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Kushinagar News: पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश से बढ़ने लगी गंडक, डिस्चार्ज 40 हजार क्यूसेक

Tue, 30 Jun 2026 02:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Tue, 30 Jun 2026 02:03 AM IST
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Gandak water level rising due to rainfall in hilly areas; discharge at 40,000 cusecs.
नरवाजोत बचाव कार्य के सट कर बहती गंडक नदी व परक्युपाइन भी डूबे।संवाद - फोटो : Archive
पडरौना/तमकुहीरोड। वाल्मीकि नगर बैराज से पानी छोड़े जाने से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। सोमवार को 40 हजार क्यूसेक से अधिक डिस्चार्ज से एपी और नरवाजोत बांध पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ से बचाव के अधूरे इंतजाम से लोगों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। बाढ़ खंड परियोजनाओं को पूरा करने में जुटा है। लोगों का कहना है कि यदि पानी का डिस्चार्ज बढ़ने का सिलसिला जारी रहा तो बचाव कार्य तो प्रभावित होगा ही, बंधे के किनारे करीब बीस हजार से अधिक की आबादी की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। छितौनी बंधे के तटवर्ती गांव वालों में भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
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सेवरही में नरवाजोत एक्सटेंशन से अहिरौलीदान तक लगभग साढ़े 17 किमी की लंबी नदी बहती है। बंधे की सुरक्षा के लिए जुलाई व अगस्त काफी अहम माने जाते हैं। इस महीने में हमेशा वाल्मीकि नगर बैराज से गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है। यह डिस्चार्ज छह लाख क्यूसेक से भी अधिक हो जाता है। पिछले साल चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया था।
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बाढ़ के खतरे से बचाने व बंधे की सुरक्षा केलिए इस साल शासन ने 32.71 करोड़ की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसमें नरवाजोत बांध के लिए दो और एपी बांध के लिए एक परियोजना शामिल है। जून बीतने वाला है, इसके बावजूद परियोजनाएंं अधूरी पड़ी हैं। वाल्मीकि नगर बैराज से पानी छोड़े जाने से लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। लोगों का कहना है कि जैसे-जैसे यह डिस्चार्ज बढ़ेगा, पिपराघाट, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया से लेकर अहिरौलीदान तक नदी का दबाव तटबंधों पर बढ़ता जाएगा।
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क्षेत्र के पुजारी सिंह, बुटाई निषाद, प्रभुनाथ यादव, दिनेश जायसवाल, गौतम सिंह आदि का कहना है कि जून तक परियोजनाएं पूरी नहीं होना बांध और बांध के किनारे बसी आबादी पर खतरे की घंटी है। यदि डिस्चार्ज बढ़ता है तो यह बांध की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। गंडक का जलस्तर बढ़ने से पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। इन लोगों ने विभाग से परियोजनाओं का शीघ्र कार्य पूरा कराने की मांग की है। इस संबंध में बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह का कहना है कि बचाव कार्य जारी है और खतरे से निपटने के लिए तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
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बंधे के पास से सटकर बह रही नदी
इस समय नरवाजोत, जवही दयाल, कट इन वन से कट इन टू तक, विरवट कोन्हवलिया, नोनिया पट्टी, खैरखुटा, कचहरी टोला, डीह टोला सहित अन्य कई स्थानों पर नदी बांध के पास से बह रही है। यदि डिस्चार्ज दो लाख क्यूसेक से अधिक होता है तो ये संवेदनशील जगह खतरे के जद में आ सकते हैं। बाढ़ खंड कुशीनगर के एक्सईएन एमके सिंह व बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह ने सोमवार को नरवाजोत बांध व एपी बांध की तीनों परियोजनाओं का निरीक्षण किया और कार्य की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही बाढ़ के खतरे के प्रति अलर्ट रहने की हिदायत के साथ ठेकेदारों एवं अभियंताओं को बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस दौरान जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील यादव, जेई विनोद शर्मा, जेई रामचंद्र प्रसाद, जेई अभिजीत सिंह, जेई अजीत सिंह भी साथ रहे।
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-बंधे पर बने रेेनकट को ठीक कराने के लिए निर्देश दिया गया है। बारिश के बाद बंधे का निरीक्षण किया गया। अधूरे परियोजनाओं काे पूरा करने का निर्देश दिया गया है। बंधों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। बाढ़ से बचाव के लिए अधूरे इंतजाम को पूरा किया जा रहा है। नदी के पानी में बढ़ोत्तरी हो रही है। एमके सिंह, एक्सईएन बाढ़खंड कुशीनगर
छितौनी तटबंध पर पुनर्स्थापना कार्य को लेकर ग्रामीणों का हंगामा

खड्डा। छितौनी तटबंध पर चल रहे पुनर्स्थापना कार्य को लेकर मंगलवार को भैसहा गांव के कुछ महिला-पुरुष और बच्चों ने मौके पर पहुंचकर विरोध जताया और कुछ देर तक हंगामा किया। ग्रामीणों ने कार्य की धीमी गति और मानक के विपरीत निर्माण को लेकर नाराजगी व्यक्त की।




भैसहा गांव के बाजार टोला (दलित बस्ती) के लोगों का आरोप है कि नदी में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन तटबंध का मरम्मत कार्य अब तक पूरा नहीं किया गया है। उनका कहना था कि यदि अचानक बाढ़ की स्थिति बनती है तो अधूरे तटबंध को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे गांव पर खतरा बढ़ जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे तटबंध की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विरोध के चलते कुछ देर के लिए कार्य बाधित हो गया। मौके पर मौजूद अभियंताओं ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया, जिसके बाद पुनर्स्थापना कार्य दोबारा शुरू करा दिया गया।

नरवाजोत बचाव कार्य के सट कर बहती गंडक नदी व परक्युपाइन भी डूबे।संवाद

नरवाजोत बचाव कार्य के सट कर बहती गंडक नदी व परक्युपाइन भी डूबे।संवाद- फोटो : Archive

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