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जोगिया जनूबीपट्टी में आज से बिखरेंगे लोककला के विविध रंग
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जोगिया जनूबीपट्टी में आज से बिखरेंगे लोककला के विविध रंग
शनिवार की रात साढ़े आठ बजे पत्रिका के विमोचन से होगा कार्यक्रम का आगाज
गांव की महिलाएं और युवतियां पीड़िया गीत गाकर पूर्वांचल की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराएंगी
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। विलुप्त होती पुरातन संस्कृति को बचाने के लिए फाजिलनगर क्षेत्र के जोगिया जनूबी पट्टी गांव में शुरू हुआ 14वां लोकरंग महोत्सव आज(शनिवार) से शुरू होगा। दो दिवसीय महोत्सव कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए आयोजित होगा। महोत्सव की शुरूआत शनिवार रात में साढ़े आठ बजे लोकरंग पत्रिका के विमोचन से होगी।
जोगिया जनूबी पट्टी निवासी वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष चंद्र कुशवाहा अपने गांव में लोक रंग महोत्सव का आयोजन करते हैं। महोत्सव में देश व दुनिया के कई साहित्यकार पहुंचते हैं। देश की विलुप्त हो रही विभिन्न लोक संस्कृतियों पर सार्थक चर्चा होती है। इसके अलावा रात में इन लोक संस्कृतियों की जानकारी के लिए उनके नृत्य, गीत व नाटकों का मंचन आदि भी होता है। पिछले साल कोरोना के चलते यह कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ था। इस साल कार्यक्रम कोविड गाइड लाइन के बीच होगा। कार्यक्रम स्थल पर केवल 200 लोगों के आने की अनुमति होगी। मंच पर अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली टीमें भी कार्यक्रम से कुछ ही देर पहले आएंगी और कार्यक्रम खत्म कर वापस अपने गंतव्य को लौट जाएंगी। स्थानीय टीमों को भी अलग-अलग जगहों पर ठहराया गया है। इस बार के कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण असम का बिहू नृत्य व बुंदेलखंडी राई नृत्य है।
आयोजक सुभाष चंद्र कुशवाहा द्वारा शनिवार रात साढ़े आठ बजे पत्रिका के विमोचन से कार्यक्रम की शुरूआत होगी। इसके बाद गांव की महिलाएं व युवतियां पीड़िया गीत सुनाएंगी। रात सवा नौ बजे से बिहार प्रांत की टीम लोकगीत सुनाएगी। इसके बाद रात में 10 बजे दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर से आए केम चंदलाल भोजपुरी गीत सुनाएंगे। केम चंदलाल के पूर्वज पांच पीढ़ी पहले गिरमिटया मजदूर के तौर पर दक्षिण अफ्रीका गए थे। रात में पौने 11 बजे असम का बिहू नृत्य और उसके बाद बुंदेलखंड का राई नृत्य प्रस्तुत होगा। इसके बाद राजस्थान के जैसलमेर से आई टीम राजस्थानी लोकगीत व नृत्य प्रस्तुत करेगी। रात में साढ़े बारह बजे उर्मिलेश थपलियाल के नाटक तुम सम पुरुष न मो सम नारी का मंचन होगा।
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भित्ति चित्रों से सजा पूरा गांव-
लोकरंग आयोजन के लिए पूरे गांव को आकर्षक भित्ती चित्रों से सजाया गया है। गाजीपुर से आई कलाकारों ने टीम ने आयोजन स्थल से लेकर गांव के विभिन्न घरों के दरवाजे पर रखी बखार (अनाज की डेहरी) पर आकर्षक चित्र बनाएं हैं। रास्तों के जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा दीवारों को भी आकर्षक बनाया गया है। पूरे कार्यक्रम को फेसबुक लाइव के जरिए भी दिखाया जाएगा।
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शनिवार की रात साढ़े आठ बजे पत्रिका के विमोचन से होगा कार्यक्रम का आगाज
गांव की महिलाएं और युवतियां पीड़िया गीत गाकर पूर्वांचल की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराएंगी
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। विलुप्त होती पुरातन संस्कृति को बचाने के लिए फाजिलनगर क्षेत्र के जोगिया जनूबी पट्टी गांव में शुरू हुआ 14वां लोकरंग महोत्सव आज(शनिवार) से शुरू होगा। दो दिवसीय महोत्सव कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए आयोजित होगा। महोत्सव की शुरूआत शनिवार रात में साढ़े आठ बजे लोकरंग पत्रिका के विमोचन से होगी।
जोगिया जनूबी पट्टी निवासी वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष चंद्र कुशवाहा अपने गांव में लोक रंग महोत्सव का आयोजन करते हैं। महोत्सव में देश व दुनिया के कई साहित्यकार पहुंचते हैं। देश की विलुप्त हो रही विभिन्न लोक संस्कृतियों पर सार्थक चर्चा होती है। इसके अलावा रात में इन लोक संस्कृतियों की जानकारी के लिए उनके नृत्य, गीत व नाटकों का मंचन आदि भी होता है। पिछले साल कोरोना के चलते यह कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ था। इस साल कार्यक्रम कोविड गाइड लाइन के बीच होगा। कार्यक्रम स्थल पर केवल 200 लोगों के आने की अनुमति होगी। मंच पर अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली टीमें भी कार्यक्रम से कुछ ही देर पहले आएंगी और कार्यक्रम खत्म कर वापस अपने गंतव्य को लौट जाएंगी। स्थानीय टीमों को भी अलग-अलग जगहों पर ठहराया गया है। इस बार के कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण असम का बिहू नृत्य व बुंदेलखंडी राई नृत्य है।
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आयोजक सुभाष चंद्र कुशवाहा द्वारा शनिवार रात साढ़े आठ बजे पत्रिका के विमोचन से कार्यक्रम की शुरूआत होगी। इसके बाद गांव की महिलाएं व युवतियां पीड़िया गीत सुनाएंगी। रात सवा नौ बजे से बिहार प्रांत की टीम लोकगीत सुनाएगी। इसके बाद रात में 10 बजे दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर से आए केम चंदलाल भोजपुरी गीत सुनाएंगे। केम चंदलाल के पूर्वज पांच पीढ़ी पहले गिरमिटया मजदूर के तौर पर दक्षिण अफ्रीका गए थे। रात में पौने 11 बजे असम का बिहू नृत्य और उसके बाद बुंदेलखंड का राई नृत्य प्रस्तुत होगा। इसके बाद राजस्थान के जैसलमेर से आई टीम राजस्थानी लोकगीत व नृत्य प्रस्तुत करेगी। रात में साढ़े बारह बजे उर्मिलेश थपलियाल के नाटक तुम सम पुरुष न मो सम नारी का मंचन होगा।
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भित्ति चित्रों से सजा पूरा गांव-
लोकरंग आयोजन के लिए पूरे गांव को आकर्षक भित्ती चित्रों से सजाया गया है। गाजीपुर से आई कलाकारों ने टीम ने आयोजन स्थल से लेकर गांव के विभिन्न घरों के दरवाजे पर रखी बखार (अनाज की डेहरी) पर आकर्षक चित्र बनाएं हैं। रास्तों के जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा दीवारों को भी आकर्षक बनाया गया है। पूरे कार्यक्रम को फेसबुक लाइव के जरिए भी दिखाया जाएगा।