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मेडिकल कॉलेज : निगहबान कम, निगरानी भी कमजोर
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मेडिकल कॉलेज में दवा वितरण काउंटर पर कतार में खड़े मरीज व गार्ड की खाली कुर्सी।
पूरे परिसर में नई बिल्डिंग में 200 सीसीटीवी कैमरे लगाने का दावा, सक्रिय कितने पता नहीं
पडरौना। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 4000-5000 लोगों की भीड़ के बावजूद सिर्फ 50 सुरक्षा गार्ड और 12 होमगार्ड तैनात हैं। सीसीटीवी निगरानी भी नाकाफी है। नई बिल्डिंग में 200 कैमरे लगाए जाने का दावा है लेकिन कितने सक्रिय है यह इसकी जानकारी ही नहीं है।
पिछले एक महीने में पांच बार विवाद हो चुके हैं, जिससे मरीज और स्वास्थ्य कर्मी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कॉलेज प्रशासन के दावों के विपरीत जमीनी हकीकत चिंताजनक है।मेडिकल कॉलेज में पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त और हाईटेक निगरानी के दावों के बीच सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी पड़ रही है। हर रोज 1500-1800 ओपीडी और संवेदनशील वार्डों वाले अस्पताल परिसर में सुरक्षा का पूरा जिम्मा बहुत कम सुरक्षा गार्डों के जिम्मे छोड़ दिया गया है।
वहीं सीसीटीवी कैमरों से निगरानी किए जाने की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इसके चलते अस्पताल परिसर में होने वाली गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ रह जा रही है।हालांकि कॉलेज प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा को लेकर व्यवस्थाएं पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त हैं, सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर कोई कमी सामने आती है, उसे तत्काल दूर कराया जाता है। इसके बावजूद अस्पताल में मरीज, डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों के बीच विवाद की घटनाएं बढ़ी है, इसके चलते बेहतर सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में हर रोजाना 4000-5000 हजार लोगों की भीड़ होती है। इसमें ओपीडी, इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू वार्ड, जनरल वार्ड, सर्जरी व हड्डी वार्ड, बच्चा वार्ड, एसएनसीयू वार्ड, पीआईसीयू वार्ड, एक्सरे कक्ष, अल्ट्रासाउंड कक्ष, सीटी स्कैन जांच कक्ष, पैथोलॉजी, दवा वितरण काउंटर तक मरीज व तीमारदार शामिल होते हैं। इनकी निगरानी और सुरक्षा के जिम्मेदारी सिर्फ 50 सुरक्षा गार्ड व 12 होमगार्ड कर रहे हैं। वहीं गतिविधियों के निगरानी के लिए पुरानी बिल्डिंग में 36 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, फिलहाल सभी सक्रिय हैं।
इसके अलावा नई बिल्डिंग में कुल 200 कैमरे लगाए जाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन कितने सक्रिय हैं, इसका रिकॉर्ड कॉलेज प्रशासन के पास नहीं है। यही नहीं कुछ वार्डों में लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को तक को नहीं है।
सिर्फ जब कोई विवाद होता है तो उस समय कुछ दिनों तक सुरक्षा के इन इंतजामों पर ध्यान दिया जाता है फिर वह ठंडे बस्ते में चला जाता है। शनिवार को सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल में कुछ जगहों पर सुरक्षा गार्ड तैनात मिले तो कहीं पर नदारद थे। इनमें से कुछ कुर्सी पर बैठकर मोबाइल से चिपके हुए थे।
12:05 बजे : दवा काउंटर के सामने मरीजों की कतारें लगी हुईं थीं। इसके बावजूद वहां पर कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं दिखाई दिया। वहीं काउंटर के सामने गार्ड की कुर्सी खुली पड़ी हुई थी।
12:10 बजे : पैथोलॉजी में मरीजों की भीड़ के बावजूद तैनात होमगार्ड पंजीकरण खिड़की के अंदर कुर्सी पर बैठकर आराम करते हुए मिले। जबकि सैंपल निकलवाने, जांच रिपोर्ट लेने व पंजीकरण कराने वाले मरीजों की संख्या काफी थी।
12:15 बजे : प्राचार्य कार्यालय के बाहर एक होमगार्ड व एक सुरक्षा गार्ड तैनात मिले, जिसमें से सुरक्षा गार्ड कुर्सी पर बैठकर ड्यूटी करते हुए मिले जबकि होमगार्ड चल रहे इंटरव्यू के दौरान आने-जाने वाले अभ्यर्थियों व आगंतुकों की सूचना पहुंचाते हुए मिला।
12:20 बजे : पुरानी बिल्डिंग के दूसरी मंजिल पर सीटी स्कैन जांच के मरीज बैठे हुए थे, जबकि सुरक्षा के लिहाज से यहां पर कोई गार्ड तैनात नहीं मिला।
12:25 बजे : नई बिल्डिंग के प्रवेश द्वार पर मरीज व तीमारदार सीढ़ियों पर बैठे थे। तैनात सुरक्षा गार्ड कुर्सी पर आराम से बैठकर समय काटते हुए मिले। जबकि यहां से हर समय मरीज व तीमारदारों की आवाजाही होती रहती है।
12:30 बजे : इमरजेंसी के बाहर प्रवेश द्वार पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड मोबाइल से बात करते हुए मिला तो वहीं एक होमगार्ड मोबाइल देखते तो तीसरा सुरक्षा गार्ड कुर्सी पर बैठकर ड्यूटी करते हुए मिले।
केस एक
16 सितंबर 2026 को सर्जरी वार्ड में दो पक्षों के मरीज अगल-बगल बेड पर थे। दोनों पक्षों के बीच वार्ड में ही कहासुनी के बाद मारपीट व बवाल हुआ था। भर्ती अन्य मरीज व तीमारदारों में अफरा-तफरी मच गई थी। सूचना पर आई पुलिस ने बीच-बचाव करते हुए मामला शांत कराया था। इसके दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया था।
केस दो
21 जुलाई 2026 को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज की छीना-झपटी में दलाल भिड़ गए थे। इससे मेडिकल कॉलेज कैंपस में अफरा-तफरी मच गई थी। पुलिस के पहुंचते ही दलाल एंबुलेंस लेकर भाग निकले थे। जबकि इमरजेंसी वार्ड के बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात थे,फिर भी उनका दलालों पर कोई भय नहीं दिखाई दिया था।
केस तीन
17 सितंबर 2026 को शिवपुर डीह गांव निवासी अरमान को परिजन इमरजेंसी वार्ड में लेकर पहुंचे थे। किसी बात को लेकर कांटी गांव निवासी इंटर्नशिप कर रहे नासीर से परिजन उलझ गए थे। नासीर के चाचा की तहरीर पर रविंद्र नगर धूस पुलिस ने आजाद और अरमान पर प्राथमिकी दर्ज की थी।
केस चार
23 अक्तूबर 2026 को भाजपा किसान प्रकोष्ठ के टेकुआटार मंडल मंत्री दिनेश चौधरी को सांप काटने के बाद परिजन इलाज के लिए सुबह करीब 6:30 बजे पहुंचे। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने के करीब 40 मिनट बाद उनकी मौत हो गई। परिजन ने देरी से इलाज शुरू करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
स्पीकअप
मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा की व्यवस्था ठीक नहीं है। अधिक संख्या के कारण मरीजों व तीमारदारों को जगह-जगह कतार लगानी पड़ती है। कुछ लोग जबरन कतार में आगे लग जाते हैं। सुरक्षाकर्मी अगर सतर्क रहते तो यह परेशानी नहीं होती।
-उमाशंकर, बेलवा रामजस
मरीजों के इलाज का समुचित प्रबंध नहीं होने के चलते परेशानी हो रही है, सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। रात में मरीजों को मौके पर गार्ड नहीं दिखते हैं। इससे मरीज व तीमारदार खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
-गुलाब, केसरी छपरा
मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए लगातार पुलिस प्रशासन से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। हाल में हुई घटनाओं को गंभीरता से लिया गया है। इमरजेंसी और संवेदनशील वार्डों में सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने के साथ निगरानी बढ़ाई जाएगी। मुकम्मल सुरक्षा बंदोबस्त के लिए जल्द ही उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।
- डॉ. केपी गोड़, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर
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पडरौना। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 4000-5000 लोगों की भीड़ के बावजूद सिर्फ 50 सुरक्षा गार्ड और 12 होमगार्ड तैनात हैं। सीसीटीवी निगरानी भी नाकाफी है। नई बिल्डिंग में 200 कैमरे लगाए जाने का दावा है लेकिन कितने सक्रिय है यह इसकी जानकारी ही नहीं है।
पिछले एक महीने में पांच बार विवाद हो चुके हैं, जिससे मरीज और स्वास्थ्य कर्मी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कॉलेज प्रशासन के दावों के विपरीत जमीनी हकीकत चिंताजनक है।मेडिकल कॉलेज में पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त और हाईटेक निगरानी के दावों के बीच सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी पड़ रही है। हर रोज 1500-1800 ओपीडी और संवेदनशील वार्डों वाले अस्पताल परिसर में सुरक्षा का पूरा जिम्मा बहुत कम सुरक्षा गार्डों के जिम्मे छोड़ दिया गया है।
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वहीं सीसीटीवी कैमरों से निगरानी किए जाने की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इसके चलते अस्पताल परिसर में होने वाली गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ रह जा रही है।हालांकि कॉलेज प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा को लेकर व्यवस्थाएं पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त हैं, सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर कोई कमी सामने आती है, उसे तत्काल दूर कराया जाता है। इसके बावजूद अस्पताल में मरीज, डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों के बीच विवाद की घटनाएं बढ़ी है, इसके चलते बेहतर सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में हर रोजाना 4000-5000 हजार लोगों की भीड़ होती है। इसमें ओपीडी, इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू वार्ड, जनरल वार्ड, सर्जरी व हड्डी वार्ड, बच्चा वार्ड, एसएनसीयू वार्ड, पीआईसीयू वार्ड, एक्सरे कक्ष, अल्ट्रासाउंड कक्ष, सीटी स्कैन जांच कक्ष, पैथोलॉजी, दवा वितरण काउंटर तक मरीज व तीमारदार शामिल होते हैं। इनकी निगरानी और सुरक्षा के जिम्मेदारी सिर्फ 50 सुरक्षा गार्ड व 12 होमगार्ड कर रहे हैं। वहीं गतिविधियों के निगरानी के लिए पुरानी बिल्डिंग में 36 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, फिलहाल सभी सक्रिय हैं।
इसके अलावा नई बिल्डिंग में कुल 200 कैमरे लगाए जाने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन कितने सक्रिय हैं, इसका रिकॉर्ड कॉलेज प्रशासन के पास नहीं है। यही नहीं कुछ वार्डों में लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को तक को नहीं है।
सिर्फ जब कोई विवाद होता है तो उस समय कुछ दिनों तक सुरक्षा के इन इंतजामों पर ध्यान दिया जाता है फिर वह ठंडे बस्ते में चला जाता है। शनिवार को सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल में कुछ जगहों पर सुरक्षा गार्ड तैनात मिले तो कहीं पर नदारद थे। इनमें से कुछ कुर्सी पर बैठकर मोबाइल से चिपके हुए थे।
12:05 बजे : दवा काउंटर के सामने मरीजों की कतारें लगी हुईं थीं। इसके बावजूद वहां पर कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं दिखाई दिया। वहीं काउंटर के सामने गार्ड की कुर्सी खुली पड़ी हुई थी।
12:10 बजे : पैथोलॉजी में मरीजों की भीड़ के बावजूद तैनात होमगार्ड पंजीकरण खिड़की के अंदर कुर्सी पर बैठकर आराम करते हुए मिले। जबकि सैंपल निकलवाने, जांच रिपोर्ट लेने व पंजीकरण कराने वाले मरीजों की संख्या काफी थी।
12:15 बजे : प्राचार्य कार्यालय के बाहर एक होमगार्ड व एक सुरक्षा गार्ड तैनात मिले, जिसमें से सुरक्षा गार्ड कुर्सी पर बैठकर ड्यूटी करते हुए मिले जबकि होमगार्ड चल रहे इंटरव्यू के दौरान आने-जाने वाले अभ्यर्थियों व आगंतुकों की सूचना पहुंचाते हुए मिला।
12:20 बजे : पुरानी बिल्डिंग के दूसरी मंजिल पर सीटी स्कैन जांच के मरीज बैठे हुए थे, जबकि सुरक्षा के लिहाज से यहां पर कोई गार्ड तैनात नहीं मिला।
12:25 बजे : नई बिल्डिंग के प्रवेश द्वार पर मरीज व तीमारदार सीढ़ियों पर बैठे थे। तैनात सुरक्षा गार्ड कुर्सी पर आराम से बैठकर समय काटते हुए मिले। जबकि यहां से हर समय मरीज व तीमारदारों की आवाजाही होती रहती है।
12:30 बजे : इमरजेंसी के बाहर प्रवेश द्वार पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड मोबाइल से बात करते हुए मिला तो वहीं एक होमगार्ड मोबाइल देखते तो तीसरा सुरक्षा गार्ड कुर्सी पर बैठकर ड्यूटी करते हुए मिले।
केस एक
16 सितंबर 2026 को सर्जरी वार्ड में दो पक्षों के मरीज अगल-बगल बेड पर थे। दोनों पक्षों के बीच वार्ड में ही कहासुनी के बाद मारपीट व बवाल हुआ था। भर्ती अन्य मरीज व तीमारदारों में अफरा-तफरी मच गई थी। सूचना पर आई पुलिस ने बीच-बचाव करते हुए मामला शांत कराया था। इसके दोनों को डिस्चार्ज कर दिया गया था।
केस दो
21 जुलाई 2026 को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीज की छीना-झपटी में दलाल भिड़ गए थे। इससे मेडिकल कॉलेज कैंपस में अफरा-तफरी मच गई थी। पुलिस के पहुंचते ही दलाल एंबुलेंस लेकर भाग निकले थे। जबकि इमरजेंसी वार्ड के बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात थे,फिर भी उनका दलालों पर कोई भय नहीं दिखाई दिया था।
केस तीन
17 सितंबर 2026 को शिवपुर डीह गांव निवासी अरमान को परिजन इमरजेंसी वार्ड में लेकर पहुंचे थे। किसी बात को लेकर कांटी गांव निवासी इंटर्नशिप कर रहे नासीर से परिजन उलझ गए थे। नासीर के चाचा की तहरीर पर रविंद्र नगर धूस पुलिस ने आजाद और अरमान पर प्राथमिकी दर्ज की थी।
केस चार
23 अक्तूबर 2026 को भाजपा किसान प्रकोष्ठ के टेकुआटार मंडल मंत्री दिनेश चौधरी को सांप काटने के बाद परिजन इलाज के लिए सुबह करीब 6:30 बजे पहुंचे। इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने के करीब 40 मिनट बाद उनकी मौत हो गई। परिजन ने देरी से इलाज शुरू करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
स्पीकअप
मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा की व्यवस्था ठीक नहीं है। अधिक संख्या के कारण मरीजों व तीमारदारों को जगह-जगह कतार लगानी पड़ती है। कुछ लोग जबरन कतार में आगे लग जाते हैं। सुरक्षाकर्मी अगर सतर्क रहते तो यह परेशानी नहीं होती।
-उमाशंकर, बेलवा रामजस
मरीजों के इलाज का समुचित प्रबंध नहीं होने के चलते परेशानी हो रही है, सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। रात में मरीजों को मौके पर गार्ड नहीं दिखते हैं। इससे मरीज व तीमारदार खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
-गुलाब, केसरी छपरा
मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए लगातार पुलिस प्रशासन से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। हाल में हुई घटनाओं को गंभीरता से लिया गया है। इमरजेंसी और संवेदनशील वार्डों में सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने के साथ निगरानी बढ़ाई जाएगी। मुकम्मल सुरक्षा बंदोबस्त के लिए जल्द ही उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।
- डॉ. केपी गोड़, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर