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यात्री सुविधाओं का टोटा, परेशान हो रहे यात्री
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कप्तानगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म न.2 पर नहीं लगा है शेड।
- फोटो : KUSHINAGAR
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यात्री सुविधाओं का टोटा, परेशान हो रहे यात्री
जनपद का इकलौता जंक्शन है कप्तानगंज रेलवे स्टेशन
कप्तानगंज(कुशीनगर)। जनपद के इकलौते रेलवे जंक्शन कप्तानगंज स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव है। प्लेटफार्म पर शेड नहीं है। यात्रियों को धूप में ही खड़े होकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ रहा है। पूछताछ काउंटर, वाहन स्टैंड और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा का भी अभाव है।
गोरखपुर, मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कोलकाता सहित अन्य बड़े शहरों में जाने के लिए यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यात्री आते हैं। प्लेटफार्म नंबर दो पर यात्रियों के बैठने के लिए बेंच तो हैं, लेकिन शेड नहीं है। कुछ वर्ष पहले वाहन खड़ी करने के लिए स्टैंड बना था, लेकिन वह भी दो वर्ष से बंद है। पूछताछ काउंटर बंद होने से ट्रेनों की जानकारी यात्रियों को नहीं मिल पा रही है। रेल कर्मचारियों और आकस्मिक दुर्घटनाओं के लिए रेलवे की ओर से अस्पताल खोला गया है, लेकिन चार वर्षों से किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। अस्पताल में फार्मासिस्ट और सफाईकर्मी ही मौजूद हैं। रेल कर्मचारियों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। आरओ वाटर मशीन भी खराब है।
व्यवसायी परमजीत सिंह ने कहा कि व्यावसायिक कार्य से गोरखपुर अक्सर आना-जाना पड़ता है। वाहन स्टैंड न होने से गाड़ी खड़ी करने में परेशानी होती है। गाड़ी खड़ी कर चले भी जाएं तो चिंता लगी रहती है। वाहन उचित जगह खड़ी करने के चक्कर में कभी-कभार ट्रेन भी छूट जाती है। कस्बे के जयप्रकाश खरवार का कहना है कि जनपद का इकलौता रेलवे जंक्शन होने के कारण यहां यात्रियों की भीड़ रहती है, लेकिन कोरोनाकाल के बाद ट्रेनों की संख्या में कमी कर दी गई है। यहां यात्री सुविधाओं का अभाव है।
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पटखौली के नवाब अली ने कहा कि इलाज के लिए लखनऊ अक्सर जाना पड़ता है, लेकिन पूछताछ काउंटर बंद होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दिनेश यादव ने कहा कि रेलवे अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती न होना बहुत बड़ी समस्या है, क्योंकि रेलवे जंक्शन होने के कारण भीड़भाड़ रहती है। घायलों या जहरखुरानी के शिकार लोगों के उपचार की त्वरित व्यवस्था नहीं हो पाती है।
वर्जन-
गोरखपुर से पनियहवा तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण होना है। इस दौरान कप्तानगंज जंक्शन की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। वाहन स्टैंड के लिए टेंडर कई बार निकाला गया, लेकिन टेंडर के लिए किसी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। रेलवे अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती की प्रक्रिया तीसरी बार की गई, लेकिन किसी डॉक्टर ने रुचि नहीं दिखाई। कप्तानगंज रेलवे स्टेशन डी क्लास में है। इसके चलते अलग से पूछताछ काउंटर नहीं खोला जा सकता है।
पंकज सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी
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जनपद का इकलौता जंक्शन है कप्तानगंज रेलवे स्टेशन
कप्तानगंज(कुशीनगर)। जनपद के इकलौते रेलवे जंक्शन कप्तानगंज स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव है। प्लेटफार्म पर शेड नहीं है। यात्रियों को धूप में ही खड़े होकर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ रहा है। पूछताछ काउंटर, वाहन स्टैंड और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा का भी अभाव है।
गोरखपुर, मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कोलकाता सहित अन्य बड़े शहरों में जाने के लिए यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यात्री आते हैं। प्लेटफार्म नंबर दो पर यात्रियों के बैठने के लिए बेंच तो हैं, लेकिन शेड नहीं है। कुछ वर्ष पहले वाहन खड़ी करने के लिए स्टैंड बना था, लेकिन वह भी दो वर्ष से बंद है। पूछताछ काउंटर बंद होने से ट्रेनों की जानकारी यात्रियों को नहीं मिल पा रही है। रेल कर्मचारियों और आकस्मिक दुर्घटनाओं के लिए रेलवे की ओर से अस्पताल खोला गया है, लेकिन चार वर्षों से किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई है। अस्पताल में फार्मासिस्ट और सफाईकर्मी ही मौजूद हैं। रेल कर्मचारियों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। आरओ वाटर मशीन भी खराब है।
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व्यवसायी परमजीत सिंह ने कहा कि व्यावसायिक कार्य से गोरखपुर अक्सर आना-जाना पड़ता है। वाहन स्टैंड न होने से गाड़ी खड़ी करने में परेशानी होती है। गाड़ी खड़ी कर चले भी जाएं तो चिंता लगी रहती है। वाहन उचित जगह खड़ी करने के चक्कर में कभी-कभार ट्रेन भी छूट जाती है। कस्बे के जयप्रकाश खरवार का कहना है कि जनपद का इकलौता रेलवे जंक्शन होने के कारण यहां यात्रियों की भीड़ रहती है, लेकिन कोरोनाकाल के बाद ट्रेनों की संख्या में कमी कर दी गई है। यहां यात्री सुविधाओं का अभाव है।
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पटखौली के नवाब अली ने कहा कि इलाज के लिए लखनऊ अक्सर जाना पड़ता है, लेकिन पूछताछ काउंटर बंद होने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दिनेश यादव ने कहा कि रेलवे अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती न होना बहुत बड़ी समस्या है, क्योंकि रेलवे जंक्शन होने के कारण भीड़भाड़ रहती है। घायलों या जहरखुरानी के शिकार लोगों के उपचार की त्वरित व्यवस्था नहीं हो पाती है।
वर्जन-
गोरखपुर से पनियहवा तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण होना है। इस दौरान कप्तानगंज जंक्शन की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। वाहन स्टैंड के लिए टेंडर कई बार निकाला गया, लेकिन टेंडर के लिए किसी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। रेलवे अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती की प्रक्रिया तीसरी बार की गई, लेकिन किसी डॉक्टर ने रुचि नहीं दिखाई। कप्तानगंज रेलवे स्टेशन डी क्लास में है। इसके चलते अलग से पूछताछ काउंटर नहीं खोला जा सकता है।
पंकज सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, वाराणसी