फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   More than 50 animals died due to strangulation, 100 sick

बाढ़ के कारण उपजे हैं ऐसे हाल, पशुपालकों की परेशानी बढ़ी

Wed, 08 Sep 2021 11:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 11:06 PM IST
विज्ञापन
More than 50 animals died due to strangulation, 100 sick
गलाघोंटू से 50 से अधिक पशुओं की मौत, 100 बीमार
विज्ञापन

खड्डा क्षेत्र के कई गांवों में पशुओं में फैली गलाघोंटू बीमारी
ग्रामीणों का आरोप, पशुपालन विभाग की नहीं मिल रही मदद
क्षेत्र के पशुपालकों के सामने चारे का भी है संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर/छितौनी। खड्डा क्षेत्र में गंडक का पानी हटने से बाढ़ पीड़ितों को राहत मिली है। लेकिन अब मवेशियों की जान पर आफत आ गई है। गलाघोंटू नाम की बीमारी से नौतार जंगल और बोधीछपरा सहित अन्य गांवों में 50 से अधिक पशुओं की मौत हो गई है, जबकि लगभग 100 बीमार बताए जा रहे हैं। पशुओं में इस रोग के साथ उनके चारे को लेकर पशुपालक परेशान हैं। क्योंकि चारा बाढ़ के पानी में नष्ट हो चुका है। फिर भी पशुपालन विभाग की कोई टीम पशुपालकों का हाल जानने नहीं पहुंची। बीते दिनों गंडक नदी के पानी ने खड्डा क्षेत्र के गांवों में काफी तबाही मचाई थी, जिससे लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था। नदी में डिस्चार्ज कम होने के बाद गांवों से पानी निकल गया है और लोगों का जनजीवन पटरी पर आ रहा है। फिर भी खेतों में अभी भी पानी भरा है, जिससे काफी हद तक चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। इसके अलावा पशु गलाघोंटू बीमारी की चपेट में आ गए है। पशुपालकों के मुताबिक खड्डा ब्लॉक के बोधीछापर गांव में बुखार व गलाघोंटू से एक सप्ताह में 50 से अधिक भैंसों की मौत हो गई है तो वहीं 100 से अधिक बीमार हैं। पशुपालन विभाग से सहयोग नहीं मिलने से पशुपालक निजी पशु चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं। बोधीछापर के पशुपालक सुरेश यादव ने बताया कि उसके पास 40 भैंस थीं, लेकिन एक सप्ताह के भीतर 15 की मौत हो चुकी है और छह बीमार हैं। निजी पशु चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं। हालांकि उससे बहुत फायदा नहीं हो रहा है। बीमार भैंसों की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। पशुपालक दशरथ यादव ने बताया कि बीते रविवार व सोमवार को उनकी छह भैंस बीमार पड़ीं। जानवरों को बुखार हुआ और चारा खाना छोड़ दीं। एक-एक कर छह ने दम तोड़ दिया। सुरेंद्र यादव ने बताया कि बीते शनिवार को उनकी दो भैंसों में गलाघोंटू और बुखार का लक्षण दिखा। डॉक्टरों से इलाज करा रहे थे कि एक-एक कर अन्य जानवर भी चपेट में आ गए। 15 भैंसें मर गईं है, अभी भी पांच बीमार हैं। सुग्रीव यादव ने बताया कि उनके पास 30 भैंस हैं। उनमें से चार शुक्रवार को तो दो की रविवार को मौत हो गई। वहीं छह भैंस अभी भी बीमार हैं। उनका इलाज करा रहे हैं। अभी तक उनके पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ है। इस बाबत प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. उज्जवल खरवार का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। ऐसा है तो इलाज के लिए तत्काल टीम भेजी जाएगी।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की टीमों को लगातार नजर रखने के लिए बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात किया गया है। ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाले संक्रामक व अन्य रोगों से इंसान और पशुओं को बचाया जा सके। जिले स्तर के उच्चाधिकारियों की टीम को निर्देश दिया जाएगा कि वह बाढ़ प्रभावित गांवों में जाकर निरीक्षण करें और बीमार पशुओं का उपचार कराएं।
विज्ञापन

- ेेएस. राजलिंगम, डीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed