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प्रेम और आदर के अभाव से टूट रहे परिवार -

Sat, 30 Jan 2021 12:26 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jan 2021 12:26 AM IST
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morari bapu,kushi nagar news
पति आदर और पत्नी प्रेम चाहती है, नहीं मिलने पर होता है विवाद
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आदित्य शाही/मनीष यादव
कसया। तथागत की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में चल रही रामकथा के सातवें दिन कथा व्यास मोरारी बापू ने आदर्श गृहस्थ जीवन के उपाय भी बताए। शिव-पार्वती विवाह और भगवान राम के प्राकट्य की कथा सुनाते हुए मोरारी बापू ने कहा कि हर भारतीय नारी अपने पति से अत्यधिक प्रेम चाहती है। वहीं पुरुष भी पत्नी से आदर की इच्छा रखता है। प्रेम व आदर में कमी के चलते ही पति-पत्नी के रिश्तों में खटास आ रही है। शंका भी परिवारों की एकजुटता के लिए बड़ा खतरा है।
शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाते हुए मोरारी बापू ने कहा कि जब देवी पार्वती की माता मैना ने दूल्हा बने शिव के विकराल स्वरूप को देखा तो उन्होंने विवाह से इंकार कर दिया। हर मां केवल यही चाहती है कि उसकी बेटी का वर अत्यंत सुंदर हो। जब विवाह के उपरांत देवी पार्वती विदा होकर भगवान शिव के साथ कैलाश के लिए चलीं तो अति गंभीर हिमांचल राज (पार्वती के पिता) की आंखों से भी आंसू आ गए। एक पिता अपने इकलौते बेटे की मृत्यु जैसा बड़ा संताप तो सह लेता है लेकिन बेटी की विदाई पर आंसू आ ही जाते हैं।
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पति-पत्नी के आदर्श रिश्ते की चर्चा करते हुए कहा कि जब भगवान शंकर कल्पवृक्ष के नीचे सामान्य आसन में बैठे थे, तब इसे उचित अवसर मानकर माता पार्वती वहीं पहुंचीं। आदर पूर्वक उनसे रामकथा सुनाने का आग्रह किया। पत्नी के आदर भाव से मुदित भगवान शिव ने उन्हें रामकथा सुनाई थी। प्रत्येक पुरुष का यह कर्तव्य है कि वह अपनी पत्नी को अत्यधिक प्रेम दे। पत्नी प्रेम की तलाश में ही अपने पिता का घर छोड़कर नए घर में आती है। वहीं पत्नी का भी धर्म है कि पति को ही ईश्वर मानकर उसका आदर करे। शिव बरात की भी बापू ने विशेष व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान शिव ने लोक मंगल के लिए विवाह की बात स्वीकार की थी, ऐसे में नौजवानों को भी गृहस्थ जीवन के प्रति आदर रखना चाहिए। बरात में दूल्हा बने शिव ने अपनी बांह और कान में सर्प की माला पहनकर यह संदेश दिया कि जीवन में आनंद रहे लेकिन आभूषण के प्रति अतिमोह भुजंग (सर्प) बन जाएगा। भगवान शिव बरात में बैल पर उल्टा बैठकर गए थे। बैल धर्म का प्रतीक है। शिव ने गृहस्थों को संदेश दिया कि गृहस्थ जीवन में धर्म विमुख न हों। भगवान राम ने भी अपनी लीलाओं में माता सीता को हर जगह यथोचित स्थान दिया।
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(संवाद)
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