फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   Most of the sugar mill has become illegal possession of land

चीनी मिल की अधिकांश जमीनों पर हो गया है अवैध कब्जा

Sun, 11 Feb 2018 11:57 PM IST
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
कुश्ाीनगर (ब्यूरो) Updated Sun, 11 Feb 2018 11:57 PM IST
विज्ञापन
Most of the sugar mill has become illegal possession of land
नाप-जोख। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
पडरौना। नीलामी की प्रक्रिया से गुजर रही पडरौना चीनी मिल की जमीनों का मामला उलझता ही जा रहा है। अफसरों को इस मामले में हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जानकारी देनी है। परंतु कई दिन से चल रही पैमाइश की प्रक्रिया के बाद भी मामला सुलझ नहीं रहा है। चर्चा है कि मिल जब नीलाम हुई थी उस वक्त इसकी जमीन 163 एकड़ थी जो अब मात्र 36 एकड़ ही बची है। बाकी की जमीनें कहां हैं, इसकी खोज हो रही है। रविवार को अवकाश के बाद भी राजस्वकर्मी इसकी तलाश में लगे हुए थे। खुद एडीएम न्यायिक व एसडीएम कप्तानगंज त्रिभुवन भी दिन भर इसी कार्य में लगे रहे।
विज्ञापन


पडरौना की चीनी मिल को वर्ष 1934 में पडरौना राज दरबार ने बनवाया था। वर्ष 1956 में इस मिल को कानपुर शुगर वर्क्स ने नीलामी के जरिए खरीद लिया। इस मिल का अधिकांश हिस्सा पडरौना तहसील के राजस्व गांव जंगल व ओशुनपुरा में पड़ता है। राजस्वकर्मियों के अनुसार उस वक्त मिल के पास 163 एकड़ जमीन थी।
विज्ञापन

सत1तर के दशक में जब चकबंदी हुई तो मिल की करीब 125 एकड़ जमीन सीलिंग में चली गई। वर्तमान में जिस जगह पर मिल स्थापित है उसके परिसर का कुछ हिस्सा आबादी के तौर पर भी दर्ज है। सीलिंग व आबादी की जमीनों पर बाद में लोग कब्जा करते चले गए। कुछ लोगों ने कब्जे के आधार पर उन जमीनों पर अपना नाम चढ़वा लिया। काफी पुराने इस प्रकरण को लोग एक तरह से भूल ही चुके थे। परंतु दिसम्बर महीने में इस मिल की नीलामी के बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो सारे कागजातों की छानबीन शुरू हुई। बीते पांच फरवरी को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन से मिल की कुल संपत्तियों का लेखा-जोखा मांगा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


 प्रशासन के पास केवल आठ हेक्टेयर जमीन का ही हिसाब-किताब मौजूद था। इस पर कोर्ट ने जिला प्रशासन से मिल की सभी संपत्तियों का ब्यौरा तलब किया। इसके बाद लौटे अफसरों ने राजस्व व चकबंदी लेखपालों को लगाकर मिल की सभी जमीनों की तलाश शुरू कराई। तीन दिन से यह कार्य चल रहा है। रविवार को एडीएम न्यायिक साहबलाल और कप्तानगंज के एसडीएम त्रिभुवन भी पहुंचे और जंगल विशुनपुरा गांव में सीलिंग व अन्य जमीनों की पैमाइश कराई।

चीनी मिल की जमीनों के इस मामले को पडरौना की एक सामाजिक संस्था सिविल सोसाइटी सार्वजनिक करने की मांग कर चुकी है। इस समिति के अध्यक्ष गिरीश चंद्र चतुर्वेदी ने वरिष्ठ अफसरों को पत्र भेजकर कहा है कि वर्ष 1956 में पडरौना चीनी मिल की नीलामी लेने वाले कानपुर शुगर वर्क्स के पास सारे अभिलेख मौजूद होंगे। अथवा उस वक्त के राजस्व अभिलेखों में भी इसका जिक्र होगा ही। उनके आधार पर मिल की कुल संपत्तियों को खोजा जाना चाहिए।


चीनी मिल के जमीनों के इस प्रकरण की जांच में लगे कप्तानगंज के एसडीएम त्रिभुवन ने बताया कि चीनी मिल के नाम से जितनी जमीन थी, उसकी पैमाइश का कार्य पूर्ण हो चुका है। अन्य जमीन सीलिंग व आबादी की है। उसमें से कुछ जमीनों पर निर्माण हो चुका है तो कुछ पर लोगों ने अपना नाम चढ़ा लिया है जिसमें लोग कृषि कार्य आदि कर रहे हैं। इन सबका रिकार्ड तैयार कराया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed