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गणित और विज्ञान के शिक्षक ही नहीं, बच्चे कैसे बनेंगे डॉक्टर-इंजीनियर,

Sat, 01 Oct 2022 11:30 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Oct 2022 11:30 PM IST
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Not only teachers of maths and science, how will students become doctors-engineers
डीआईओएस कार्यालय कुशीनगर। - फोटो : KUSHINAGAR
गणित व विज्ञान के शिक्षक ही नहीं, विद्यार्थी कैसे बनेंगे डॉक्टर-इंजीनियर
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जिले में संचालित है 13 राजकीय उच्चतर माध्यमिक और सात इंटर कॉलेज
विद्यालयों में स्वीकृत 221 शिक्षक के पदों के सापेक्ष 81 की तैनाती, 140 पद रिक्त
पडरौना। जिले में संचालित राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों शिक्षकों कमी है। हालत ये है कि भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी और हिंदी समेत अन्य प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं है। इससे डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना देखकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी परेशान हैं।
कुशीनगर में 13 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और सात राजकीय इंटर कॉलेज हैं। इसमें करीब 15 हजार छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों के 130 पद हैं। इसमें से 106 शिक्षकों के पद खाली है। 24 पदों पर ही शिक्षकों की तैनाती है।
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13 राजकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 91 पद स्वीकृत हैं। इसमें से 34 पद रिक्त हैं। जबकि 57 पद शिक्षकों की तैनाती है। इनमें राजकीय कन्य इंटर कॉलेज सेवरही, राजकीय इंटर कॉलेज मनिकौरा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज मिश्रौली खड्डा की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां स्वीकृत 17 पदों में महज एक या दो शिक्षक ही तैनात हैं।
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शिक्षकों की कमी से विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
छात्र-छात्राओं को डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनाने के उद्देश्य से अभिभावकों ने बच्चों का नामांकन कराया था, लेकिन विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से गुणवत्ता पूर्ण पढ़ाई नहीं हो रही है। इन विद्यालयों में भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, नागरिक शास्त्र, शिक्षा शास्त्र, इतिहास, संस्कृत, गणित, सामाजिक विज्ञान, गृहविज्ञान समेत अन्य प्रमुख विषयों शिक्षकों की कमी है।

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कोट
राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती शासन स्तर से होती है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की तरफ से नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं है।
रविंद्र सिंह, डीआईओएस
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