। जीवनरक्षक उपकरणों से लैस यह एंबुलेंस मरीजों की जान बचाने का काम करती हैं। यदि जिला अस्पताल में भर्ती किसी मरीज की अचानक हालत गंभीर हो जाती है तो उसे एएलएस एंबुलेंस की मदद से मेडिकल कॉलेज या अन्य चिकित्सा संस्थानों में उपचार के लिए रेफर किया जाता है।
एएलएस एंबुलेंस की खूबियां
एएलएस एंबुलेंस एक आईसीयू की तरह होती है। इसमें गंभीर मरीज के लिए हर सुविधा उपलब्ध रहती है। यदि किसी गंभीर मरीज को रेफर किया जाता है तो देश के किसी भी अस्पताल में सुरक्षित ले जाने का काम यह एंबुलेंस करती है। इसमें सभी जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध होते हैं। आकस्मिक स्थिति के समय जरूरी दवाएं, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर सहित अन्य सुविधा भी इस एंबुलेंस में रहती है। इस एंबुलेंस का रिस्पांस समय 15 मिनट होता है।
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ये एंबुलेंस भी उपलब्ध-
सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने बताया कि जनपद में डायल 108 वाले 34 एंबुलेंस उपलब्ध हैं। डायल 102 वाले 37 और एएलएस एंबुलेंस चार हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इनका रिस्पांस टाइम 30 मिनट और शहरी क्षैत्रों में 15 मिनट होता है।
एएलएस काफी महत्वपूर्ण एंबुलेंस होती हैं। जिले में चार एएलएस एंबुलेंस हैं। इन्हें जिला अस्पताल में रखा जाता है। मेडिकल कॉलेज रेफर होने वाले गंभीर मरीजों को यह एंबुलेंस मिलती है। अभी इनकी संख्या नहीं बढ़ी है।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
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कोरोना संक्रमण काल में एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस काफी काम आए थे। तब ऑक्सीजन की कमी या अन्य कारणों से गंभीर हालत वाले मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में इनका काफी प्रयोग हुआ था। उस समय भी इनकी संख्या चार ही थी। तब से अब तक इनकी संख्या में वृद्धि नहीं हो पाई है। जीवनरक्षक उपकरणों से लैस यह एंबुलेंस मरीजों की जान बचाने का काम करती हैं। यदि जिला अस्पताल में भर्ती किसी मरीज की अचानक हालत गंभीर हो जाती है तो उसे एएलएस एंबुलेंस की मदद से मेडिकल कॉलेज या अन्य चिकित्सा संस्थानों में उपचार के लिए रेफर किया जाता है।
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एएलएस एंबुलेंस की खूबियां
एएलएस एंबुलेंस एक आईसीयू की तरह होती है। इसमें गंभीर मरीज के लिए हर सुविधा उपलब्ध रहती है। यदि किसी गंभीर मरीज को रेफर किया जाता है तो देश के किसी भी अस्पताल में सुरक्षित ले जाने का काम यह एंबुलेंस करती है। इसमें सभी जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध होते हैं। आकस्मिक स्थिति के समय जरूरी दवाएं, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर सहित अन्य सुविधा भी इस एंबुलेंस में रहती है। इस एंबुलेंस का रिस्पांस समय 15 मिनट होता है।
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ये एंबुलेंस भी उपलब्ध-
सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया ने बताया कि जनपद में डायल 108 वाले 34 एंबुलेंस उपलब्ध हैं। डायल 102 वाले 37 और एएलएस एंबुलेंस चार हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इनका रिस्पांस टाइम 30 मिनट और शहरी क्षैत्रों में 15 मिनट होता है।
एएलएस काफी महत्वपूर्ण एंबुलेंस होती हैं। जिले में चार एएलएस एंबुलेंस हैं। इन्हें जिला अस्पताल में रखा जाता है। मेडिकल कॉलेज रेफर होने वाले गंभीर मरीजों को यह एंबुलेंस मिलती है। अभी इनकी संख्या नहीं बढ़ी है।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ