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Kushinagar News: मानसून सिर पर, बाढ़ से बचाव की तैयारी कागजों में- कई गांव आते हैं बाढ़ की चपेट में
Sun, 07 Jun 2026 01:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 07 Jun 2026 01:52 AM IST
सार
जिला प्रशासन के मुताबिक, इस बार बाढ़ से निपटने के लिए जिले में 16 बाढ़ शरणस्थली चिह्नित कर तैयार की गई हैं। नदियों के कटान और जलस्तर पर नजर रखने के लिए 11 बाढ़ चौकियां भी बनाई गई हैं। इन चौकियों पर तैनात कर्मी 24 घंटे निगरानी करेंगे और स्थिति की रिपोर्ट भेजेंगे।
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खडडा क्षेत्र में मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के गुलहरिया रेगुलेटर का टूटा फाटक
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मानसून सिर पर होने के बावजूद बचाव व राहत के लिए किए गए इंतजाम नाकाफी साबित होंगे। लेकिन प्रशासन का दावा है कि बाढ़ की विभीषिका से बचने के लिए मुकम्मल इंतजाम कर लिए गए हैं। तैयारियां सिर्फ कागजों में पूरी कर ली गई हैं, धरातल पर वह कहीं दिखाई नहीं दे रही हैं।
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बाढ़ आने पर लोगों को सुरक्षित स्थलों तक पहुंचाने के लिए 16 बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी के लिए 11 बाढ़ पुलिस चौकियां भी बना दी गईं। लेकिन, मौके पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। खड्डा और तमकुहीराज तहसील के बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए राहत सामग्री का टेंडर अब तक नहीं हो सका है।
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न लंच पैकेट की व्यवस्था पक्की है, न मवेशियों के चारे की। ऐसे में बाढ़ आई, तो आम लोग फिर से प्रशासनिक लापरवाही की मार झेलने को मजबूर होंगे। जिले में मानसून आने का समय 15 जून को माना जाता है, लेकिन बाढ़ से बचाव के नाम पर तैयारियां सिर्फ कागजों में दिख रही हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक, इस बार बाढ़ से निपटने के लिए जिले में 16 बाढ़ शरणस्थली चिह्नित कर तैयार की गई हैं। नदियों के कटान और जलस्तर पर नजर रखने के लिए 11 बाढ़ चौकियां भी बनाई गई हैं। इन चौकियों पर तैनात कर्मी 24 घंटे निगरानी करेंगे और स्थिति की रिपोर्ट भेजेंगे।
जिला प्रशासन के मुताबिक, इस बार बाढ़ से निपटने के लिए जिले में 16 बाढ़ शरणस्थली चिह्नित कर तैयार की गई हैं। नदियों के कटान और जलस्तर पर नजर रखने के लिए 11 बाढ़ चौकियां भी बनाई गई हैं। इन चौकियों पर तैनात कर्मी 24 घंटे निगरानी करेंगे और स्थिति की रिपोर्ट भेजेंगे।
हर साल खड्डा और तमकुहीराज तहसील के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। गंडक, बांसी और अन्य नदियों के उफान से इन इलाकों के खेत, घर और सड़कें डूब जाती हैं। इस बार भी इन तहसीलों के गांवों को अति संवेदनशील माना गया है।
प्रशासन ने दावा किया है कि शरणस्थलियों में पेयजल, शौचालय और मेडिकल किट की व्यवस्था की गई है। वहीं बाढ़ चौकियाें और शरणालय में पशुपालन विभाग, राजस्व व पुलिस कर्मियों की तैनात करने के अलावा 510 आपदा मित्रों और नाविकाें को प्रशिक्षित कर दिया गया है।
प्रशासन ने दावा किया है कि शरणस्थलियों में पेयजल, शौचालय और मेडिकल किट की व्यवस्था की गई है। वहीं बाढ़ चौकियाें और शरणालय में पशुपालन विभाग, राजस्व व पुलिस कर्मियों की तैनात करने के अलावा 510 आपदा मित्रों और नाविकाें को प्रशिक्षित कर दिया गया है।
गंडक नदी में पानी बढ़ने पर पीपे के बने पुल खोल दिए जाएंगे। ऐसे में लोगों का आवागमन प्रभावित न हो इसके लिए बड़े और मझोले नाव का संचालन होगा। इन नावों पर लाइफ जैकेट रखे जाएंगे, जिसका नाव से नदी पार करते समय प्रयोग किया जाएगा। ये सभी तैयारियां धरातल पर दिखाई नहीं दे रही हैं।
जमीनी स्तर पर राहत कार्यों की तैयारी भी अधूरी है। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए लंच पैकेट और पशुओं के चारे की खरीद के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ आती है, फाइलें भरती हैं, मीटिंग होती हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदलता।
जमीनी स्तर पर राहत कार्यों की तैयारी भी अधूरी है। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए लंच पैकेट और पशुओं के चारे की खरीद के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ आती है, फाइलें भरती हैं, मीटिंग होती हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदलता।
जब पानी घर में घुसता है तब प्रशासन हरकत में आता है। इस बार भी शरणस्थली तो बना दी गईं, पर वहां भोजन, दवा और पशुओं के चारे की व्यवस्था नहीं की गई है।
बाढ़ चौकियों पर तैयारी शून्य
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा के समय लोगों को त्वरित राहत और सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थापित की जाने वाली बाढ़ चौकियों पर इस बार भी तैयारियों का अभाव है। प्रस्तावित अधिकांश बाढ़ चौकियों पर न तो राहत सामग्री की व्यवस्था है और न ही किसी प्रकार की पूर्व तैयारी दिख रही है।
बाढ़ चौकियों पर तैयारी शून्य
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा के समय लोगों को त्वरित राहत और सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्थापित की जाने वाली बाढ़ चौकियों पर इस बार भी तैयारियों का अभाव है। प्रस्तावित अधिकांश बाढ़ चौकियों पर न तो राहत सामग्री की व्यवस्था है और न ही किसी प्रकार की पूर्व तैयारी दिख रही है।
शनिवार को खड्डा क्षेत्र के भैंसहा गांव स्थित शिव मंदिर परिसर में बनने वाली बाढ़ चौकी में कोई व्यवस्था नहीं मिली। गांव के गोविंद यादव ने बताया कि हर वर्ष यह क्षेत्र बाढ़ प्रभावित होता है। अभी तक प्रशासनिक तैयारियां धरातल पर नजर नहीं आ रही हैं।
इसी तरह लक्ष्मीपुर पड़रहवा स्थित पंचायत भवन को बाढ़ चौकी के रूप में चिह्नित किया गया है। यहां कोई तैयारी नहीं दिखी। ग्राम प्रधान/प्रशासक आनंद चौहान और गांव के अंबिका गौड़, दीनानाथ शर्मा, प्रत्युष चौहान व बुद्धिमन ने बताया कि चौकी के नाम पर केवल बैनर लगा दिया जाता है, लेकिन जरूरत के समय उपयोगी राहत सामग्री, दवाइयां, नाव, टॉर्च अथवा अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं रहता है।
इसी तरह लक्ष्मीपुर पड़रहवा स्थित पंचायत भवन को बाढ़ चौकी के रूप में चिह्नित किया गया है। यहां कोई तैयारी नहीं दिखी। ग्राम प्रधान/प्रशासक आनंद चौहान और गांव के अंबिका गौड़, दीनानाथ शर्मा, प्रत्युष चौहान व बुद्धिमन ने बताया कि चौकी के नाम पर केवल बैनर लगा दिया जाता है, लेकिन जरूरत के समय उपयोगी राहत सामग्री, दवाइयां, नाव, टॉर्च अथवा अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं रहता है।
गंडक नदी पार स्थित शिवपुर पुलिस चौकी, सालिकपुर चौकी और छितौनी इंटर कॉलेज परिसर में बनने वाली बाढ़ चौकियों पर भी बाढ़ पूर्व तैयारियां नहीं दिखीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकतर बाढ़ चौकियां केवल औपचारिकता तक सीमित रहती हैं और आपदा के समय अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। संवाद
एक भी बाढ़ चौकी और शरणालय सक्रिय नहीं
तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र में साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में बहने वाली गंडक नदी का जल स्तर मानसून के दौरान बढ़ जाता है। उससे किसी प्रकार के खतरे से निपटने के लिए प्रशासन की तरफ से अहिरौली दान, बेदुपार और रकबा जंगली पट्टी में बाढ़ चौकी/शरणालय बनाए गए हैं।
एक भी बाढ़ चौकी और शरणालय सक्रिय नहीं
तमकुहीरोड। सेवरही क्षेत्र में साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में बहने वाली गंडक नदी का जल स्तर मानसून के दौरान बढ़ जाता है। उससे किसी प्रकार के खतरे से निपटने के लिए प्रशासन की तरफ से अहिरौली दान, बेदुपार और रकबा जंगली पट्टी में बाढ़ चौकी/शरणालय बनाए गए हैं।
मानसून आने में कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन अब तक एक भी बाढ़ चौकी और शरणालय सक्रिय नहीं है। शनिवार को इन तीनों चौकियाें और शरणालय में न तो बाढ़ बचाव के लिए कोई इंतजाम दिखा और न ही शरण लेने वाले लोगों के लिए कोई व्यवस्था। संवाद
बाढ़ चौकी पर लटका मिला ताला
दुदही। प्राथमिक विद्यालय बांसगांव जमुआन घाट में बनी बाढ़ चौकी सिर्फ कागजों में है। शनिवार को वहां ताला लटका मिला। क्षेत्र के बांसगांव जमुआन निवासी विजय निषाद ने बताया कि वर्ष 2000 में नारायणी नदी में बाढ़ आई थी। उसी समय से यहां प्रशासन की तरफ से बाढ़ चौकी और शरणालय बनाया गया था।
बाढ़ चौकी पर लटका मिला ताला
दुदही। प्राथमिक विद्यालय बांसगांव जमुआन घाट में बनी बाढ़ चौकी सिर्फ कागजों में है। शनिवार को वहां ताला लटका मिला। क्षेत्र के बांसगांव जमुआन निवासी विजय निषाद ने बताया कि वर्ष 2000 में नारायणी नदी में बाढ़ आई थी। उसी समय से यहां प्रशासन की तरफ से बाढ़ चौकी और शरणालय बनाया गया था।
जब बाढ़ आई थी तो उस समय प्रशासन की तरफ से यहां सुविधाएं मुहैया कराई गई थीं। 26 वर्ष बीत गए, लेकिन आज तक यहां कोई इंतजाम देखने को नहीं मिला। यहां बाढ़ चौकी का बोर्ड भी नहीं लगा है। बांसगांव जमुआन निवासी देव शरण यादव ने बताया कि 26 वर्ष से यहां स्कूल चलता है। यहां चौकी भी है। इसकी जानकारी ही नहीं है।
बाढ़ की तैयारियों का कार्य 15 जून से पहले पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। बाढ़ चौकियों व बाढ़ शरणस्थली पर तैनात कर्मचारियों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। पशुओं के चारे व व अन्य सामग्री वितरण के लिए आपदा विभाग की ओर से होने वाला टेंडर प्रक्रिया में है: महेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड, कुशीनगर
बाढ़ की तैयारियों का कार्य 15 जून से पहले पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। बाढ़ चौकियों व बाढ़ शरणस्थली पर तैनात कर्मचारियों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। पशुओं के चारे व व अन्य सामग्री वितरण के लिए आपदा विभाग की ओर से होने वाला टेंडर प्रक्रिया में है: महेश कुमार, एक्सईएन बाढ़ खंड, कुशीनगर