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Kushinagar News: कागजों में ''मृत'' मुन्नर... पेंशन के लिए 28 माह से लगा रहा चक्कर
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जीवित होने के बावजूद वृद्धावस्था पेंशन से वंचित बुजुर्ग, अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहा बुजुर्ग
अहिरौली बाजार। सरकारी अभिलेखों में जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाने का मामला सामने आया है। कप्तानगंज विकासखंड के खुरहुरिया गांव निवासी एक बुजुर्ग का आरोप है कि उन्हें कागजों में मृत दिखाकर वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी गई। पिछले 28 महीने से पेंशन के लिए वह अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने शनिवार को अहिरौली बाजार थाने में शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।
खुरहुरिया गांव निवासी मुन्नर प्रसाद ने बताया कि वे अनुसूचित जाति से हैं। पहले उन्हें नियमित रूप से वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी। उनका आरोप है कि गांव की राजनीति के चलते विभागीय जांच में उन्हें मृत दर्शा दिया गया। इसके बाद उनकी पेंशन बंद हो गई। इस गड़बड़ी को ठीक कराने के लिए उन्होंने डीएम, एसडीएम, बीडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारी से कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद न तो अभिलेखों में उन्हें जीवित दर्ज किया गया और न ही पेंशन बहाल हुई।
उनका आरोप है कि हर बार आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है। उन्होंने कि पेंशन बंद होने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होने से वह परेशान हैं। उन्होंने उच्चाधिकारियों से अभिलेखों में सुधार कराने, खुद को जीवित दर्ज कराने और वृद्धावस्था पेंशन बहाल करने की मांग की है। इस संबंध में कप्तानगंज बीडीओ अमरनाथ पांडेय ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। सोमवार को जांच करवाते हैं। यदि ऐसा हुआ है तो सुधार करवा दिया जाएगा।
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अहिरौली बाजार। सरकारी अभिलेखों में जीवित व्यक्ति को मृत दर्शाने का मामला सामने आया है। कप्तानगंज विकासखंड के खुरहुरिया गांव निवासी एक बुजुर्ग का आरोप है कि उन्हें कागजों में मृत दिखाकर वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी गई। पिछले 28 महीने से पेंशन के लिए वह अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने शनिवार को अहिरौली बाजार थाने में शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की।
खुरहुरिया गांव निवासी मुन्नर प्रसाद ने बताया कि वे अनुसूचित जाति से हैं। पहले उन्हें नियमित रूप से वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी। उनका आरोप है कि गांव की राजनीति के चलते विभागीय जांच में उन्हें मृत दर्शा दिया गया। इसके बाद उनकी पेंशन बंद हो गई। इस गड़बड़ी को ठीक कराने के लिए उन्होंने डीएम, एसडीएम, बीडीओ और ग्राम पंचायत अधिकारी से कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद न तो अभिलेखों में उन्हें जीवित दर्ज किया गया और न ही पेंशन बहाल हुई।
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उनका आरोप है कि हर बार आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है। उन्होंने कि पेंशन बंद होने से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होने से वह परेशान हैं। उन्होंने उच्चाधिकारियों से अभिलेखों में सुधार कराने, खुद को जीवित दर्ज कराने और वृद्धावस्था पेंशन बहाल करने की मांग की है। इस संबंध में कप्तानगंज बीडीओ अमरनाथ पांडेय ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। सोमवार को जांच करवाते हैं। यदि ऐसा हुआ है तो सुधार करवा दिया जाएगा।
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