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Kushinagar News: अहिरौलीदान-बाघाचौर में नारायणी नदी की कटान जारी, मुश्किल में ग्रामीण

Sun, 11 Oct 2026 02:29 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 02:29 AM IST
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Narayani river erosion continues in Ahiraulidan-Baghachaur, villagers in trouble
तरया सुजान। नारायणी (गंडक) नदी एपी तटबंध के किनारे बसे लोगों के लिए खतरा बनती जा रही है। एक सप्ताह से अधिक समय से नदी लगातार कटान कर रही है। नदी हर दिन 2 से 4 फीट जमीन कट रही है। कटान के कारण तटबंध किनारे रहने वाले लोग सहमे हुए हैं।
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तटबंध के किनारे रहने वाले बुजुर्गों ने बताया कि जब एपी तटबंध बना हुआ था, तब गंडक नदी की मुख्य धारा बिहार की तरफ करीब दो किलोमीटर दूर बहती थी। लेकिन पिछले कई सालों में नदी में ज्यादा सिल्ट (गाद) जमा होने के कारण नदी उथली हो गई। ऐसे में अब नदी का रुख बदल कर सीधे एपी तटबंध के समीप हो गया है।
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नारायणी नदी की तेज धारा तटबंध के बिल्कुल किनारे से टकरा रही है और लगातार कटान जारी है। बचाव के लिए बाढ़ खंड की ओर से जेसीबी और पोकलेन मशीन से बड़े-बड़े बोल्डर डालकर बंधे को बचाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन नदी का दबाव इतना ज्यादा है कि हर दिन 2 से 4 फीट जमीन कट रही है।
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बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण अरविंद सिंह, ओमप्रकाश सिंह, रामपूजन प्रसाद, लल्लन यादव, जितेंद्र गुप्ता, राकेश सिंह, इंदल सिंह, अमन कुमार, सुकई प्रसाद, ओशियर, नंदलाल, शिवपूजन साह आदि ने सिंचाई विभाग और शासन से गंडक नदी में सिल्ट की सफाई कराए जाने व तटबंध को और मजबूत करने की मांग की है। तटबंध पर ठोस और स्थायी बोल्डर पिचिंग कराई जाए, ताकि 50 घरों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लोगों की जान-माल की सुरक्षा हो सके।

बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने बताया कि नदी में सिल्ट ज्यादा होने से तल उथला हो गया है, इसलिए पानी का पूरा दबाव एपी तटबंध पर आ रहा है। यही कारण है कि हर साल बरसात में एपी बंधा पर खतरा मंडरा रहा है। इसकी वजह से ही तटबंध टूट गया था। उनका कहना है कि नदी की ड्रेजिंग और सिल्ट सफाई का काम करा दिया जाए तो तटबंध पर खतरा कम हो सकता है। ऐसा नहीं होने पर जलस्तर बढ़ने पर फिर से तटबंध टूट सकता और दर्जनों गांव प्रभावित होते रहेंगे।
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