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श्रीनाथ सम्मान से सम्मानित हुए संस्कृत के विद्वान
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हाटा नगर के श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय के 95वें स्थापना दिवस पर महाविद्यालय की शोध पत्रिका का वि
- फोटो : KUSHINAGAR
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श्रीनाथ सम्मान से सम्मानित हुए संस्कृत के विद्वान
कवि त्रिलोकीनाथ त्रिपाठी चंचरीक की पुस्तक झांपी का विमोचन भी हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
हाटा। श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय हाटा के 95वें स्थापना दिवस पर रविवार को महाविद्यालय सभागार में समारोह का आयोजन किया गया। दो सत्रों में आयोजित इस समारोह के प्रथम सत्र में संस्कृत के विद्वानों का अलंकरण, शोध पत्रिका ज्योति और त्रिलोकीनाथ त्रिपाठी चंचरीक की पुस्तक झांपी का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महात्मा गांधी हिंदी विश्व विद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन और दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके बाद महाविद्यालय की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. दीप्ति त्रिपाठी और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के न्याय विभाग के पूर्व अध्यक्ष वशिष्ठ त्रिपाठी को श्रीनाथ सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर अपने संबोधन में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि संस्कृत का आधुनिकीकरण नहीं होने से वह पिछड़ता जा रहा है। बदलते परिवेश में संस्कृत भाषा को भी समृद्ध करने की आवश्यकता है, ताकि हमारी इस सनातन संस्कृति को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि भारतीय संस्कृति के लिए संस्कृत शिक्षा के मूल की आवश्यकता होती है, लेकिन मूल्य के आगे मूल का पतन हो रहा है।
प्रो. दीप्ति त्रिपाठी ने कहा कि आज काफी समय से संस्कृत शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से अलग किया जा रहा है। यही कारण है कि आज बहुत से शिक्षण संस्थाओं में संस्कृत पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं हैं।
इस कार्यक्रम में विधायक पवन केडिया, नगरपालिका अध्यक्ष मोहन वर्मा को भी सम्मानित किया गया। संस्था के मंत्री गंगेश्वर पांडेय ने स्वागत भाषण के माध्यम से सभी अतिथियों को स्वागत किया, जबकि प्रबंधक अग्निवेश मणि और प्राचार्य डॉ. राजेश चतुर्वेदी ने अभार ज्ञापित किया।
इस दौरान द्वारिकाधीश संस्कृत एकेडमी गुजरात के पूर्व निदेशक प्रो. जयप्रकाश नारायण द्विवेदी, कवि त्रिलोकी नाथ त्रिपाठी चंचरिक, शिक्षक एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी, शिक्षक नेता जगदीश पांडेय, नंदकिशोर त्रिपाठी, प्रधानाचार्य एसपी सिंह, नंदा पांडेय, विश्वास मणि, अभय मणि, संजय पांडेय, मोहन पांडेय, दिलीप जायसवाल, उदयभान कुशवाहा आदि मौजूद रहे।
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कवि त्रिलोकीनाथ त्रिपाठी चंचरीक की पुस्तक झांपी का विमोचन भी हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
हाटा। श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय हाटा के 95वें स्थापना दिवस पर रविवार को महाविद्यालय सभागार में समारोह का आयोजन किया गया। दो सत्रों में आयोजित इस समारोह के प्रथम सत्र में संस्कृत के विद्वानों का अलंकरण, शोध पत्रिका ज्योति और त्रिलोकीनाथ त्रिपाठी चंचरीक की पुस्तक झांपी का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महात्मा गांधी हिंदी विश्व विद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन और दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके बाद महाविद्यालय की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. दीप्ति त्रिपाठी और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के न्याय विभाग के पूर्व अध्यक्ष वशिष्ठ त्रिपाठी को श्रीनाथ सम्मान से सम्मानित किया गया।
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इस मौके पर अपने संबोधन में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि संस्कृत का आधुनिकीकरण नहीं होने से वह पिछड़ता जा रहा है। बदलते परिवेश में संस्कृत भाषा को भी समृद्ध करने की आवश्यकता है, ताकि हमारी इस सनातन संस्कृति को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि भारतीय संस्कृति के लिए संस्कृत शिक्षा के मूल की आवश्यकता होती है, लेकिन मूल्य के आगे मूल का पतन हो रहा है।
प्रो. दीप्ति त्रिपाठी ने कहा कि आज काफी समय से संस्कृत शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से अलग किया जा रहा है। यही कारण है कि आज बहुत से शिक्षण संस्थाओं में संस्कृत पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं हैं।
इस कार्यक्रम में विधायक पवन केडिया, नगरपालिका अध्यक्ष मोहन वर्मा को भी सम्मानित किया गया। संस्था के मंत्री गंगेश्वर पांडेय ने स्वागत भाषण के माध्यम से सभी अतिथियों को स्वागत किया, जबकि प्रबंधक अग्निवेश मणि और प्राचार्य डॉ. राजेश चतुर्वेदी ने अभार ज्ञापित किया।
इस दौरान द्वारिकाधीश संस्कृत एकेडमी गुजरात के पूर्व निदेशक प्रो. जयप्रकाश नारायण द्विवेदी, कवि त्रिलोकी नाथ त्रिपाठी चंचरिक, शिक्षक एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी, शिक्षक नेता जगदीश पांडेय, नंदकिशोर त्रिपाठी, प्रधानाचार्य एसपी सिंह, नंदा पांडेय, विश्वास मणि, अभय मणि, संजय पांडेय, मोहन पांडेय, दिलीप जायसवाल, उदयभान कुशवाहा आदि मौजूद रहे।