{"_id":"5f493a378ebc3e4adf3fb06d","slug":"only-14-doctor-in-homeopath-hospital-kushinagar-news-gkp3634239191","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉक्टरों को संबंद्घ कर संचालित किए जा रहे है अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉक्टरों को संबंद्घ कर संचालित किए जा रहे है अस्पताल
विज्ञापन
14 चिकित्सकों पर निर्भर हैं 45 होम्योपैथिक अस्पताल
15 अस्पताल गोदाम, पंचायत भवन अथवा अन्य सरकारी भवन में हो रहे संचालित
जिले में आयुष चिकित्सा पद्धति का सूरत-ए- हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना(कुशीनगर )। सरकार आयुष चिकित्सा पर पूरा ध्यान आकर्षित कर रही है। लेकिन जनपद में संचालित 45 होम्योपैथिक अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं है। न तो पर्याप्त अस्पताल भवन हैं और न ही डॉक्टरों की समुचित व्यवस्था है। वहीं, एलोपैथ की तुलना में होम्योपैथिक अस्पतालों की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक नहीं है।
जानकारी के मुताबिक होम्योपैथिक अस्पताल खाली पड़े विद्यालय भवन में चल रहा है तो कोई गोदाम या पंचायत भवन या अन्य सरकारी भवन में संचालित हो रहे हैं। वहीं, 45 अस्पतालों में केवल 14 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं, जिन्हें अपने तैनाती वाले अस्पताल के अलावा अन्य खाली अस्पतालों में अतिरिक्त सेवा भी देना पड़ता है। एलोपैथ की तुलना में होम्योपैथिक चिकित्सालयों की स्थिति डॉक्टरों और चिकित्सकीय स्टाफ के मामले में कोई सुधार नहीं है। जिला मुख्यालय और पडरौना शहर में स्थित होम्योपैथिक चिकित्सालय ही डॉक्टर विहीन हैं। यहां दूसरे होम्योपैथिक अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई है, जो सप्ताह में एक दिन यहां भी मरीज देखते हैं। जिले के 14 होम्योपैथिक चिकित्सालय अपने निकटवर्ती सीएचसी-पीएचसी से संबद्ध हो गए हैं। जबकि 15 होम्योपैथिक अस्पताल विभागीय भवन में हैं, जबकि अन्य खाली पड़े सरकारी भवन, विद्यालय, गोदाम या फिर पंचायत भवन में संचालित किए जा रहे हैं।
विभाग के मुताबिक चिकित्सकीय व्यवस्था सुचारु रूप से बनाए रखने के लिए बनकटा, रामघाट कोइलसवा, कसया, फाजिलनगर, मल्लूडीह, पड़री बाजार, सुकरौली, पैकौली, टेकुआटार, खड्डा, पिपरा बाजार, रामपुर गोनहा के डॉक्टर एक-एक दिन अन्य रिक्त अस्पतालों में अटैच किए गए हैं। उपलब्ध डॉक्टरों को ही रिक्त अस्पतालों में भेजकर वहां भी मरीजों का इलाज कराया जाता है।
विज्ञापन
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बांटी जा रही दवा
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी ने बताया कि कोरोना महामारी से बचाव का सर्वोत्तम तरीका इससे बचाव करना है। ऐसे में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विभाग की तरफ से आर्सेनिक अलबम-30 नाम की दवा वितरित कराई जा रही है। अब तक इस दवा की छह हजार से अधिक शीशियां वितरित की जा चुकी हैं। यह सभी होम्योपैथिक अस्पताल पर उपलब्ध हैं।
सितंबर में 16 नए डॉक्टर मिलने की उम्मीद
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार गौड़ ने बताया कि जिले में 45 के सापेक्ष सिर्फ 14 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। लिहाजा इन डॉक्टरों को रिक्त अस्पतालों में भी सप्ताह में एक-एक दिन के लिए संबद्ध किया गया है ताकि उन क्षेत्रों के लोगों को भी होम्योपैथिक चिकित्सा का लाभ मिल सके। सभी अस्पतालों में दवाइयां उपलब्ध हैं। संघ लोक सेवा आयोग से होम्योपैथिक चिकित्सकों की नियुक्ति हो गई है। निदेशालय में वार्ता हुई है। अगले महीने 16 नए डॉक्टर इस जिले को मिल जाएंगे।
विज्ञापन
15 अस्पताल गोदाम, पंचायत भवन अथवा अन्य सरकारी भवन में हो रहे संचालित
जिले में आयुष चिकित्सा पद्धति का सूरत-ए- हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना(कुशीनगर )। सरकार आयुष चिकित्सा पर पूरा ध्यान आकर्षित कर रही है। लेकिन जनपद में संचालित 45 होम्योपैथिक अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं है। न तो पर्याप्त अस्पताल भवन हैं और न ही डॉक्टरों की समुचित व्यवस्था है। वहीं, एलोपैथ की तुलना में होम्योपैथिक अस्पतालों की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक नहीं है।
जानकारी के मुताबिक होम्योपैथिक अस्पताल खाली पड़े विद्यालय भवन में चल रहा है तो कोई गोदाम या पंचायत भवन या अन्य सरकारी भवन में संचालित हो रहे हैं। वहीं, 45 अस्पतालों में केवल 14 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं, जिन्हें अपने तैनाती वाले अस्पताल के अलावा अन्य खाली अस्पतालों में अतिरिक्त सेवा भी देना पड़ता है। एलोपैथ की तुलना में होम्योपैथिक चिकित्सालयों की स्थिति डॉक्टरों और चिकित्सकीय स्टाफ के मामले में कोई सुधार नहीं है। जिला मुख्यालय और पडरौना शहर में स्थित होम्योपैथिक चिकित्सालय ही डॉक्टर विहीन हैं। यहां दूसरे होम्योपैथिक अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई है, जो सप्ताह में एक दिन यहां भी मरीज देखते हैं। जिले के 14 होम्योपैथिक चिकित्सालय अपने निकटवर्ती सीएचसी-पीएचसी से संबद्ध हो गए हैं। जबकि 15 होम्योपैथिक अस्पताल विभागीय भवन में हैं, जबकि अन्य खाली पड़े सरकारी भवन, विद्यालय, गोदाम या फिर पंचायत भवन में संचालित किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
विभाग के मुताबिक चिकित्सकीय व्यवस्था सुचारु रूप से बनाए रखने के लिए बनकटा, रामघाट कोइलसवा, कसया, फाजिलनगर, मल्लूडीह, पड़री बाजार, सुकरौली, पैकौली, टेकुआटार, खड्डा, पिपरा बाजार, रामपुर गोनहा के डॉक्टर एक-एक दिन अन्य रिक्त अस्पतालों में अटैच किए गए हैं। उपलब्ध डॉक्टरों को ही रिक्त अस्पतालों में भेजकर वहां भी मरीजों का इलाज कराया जाता है।
विज्ञापन
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बांटी जा रही दवा
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी ने बताया कि कोरोना महामारी से बचाव का सर्वोत्तम तरीका इससे बचाव करना है। ऐसे में लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विभाग की तरफ से आर्सेनिक अलबम-30 नाम की दवा वितरित कराई जा रही है। अब तक इस दवा की छह हजार से अधिक शीशियां वितरित की जा चुकी हैं। यह सभी होम्योपैथिक अस्पताल पर उपलब्ध हैं।
सितंबर में 16 नए डॉक्टर मिलने की उम्मीद
जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. अशोक कुमार गौड़ ने बताया कि जिले में 45 के सापेक्ष सिर्फ 14 डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। लिहाजा इन डॉक्टरों को रिक्त अस्पतालों में भी सप्ताह में एक-एक दिन के लिए संबद्ध किया गया है ताकि उन क्षेत्रों के लोगों को भी होम्योपैथिक चिकित्सा का लाभ मिल सके। सभी अस्पतालों में दवाइयां उपलब्ध हैं। संघ लोक सेवा आयोग से होम्योपैथिक चिकित्सकों की नियुक्ति हो गई है। निदेशालय में वार्ता हुई है। अगले महीने 16 नए डॉक्टर इस जिले को मिल जाएंगे।