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भगवान बुद्ध ने यहां प्राप्त किया था आठ बार निर्वाण : प्रो.रजनीश

Sat, 31 Aug 2019 06:30 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2019 06:30 PM IST
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lord buddha got 8 times salvation in kushinagar
बुद्ध पीजी कॉलेज में आयोजित युग युगीन कुशीनगर विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करत - फोटो : KUSHINAGAR
भगवान बुद्ध ने यहां प्राप्त किया था आठ बार निर्वाण : प्रो.रजनीश
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युग-युगीन कुशीनगर विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आगाज
निर्वाण के लिए कुशीनगर का चुनाव अपने आप में महत्वपूर्ण: प्रो वैद्यनाथ लाभ
इसी धरती से होगा कुशीनगर के इतिहास की खोज : डॉ. बालमुकुंद पांडेय
अमर उजाला ब्यूरो
कसया(कुशीनगर)। त्रिपिटक, पुराण और चीनी यात्रियों के यात्रा वृत्तांत कुशीनगर की गौरव गाथा से भरे पड़े हैं। यह क्षेत्र भगवान बुद्ध, महावीर, इक्ष्वाकु वंशीय राजा व हिंदुओं के आराध्य देव श्रीराम के पुत्र कुश की कर्मभूमि रही है। कुशीनगर विश्व का एक ऐसा पवित्र स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने आठ बार निर्वाण प्राप्त किया। ऐतिहासिक तथ्यों के साथ उद्योग, कृषि, जन-जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान आदि कुशीनगर की विरासत हैं।
ये बातें महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा, महाराष्ट्र के कुलपति प्रोफेसर रजनीश शुक्ल ने कहीं। प्रोफेसर शुक्ल भारतीय इतिहास संकलन समिति, गोरक्षप्रांत व बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को आयोजित युग-युगीन कुशीनगर विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि कुशीनगर परिक्षेत्र आजादी के पूर्व ही गन्ना उत्पादन व चीनी मिलों की चलते पूरे देश में प्रसिद्ध था। यह क्षेत्र नील की खेती का भी केंद्र रहा है। जब कुशीनगर में नील की खेती का इतिहास लिखा जाएगा, तो अंग्रेजों के अत्याचार, किसान संघर्ष व स्वतंत्रता संग्राम के एक नए इतिहास का पता चलेगा।
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संगोष्ठी में नव नालंदा महाविहार, नालंदा के कुलपति प्रोफेसर वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि भगवान बुद्ध ने अपने निर्वाण के लिए कुशीनगर की धरती को चुनाव किया। अपने आप में यहां के महत्व को साबित करता है। यहां के छुपे इतिहास व पुरातात्विक जानकारी को प्रकाश में लाने के लिए अभी और खोज की जरूरत है। इस धरती का गौरवशाली इतिहास रहा है। यहां की छोटे-छोटे स्थल आज भी सामने नहीं आ पाए हैं। संगोष्ठी के माध्यम से उन्हें प्रकाश में लाए जाने का एक प्रयास है।
राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली डॉ. बाल मुकुंद पांडेय ने कहा कि कुशीनगर के इतिहास की खोज लंदन व दिल्ली से नहीं की जा सकती है। यहीं की धरती में खोजना पड़ेगा। यह धरती अनेक प्रतिभाओं को जन्मभूमि रही है। इसकी विश्वसनीयता को प्रगाढ़ करने के लिए और खोज की जरूरत है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अग्ग महापंडित भदंत ज्ञानेश्वर ने कहा कि कुशीनगर बौद्ध भिक्षुओं का स्थान है। कहा कि भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण के लिए कुशीनगर स्थल के बारे में अपने शिष्य आनंद को चुने जाने के महत्व को बताया था। ज्ञानेश्वर ने कुशीनगर की प्राचीनता, ऐतिहासिकता, विकास समेत कई बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
संचालन भारतीय इतिहास संकलन परिषद, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. ओम जी उपाध्याय ने किया। संगोष्ठी के संयोजन की भूमिका डॉ. ज्ञान प्रकाश मंगलम ने निभाई। अंत में प्राचार्य डॉ. अमृतांशु शुक्ल ने आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर डॉ. हरिशंकर पांडेय, प्रो. दिग्विजयनाथ मौर्य, डॉ. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी, डॉ. अंजुला शुक्ला, डॉ. कुमुद त्रिपाठी, डॉ. ममता मणि त्रिपाठी, डॉ. सुबोध, डॉ. कन्हैया सिंह, डॉ. सलिल पांडेय, डॉ. आमोद राय, डॉ. निगम मौर्य, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. अंबिका तिवारी, डॉ. उर्मिला यादव, डॉ. अनुज कुमार, रमेश चंद्र विश्वकर्मा, डॉ. कृष्ण कुमार जायसवाल, डॉ. गौरव तिवारी, डॉ. कौस्तुभ नारायण मिश्र, डॉ. रामभूषण मिश्र, डॉ. सीमा त्रिपाठी, डॉ. सत्यप्रकाश, प्रधानाचार्य चंद्रिका शर्मा आदि मौजूद रहे।

शोध वाचन के लिए कराया पंजीकरण
बुद्ध पीजी कॉलेज, कुशीनगर में भारतीय इतिहास संकलन समिति, गोरक्षप्रांत की तरफ से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में शोध छात्रों ने अपने शोध पत्र के वाचन के लिए निर्धारित पंजीकरण शुल्क जमा कर पंजीकरण कराया। पंजीकरण करने वाले सदस्यों में भारतीय इतिहास संकलन समिति, गोरक्षप्रांत के प्रवीण त्रिपाठी, बृजेश कुमार पांडेय, विकास यादव शामिल रहे। उद्घाटन सत्र में लगभग 80 शोध छात्रों ने पंजीकरण कराया।
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