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Kushinagar News: माहवारी में साफ-सफाई जरूरी...संक्रमण और त्वचा रोग से मिलेगी निजात
Thu, 28 May 2026 02:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 28 May 2026 02:28 AM IST
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पडरौना। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हीरनही परिसर में बुधवार को माहवारी स्वच्छता दिवस का आयोजन किया गया। छात्राओं को माहवारी के समय साफ-सफाई के लिए प्रेरित किया गया।
डॉ. शिप्रा मिश्रा ने बताया कि मासिक धर्म स्वच्छता का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान सुरक्षित, स्वस्थ और गरिमापूर्ण तरीके से प्रबंधन करने में सक्षम बनाना है। यह शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा करने, समाज में व्याप्त वर्जनाओं को तोड़ने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माहवारी के दौरान उचित साफ-सफाई (जैसे- सही समय पर पैड बदलना और जननांगों की स्वच्छता) से गंभीर संक्रमण, त्वचा रोगों और प्रजनन अंगों से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।
मासिक धर्म को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और शर्म की भावना को समाप्त कर इस एक सामान्य और प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उचित स्वच्छता और सुविधाओं के अभाव में लड़कियों की पढ़ाई और महिलाओं की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिसे मासिक धर्म स्वच्छता के माध्यम से रोका जाता है।
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उन्होंने पैड को हर 4-6 घंटे पर बदलने, पैड बदलने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोने, गंदे कपड़े का उपयोग नहीं करने, पैड को खुले में न फेंकने, पौष्टिक भोजन करने और पर्याप्त पानी पीएं एवं व्यायाम व योग करने लिए छात्राओं को प्रेरित किया।
इस दौरान डॉ. विनोद सिंह, डॉ. पवन वर्मा, एएनएम मंजू भारती, एएनएम रेनू मिश्रा, प्रीति सिंह आदि मौजूद रहीं।
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डॉ. शिप्रा मिश्रा ने बताया कि मासिक धर्म स्वच्छता का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान सुरक्षित, स्वस्थ और गरिमापूर्ण तरीके से प्रबंधन करने में सक्षम बनाना है। यह शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा करने, समाज में व्याप्त वर्जनाओं को तोड़ने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माहवारी के दौरान उचित साफ-सफाई (जैसे- सही समय पर पैड बदलना और जननांगों की स्वच्छता) से गंभीर संक्रमण, त्वचा रोगों और प्रजनन अंगों से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।
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मासिक धर्म को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और शर्म की भावना को समाप्त कर इस एक सामान्य और प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उचित स्वच्छता और सुविधाओं के अभाव में लड़कियों की पढ़ाई और महिलाओं की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिसे मासिक धर्म स्वच्छता के माध्यम से रोका जाता है।
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उन्होंने पैड को हर 4-6 घंटे पर बदलने, पैड बदलने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोने, गंदे कपड़े का उपयोग नहीं करने, पैड को खुले में न फेंकने, पौष्टिक भोजन करने और पर्याप्त पानी पीएं एवं व्यायाम व योग करने लिए छात्राओं को प्रेरित किया।
इस दौरान डॉ. विनोद सिंह, डॉ. पवन वर्मा, एएनएम मंजू भारती, एएनएम रेनू मिश्रा, प्रीति सिंह आदि मौजूद रहीं।