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गंडक में छोड़ा गया चार लाख क्यूसेक पानी गांवों में घुसा

Fri, 27 Aug 2021 10:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 27 Aug 2021 10:42 PM IST
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Four lakh cusecs of water released in Gandak entered villages
तमकुही विकास खंड के डिबनी बंजरवा जूनियर हाई स्कूल के मुख्य गेट पर भरा बारिश की पानी।संवाद। पानी।? - फोटो : KUSHINAGAR
गंडक में छोड़ा गया चार लाख क्यूसेक पानी गांवों में घुसा
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डीएम ने पैदल और ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लिया
खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है गंडक नदी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। नेपाल की पहाड़ियों में तीन दिन से हो रही रूक-रूककर हो रही बारिश के कारण गंडक नदी में शुक्रवार की सुबह आठ बजे वाल्मीकिनगर बैराज से चार लाख चार हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी छोड़े जाने के बाद जिले में बाढ़ के हालात उत्पन्न हो गए हैं। गंडक नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। इसके चलते खड्डा क्षेत्र के महदेवा, सालिकपुर सहित अनेक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। घरों में सांप-बिच्छू के घुसने का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में बाढ़पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। डीएम ने एसडीएम व अन्य अफसरों के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों में ट्रैक्टर से पहुंचकर जायजा लिया। इसके अलावा बाढ़ पीड़ितों तक पैदल पहुंचकर उनका हाल जाने। क्षेत्रीय विधायक जटाशंकर त्रिपाठी भी बाढ़ से बचाव के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किए। यही हाल तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में भी उत्पन्न होने लगे हैं। कई पुरवे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। क्षेत्रीय विधायक जटाशंकर त्रिपाठी, डीएम एस. राजलिंगम, एसडीएम अरविंद कुमार ने बाढ़ प्रभावित लोगों को आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन आपके साथ खड़ा है। किसी को भूखा नहीं सोने दिया जाएगा।
बाढ़ से 25 हजार की आबादी प्रभावित
खड्डा। गंडक नदी में वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़ा गया पानी खड्डा तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में घुस गया है। लगभग 25 हजार लोग प्रभावित हैं। इसकी सूचना मिलने पर डीएम ने महदेवा गांव में जाकर लोगों का हाल जाना। एसडीएम की अगुवाई में बाढ़ प्रभावित लोगों में भोजन, दवा, वितरण किया जा रहा है। महदेवा गांव के कुछ लोगों को गांव से निकालकर सालिकपुर चौकी के पास पहुंचाया गया है। गंडक नदी का जलस्तर दोपहर 12 बजे भैसहां गेज स्थल पर खतरे के निशान के बेहद करीब 95.95 मीटर थी। वह खतरे के बिंदु से पांच सेंटीमीटर नीचे था। दोपहर दो बजे डिस्चार्ज में कमी आई और तीन लाख 47 हजार 400 क्यूसेक हो गया था। दोपहर 12 बजे से दो बजे तक भैंसहां गेजस्थल पर जलस्तर 95.95 मीटर पर स्थिर था।
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गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, मरचहवा, बसंतपुर, महदेवा, सालिकपुर आदि गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। शिवपुर गांव में पुलिस चौकी सहित अधिकांश घरों व सड़कों पर बाढ़ का पानी भर गया है। इन गांवों को आपस में जोड़ने वाली सड़क डूब गई है। इसके साथ ही सोहगीबरवा को जाने वाली सड़कें जलमग्न हैं। मरचहवा के तीन टोले व बसंतपुर गांव पूरी तरह प्रभावित है। लोगों को नाव से आना जाना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान मरचहवा इजहार अंसारी, गणेश, अनिल, नरेश और ठाकुर आदि ने बताया कि बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। लोग अपने कीमती सामान व अनाज को चौकी और मचान पर रखकर सुरक्षित किए हैं। आने जाने के लिए नाव ही सहारा है।
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गांव के करीब हो रही कटान
क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित महदेवा गांव उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाली एनएच-727 के सटे बसा है। महदेवा गांव के पास लगातार हो रही कटान के चलते नदी गांव के करीब पहुंच गई है। जलस्तर बढ़ते ही महदेवा व सालिकपुर दोनों गांवों में पानी भर गया है। सालिकपुर गांव के विद्यालय में कमर भर पानी भरा हुआ है। सालिकपुर पुलिस चौकी के पास से गांव में जाने वाली सड़क पूरी तरह डूब गई है। गांव में पहुंचे डीएम ने बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। एसडीएम ने लाउडस्पीकर से लोगों को सूचित करते हुए बाढ़ शरणालय में जाने की अपील की। गांववाले मवेशी और बच्चों के साथ सड़क पर शरण लिए हैं।
बाढ़ में फंसे पिकेट के पुलिसकर्मी
महदेवा गांव से सटे बिहार के बगहां अनुमंडल के सेमरा लबेदहा पंचायत का कांटी टोला आबाद है। यहां पर बिहार की पुलिस चौकी स्थापित है। बाढ़ आने से चौकी में पानी घुस गया है। इसके बाद पुलिसकर्मियों को नाव से लगभग दो किलोमीटर सफर कर सालिकपुर लाया गया। यहां से वह श्रीपतनगर गांव में पहुंचकर शरण लिए हैं।
बाढ़ पीड़ितों में बांटी राहत सामग्री
कैंप कर रहे एसडीएम अरविंद कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के सुरक्षा व भोजन की व्यवस्था की गई है। लंच पैकेट व दवा का वितरण कराया जा रहा है। एसडीआरएफ की टीम तैनात की जा रही है। बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। बसंतपुर, मरचहवा आदि गांवों में बिजली आपूर्ति ठप होने के चलते किरासिन की व्यवस्था की जा रही है।
पिपराघाट गांव के कई पुरवे बाढ़ में घिरे
तमकुहीरोड। गंडक नदी में पानी बढ़ने से एक बार फिर पिपराघाट के निचले हिस्सों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर बैराज से पानी छोड़ने के कारण गंडक और बांसी नदी में उफान की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शुक्रवार को पिपराघाट के दहारी टोला, तवकल टोला, उपाध्याय टोला, देवनारायन टोला, मोतीराय टोला, भंगी टोला, चौकी टोला, शिव टोला, इमिलिया टोला, जोगनी, बुटन टोला, हनुमान टोला, नरवा टोला और परसा उर्फ सिरसिया के मुसहरी टोला सहित कई पुरवे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर से सैकड़ों एकड़ में बोई गई धान व गन्ने की फसल पानी में डूब गई है। शिव टोला, मुसहरी टोला, उपाध्याय टोला, देवनारायन टोला और इमिलिया टोला जाने वाली सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया है। इससे लोगों को अपने घरों तक आने जाने में दिक्कत हो रही हैं। जिला पंचायत सदस्य सुधीर कुमार, पुजारी सिंह, ध्रुव निषाद, पुष्कर गिरि, प्रभुनाथ यादव, ग्राम प्रधान रामाजी निषाद, राजकुमार, शिवपूजन निषाद, आदित्य यादव और संजय सिंह आदि को आशंका है कि छोड़ा गया पानी जब शनिवार को उनके क्षेत्र में पहुंचेगा तो स्थिति और खराब हो सकती है। पिपराघाट के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसकर लोगों की दिक्कतें बढ़ा सकता है। संभावित बाढ़ की आशंका को देखते हुए इन लोगों ने तमकुहीराज तहसील प्रशासन से बाढ़ राहत कार्य शुरू कराए जाने और नावों का समुचित प्रबंध कराए जाने की मांग की है। एसडीएम एआर फारुखी का कहना है कि बाढ़ के हालात पर नजर रखी जा रही है। सभी राजस्वकर्मियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है।
एपी और नरवाजोत बांध पर बढ़ा दबाव
तमकुहीरोड। वाल्मीकिनगर बैराज से शुक्रवार को चार लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद एपी बांध और नरवाजोत बांध पर नदी का दबाव बढ़ने लगा है। इससे बांध के किनारे बसे गांवों के लोगों में बेचैनी है। एपी बांध के जंगलीपट्टी, बिनटोली, घघवा जगदीश, चैनपट्टी, जवही दयाल, ततवा टोला, विरवट कोंहवलिया, बाकखास, बाघाचौर, नोनियापट्टी, कचहरी टोला, डीह टोला सहित अन्य कई संवेदनशील स्थानों पर कटान का खतरा बढ़ गया है। इसकी आशंका से एपी बांध के किनारे बसे गांवों के मथुरा सिंह, बृजकिशोर साहनी, बाबूलाल निषाद, कुंदन यादव, आनंद चौधरी, दीनानाथ सिंह, संजय सिंह, पप्पू सिंह आदि लोगों का कहना है कि एपी बांध के अधिकांश हिस्सों में बाढ़ बचाव का कोई कार्य नहीं कराया गया है। इससे बांधों के स्लोप व ठोकर जर्जर हो चुके हैं। बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
रेनकट से आवागमन होगा बाधित
अभी तक नहीं कराई गई है पीपी तटबंध की मरम्मत
संवाद न्यूज एजेंसी
जटहां बाजार। विशुनपुरा क्षेत्र के चिरवहिया गांव के सामने गंडक नदी के पीपी तटबंध में रेनकट हो जाने से परेशानी बढ़ गई है। इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं हुई तो आवागमन ठप हो सकता है।
यूपी से होकर पीपी तटबंध बिहार जाता है। बरसात और भारी वाहनों की आवाजाही से विशुनपुरा ब्लॉक के चिरवहिया गांव के सामने बंधे पर सड़क खराब हो गई है। लोगों का कहना है कि समय रहते अगर इसकी मरम्मत नहीं कराई गई तो आवागमन पूरी तरह ठप हो जाएगा और दिक्कत भी बढ़ सकती है।
बिहार के बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार की तरफ से कुशीनगर के बाढ़ खंड के कार्यपालक अभियंता को बांध की मरम्मत कराने को लेकर पत्र भी भेजा गया है। लोगों का कहना है कि बाढ़ बचाव संबंधी सामग्री इस बंधे के रास्ते होते बिहार के पिपरासी से मधुबनी तक भेजी जाती है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई रेनकट बन गए हैं। यह बांध एक किलोमीटर कुशीनगर में भी आता है। इस पर पक्की सड़क निर्माण के लिए कोशिश हो रही है लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हो सकी है।

अमवाखास तटबंध पर दबाव बढ़ा
बरवापट्टी। गंडक नदी में पानी के डिस्चार्ज में वृद्धि होने से अमवाखास तटबंध के किलोमीटर जीरो से किलोमीटर 8.6 तक हर बिंदु पर दबाव बढ़ गया है। बाढ़ खंड के एक्सईएन महेश कुमार सिंह ने बताया कि नदी में पानी का डिस्चार्ज बढ़ने से दबाव है, लेकिन खतरे की कोई बात नहीं है। डिस्चार्ज बढ़ने से कटान का खतरा कम हो जाता है। कर्मचारी नजर बनाए हुए हैं। संवाद
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