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Kushinagar News: मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन नहीं... निजी केंद्रों पर कट रही जेब
Sat, 14 Feb 2026 01:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 14 Feb 2026 01:28 AM IST
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन की सुविधा न होने से मरीजों की जेब ढीली हो रही है। ऐसे में लोगों को निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। एमआरआई जांच के लिए मरीजों को 1500-6000 की जगह पांच से 15 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन लगभग 1500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या न्यूरो से जुड़ी बीमारियों से संबंधित मरीजों की होती है। चिकित्सकों के अनुसार कई मामलों में एक्सरे और सीटी स्कैन से स्पष्ट रिपोर्ट नहीं मिल पाती, ऐसे में एमआरआई जांच जरूरी हो जाती है। प्रतिदिन करीब 20 से 25 मरीजों को एमआरआई जांच लिखी जा रही है, लेकिन मशीन उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को बाहर जांच के लिए निजी लैबों का सहारा लेना पड़ रहा है।
करीब सात माह पूर्व मेडिकल कॉलेज में न्यूरो विभाग की शुरुआत हुई है। इसके बाद सिर दर्द, चक्कर, लकवा, नसों की समस्या और सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों में एमआरआई जांच की आवश्यकता बढ़ गई है। चिकित्सकों का कहना है कि गंभीर बीमारियों की सही पहचान के लिए एमआरआई अत्यंत जरूरी है, लेकिन सुविधा न होने से समय पर जांच प्रभावित हो रही है। निजी केंद्रों पर जांच कराने में मरीजों को अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ समय भी गंवाना पड़ रहा है। कई मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने के बावजूद जांच बाहर करानी पड़ना मजबूरी बन गई है।
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मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच की सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। मशीन की खरीद के लिए पत्राचार किया गया है। जल्द ही मशीन क्रय कर इसकी स्थापना की जाएगी। एमआरआई सुविधा शुरू होने पर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी और गंभीर बीमारियों की सटीक व समय पर जांच संभव हो सकेगी।
- प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य
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मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन लगभग 1500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या न्यूरो से जुड़ी बीमारियों से संबंधित मरीजों की होती है। चिकित्सकों के अनुसार कई मामलों में एक्सरे और सीटी स्कैन से स्पष्ट रिपोर्ट नहीं मिल पाती, ऐसे में एमआरआई जांच जरूरी हो जाती है। प्रतिदिन करीब 20 से 25 मरीजों को एमआरआई जांच लिखी जा रही है, लेकिन मशीन उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को बाहर जांच के लिए निजी लैबों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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करीब सात माह पूर्व मेडिकल कॉलेज में न्यूरो विभाग की शुरुआत हुई है। इसके बाद सिर दर्द, चक्कर, लकवा, नसों की समस्या और सड़क दुर्घटना से जुड़े मामलों में एमआरआई जांच की आवश्यकता बढ़ गई है। चिकित्सकों का कहना है कि गंभीर बीमारियों की सही पहचान के लिए एमआरआई अत्यंत जरूरी है, लेकिन सुविधा न होने से समय पर जांच प्रभावित हो रही है। निजी केंद्रों पर जांच कराने में मरीजों को अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ समय भी गंवाना पड़ रहा है। कई मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने के बावजूद जांच बाहर करानी पड़ना मजबूरी बन गई है।
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मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच की सुविधा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। मशीन की खरीद के लिए पत्राचार किया गया है। जल्द ही मशीन क्रय कर इसकी स्थापना की जाएगी। एमआरआई सुविधा शुरू होने पर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी और गंभीर बीमारियों की सटीक व समय पर जांच संभव हो सकेगी।
- प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य