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Kushinagar News: सफाई से वास्ता नहीं...शुद्धता के नाम पर पानी का धंधा लाखों में

Fri, 20 Jun 2025 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Fri, 20 Jun 2025 11:58 PM IST
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No concern with cleanliness... Water business in the name of purity worth lakhs
पडरौना। साफ पानी के चलन की बढ़ती मांग ने ‘शुद्धता’ के धंधे को करोड़ों में पहुंचा दिया है। आलम यह है कि दर्जनों वाॅटर प्लांट बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। शहर में शुक्रवार को टेंपो पर बड़ी टंकी लादकर पानी घर-घर सप्लाई के लिए भेजा जा रहा था।
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हालत यह थी कि टेंपो पर लदे कई जार काफी गंदे थे। कई जारों को देखने से ऐसा लग रहा था कि इनकी सफाई कई दिनों से नहीं हुई है। ऐसे में जार वाले पानी की शुद्धता पर सवाल उठना लाजिमी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक जार वाला पानी पीना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
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दरअसल, सहालग के दिनों में तो जार के आरओ की पानी की मांग बढ़ गई है। स्वच्छ पानी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे। दूषित पानी पीने से बचने के लिए लोग वाॅटर प्लांट का पानी के पानी का सहारा ले रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार शहर में 50 से अधिक आरओ प्लांट संचालित होते हैं।
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एक आरओ प्लांट से हर दिन एक हजार से अधिक लीटर पानी की बिक्री होती है। ऐसे में महज एक दिन औसतन 50 हजार लीटर से ज्यादा पानी सिर्फ प्लांटों के जरिए ही नगर में लोग गटक जा रहे हैं। मगर, ध्यान देने वाली बात यह है कि शहर में जिन वाॅटर प्लांटों से पानी की सप्लाई होती है, उनमें मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विभागीय अंकुश न लगने से धड़ल्ले से पानी की बिक्री की जा रही है।
जार वाले पानी का में स्वच्छता का ख्याल भी नहीं रखा जाता है। आरओ प्लांट की जांच भी नहीं होती है। जानकारी के अनुसार शहर में धड़ल्ले से खुले कई आरओ प्लांट मालिकों के पास कोई लाइसेंस नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार पानी पैक होने के बाद ही प्लांट विभाग के अधीन आएगा।
यदि खुला पानी जार में बिक रहा है, तो विभाग के अधीन नहीं आएगा। बताया जाता है कि इस नियम के कारण लाइसेंस सिर्फ पैकिंग वाले प्लांट के पास है। वहीं नियम-कानून के पेच में कोई छोटे प्लांटों पर हाथ डालना नहीं चाहता है।
संदेह होने पर कराएं जांच ः अगर आप 20 लीटर के जार में मिनरल वाॅटर लेते हैं और यह समझ रहे हैं कि आपका पानी शुद्ध है और इससे कोई नुकसान नहीं होगा तो ऐसी स्थिति में आपको सावधान होने की जरूरत है। संभव है कि यह पानी दूषित हो।
स्वाद में फर्क या संदेह होने पर पानी की गुणवत्ता की जांच अवश्य कराएं। ऐसा न करने से न सिर्फ आप बीमारियों का शिकार बनेंगे, बल्कि परिवार के सदस्यों को भी खतरे में डालेंगे।
धंधे के प्रति उदासीन है नगर पालिकाः शहर में वर्षों से अवैध रूप से दर्जनों वाटर प्लांट चल रहे हैं। इसकी बखूबी जानकारी नगर पालिका को भी है। बावजूद इयके जिम्मेदार खामोश हैं।
जिस प्लांट का पानी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं, उसकी गुणवत्ता क्या है? उसमें नमक, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, नाइट्रेट, सल्फेट और कुल घुलित ठोस पदार्थ नियमित मात्रा में है या नहीं, इसकी कभी जांच नहीं कराई गई है।

लाइसेंस के लिए नगर पालिका की ओर से किसी भी संचालक पर शिकंजा नहीं कसा गया है, जिसके चलते धड़ल्ले से वाटर प्लांट चल रहे हैं और लगातार इनकी संख्या बढ़ रही है।
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