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बार-बार घटनाओं के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई

Fri, 02 Apr 2021 06:19 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 02 Apr 2021 06:19 PM IST
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NO any letion to health services but patiant has died
स्वास्थ्य महकमा नहीं ले रहा सबक, बार-बार जा रही जान
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पडरौना (कुशीनगर)। विभिन्न जगहों के डॉक्टर के नाम का बोर्ड लगाकर जिले भर में चलने वाले अवैध निजी अस्पताल मरीजों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। हर महीने-दो महीने बाद किसी न किसी क्षेत्र में ऐसे अवैध अस्पतालों में इलाज के चलते किसी मरीज की जान चली जाती है। हल्ला-हंगामा होता है, अफसर बयान देते हैं लेकिन बाद में कुछ नहीं होता। फिर कुछ दिन बाद किसी न किसी मरीज की जान चली जाती है।
जिले में नौ सीएचसी, पांच पीएचसी व 53 न्यू पीएचसी हैं। लेकिन इनमें डॉक्टरों की कमी व अन्य सुविधाओं के अभाव के चलते मरीज प्राइवेट अस्पतालों में जाने केे मजबूर हैं। इसका फायदा उठाते हुए जिले भर में तमाम अवैध अस्पताल संचालित होने लगे हैं। कई वर्षों से चल रहे इस धंधे पर कोई सरकार रोक नहीं लगा पा रही है। गत बुधवार को भी सेवरही कस्बे में एक प्रसव पीड़िता की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। घरवालों की तहरीर पर केस तो दर्ज हो गया लेकिन स्वास्थ्य महकमा या प्रशासन ने अब तक यह जानने का प्रयास भी नहीं किया कि जिस अस्पताल में यह घटना हुई वह वैध था अथवा अवैध।
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इससे पहले दुदही में हुई एक महिला की मौत के मामले में यह बात सामने आई थी कि उस अस्पताल को अवैध मानते हुए सील किया गया था लेकिन उसी में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। उस प्रकरण में भी अफसरों ने चुप्पी साध ली। पूर्व में और भी कई घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन प्रशासन इन अवैध अस्पतालों पर रोक लगाने में रुचि नहीं दिखा रहा है।
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केस- एक
गत चार मार्च को विशुनपुर बरिया पट्टी गांव की कुसुम देवी के पेट मे दर्द हुआ तो दुदही बाजार में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सक ने गंभीर बीमारी बताकर बच्चेदानी का ऑपरेशन कर दिया। इस दौरान महिला की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल कर्मी भाग निकले। बाद में आरोपियों पर मुकदमा दर्ज हुआ।
केस-दो
जुलाई 2016 में बतरौली धुरखड़वा निवासी राजेंद्र गुप्ता की झोला छाप के गलत इलाज के चलते मौत हो गई। तोड़फोड़ व हंगामा के बाद अफसर पहुंचे और अस्पताल सील करते हुए दो लोगों पर गैर इरादतन की मुकदमा दर्ज किया गया। लेकिन बाद में अस्पताल खोल दिया गया।
केस- तीन
वर्ष 2017 में 15 मार्च को गौरीश्रीराम के टोला माधोपुर निवासी जयराम कुशवाहा की 20 वर्षीय पत्नी गुड़िया को प्रसव के लिए दुदही के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां जच्चा- बच्चा दोनों की मौत हो गई। जांच में अस्पताल अवैध पाया गया। आरोपितों पर केस भी दर्ज हुआ लेकिन उसके कुछ दिन बाद फिर अस्पताल खुल गया।
केस -चार
वर्ष 2012 में 25 अक्तूबर को पडरौना मड़ुरही जिरात निवासी गुड्डू की पत्नी बबिता को प्रसव पीड़ा होने पर एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां ऑपरेशन में जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। लोगों ने हंगामा किया तो अफसर मौके पर पहुंचे। जांच में यह अस्पताल भी अपंजीकृत मिला।

ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जन जागरूकता जरूरी है। लोगों से बार-बार अपील की जा रही है कि सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रसव कराने की बेहतर व्यवस्था मौजूद है। ऐसे में लोग अपंजीकृत अस्पतालों में जाने की बजाय नजदीक के सरकारी अस्पतालों में जाएं। जिन अवैध अस्पतालों में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, वहां के चिकित्सकों व अन्य संचालकों के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई हो रही है। समय-समय पर अभियान चलाकर भी ऐसे अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई होती रहती है।
-डॉ. एनपी गुप्ता, सीएमओ
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