बरवापट्टी/गौरीश्रीराम। सूर्यषष्ठी के अवसर पर हिंदू के साथ-साथ काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने भी छठ व्रत करने के साथ छठघाटों पर जाकर विधिवत पूजा-अर्चना की। इन महिलाओं ने भी निर्जला व्रत किया। इनमें कई महिलाओं ने कोसी भरने की रस्म भी पूरा की। बरवापट्टी निवासी नईमुल नेशा 45 वर्ष बताती हैं कि उनके निकाह के सात साल बीत गए और कोई संतान नहीं हुई तो गांव की कुछ बुजुर्ग महिलाओं के कहने पर छठव्रत किया। दो वर्ष विधिवत छठपूजा करने के बाद छठ माता की कृपा से उनकी सूनी गोद भर गई। तभी से वह छठव्रत पूरी आस्था से करती हैं। हीरासोती गांव की निवासी नूरजानती 32 वर्ष बताती हैं कि उनके पूर्वज इस पर्व को मानते थे और उनके परिवार में पीढ़ियों से यह त्योहार मनाया जाता है। इसी गांव की 50 वर्षीया रसीदनी बताती हैं कि उनकी सास को पुत्र नहीं होता था तो उन्हाेंने यह व्रत शुरू किया था। उनके पांच पुत्र हुए। परिवार खुशियों से भर गया था। ससुराल आने पर उन्हें भी यह बात मालूम हुई तो परंपरा को कायम रखते हुए छठ व्रत शुरू किया। अफ साना 32 वर्ष गौरीश्रीराम झरही टोला की निवासी हैं। उनका कहना था कि यह त्योहार गांव में कौमी एकता का प्रतीक है। गांव के सभी लोग इसे मिल जुलकर मनाते हैं। इनके अलावा गौरीश्रीराम, माधोपुर, दशहवा, पुष्पकनगर, पडरौन मडुरही, बांसगांव, धोबीघटवा, हीरासोती गांव की सकीना 30 वर्ष, जायदा 25 वर्ष, गुलाबी 60 वर्ष, शाहबुन्न नेशा 30 वर्ष, किसमती, रोशनी 40 वर्ष, तैयबा खातून, मैतुन निशा 28 वर्ष, हसीना खातून, रब्या, जरीना आदि महिलाएं भी पूरी आस्था से छठव्रत करती हैं।