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Kushinagar News: चौपाल में चकबंदी के पांच वादों का हुआ निस्तारण
Wed, 25 Feb 2026 01:41 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 25 Feb 2026 01:41 AM IST
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सिरसिया दीक्षित गांव में चकबंदी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ग्राम चौपाल में उपस्थित लोग। स्र
मंसाछापर। विशुनपुरा ब्लॉक के सिरसिया दीक्षित गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मंगलवार को ग्राम चौपाल का आयोजन हुआ। इसमें चकबंदी के पांच वादों का निस्तारण किया गया।
सीओ चकबंदी रणधीर शेखर ने चौपाल के दौरान वर्षों से लंबित चकबंदी वादों की सार्वजनिक सुनवाई की। उन्होंने मौके पर पांच वादों का निस्तारण किया, जबकि कुछ मामलों को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया गया। शेष लंबित मामलों की सुनवाई की मांग लोगों ने की। कुछ किसानों ने चकबंदी कार्य में जानबूझकर देरी किए जाने का आरोप भी लगाया। ग्राम प्रधान धनंजय दीक्षित ने संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कराने की बात कही। उन्होंने पंचायत भवन, होलिका दहन स्थल, सामुदायिक भवन, बारात घर, महिला समूह भवन, खाद गड्ढा, खलिहान और देवस्थान के लिए जमीन आरक्षित न होने पर नाराजगी जताई और जल्द आरक्षण की मांग की। पुराने राजस्व अभिलेखों का मिलान कर फर्जी नाम हटाने तथा पोखरी, बंजर भूमि, सरकारी आबादी, कुआं, सड़क, पीडब्ल्यूडी मार्ग, रेलवे, नाला, नवीन परती, ड्रेन और माइनर सहित अन्य सरकारी जमीनों को चिन्हित कर सरकारी खाते में दर्ज कराने और कब्जा मुक्त कराने की मांग की गई।
इस दौरान कानूनगो यशवंत सिंह, लेखपाल अमित गोड, लेखपाल अरविंद चौरसिया, न्यायालय पेशकार आदि मौजूद रहे।
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सीओ चकबंदी रणधीर शेखर ने चौपाल के दौरान वर्षों से लंबित चकबंदी वादों की सार्वजनिक सुनवाई की। उन्होंने मौके पर पांच वादों का निस्तारण किया, जबकि कुछ मामलों को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया गया। शेष लंबित मामलों की सुनवाई की मांग लोगों ने की। कुछ किसानों ने चकबंदी कार्य में जानबूझकर देरी किए जाने का आरोप भी लगाया। ग्राम प्रधान धनंजय दीक्षित ने संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कराने की बात कही। उन्होंने पंचायत भवन, होलिका दहन स्थल, सामुदायिक भवन, बारात घर, महिला समूह भवन, खाद गड्ढा, खलिहान और देवस्थान के लिए जमीन आरक्षित न होने पर नाराजगी जताई और जल्द आरक्षण की मांग की। पुराने राजस्व अभिलेखों का मिलान कर फर्जी नाम हटाने तथा पोखरी, बंजर भूमि, सरकारी आबादी, कुआं, सड़क, पीडब्ल्यूडी मार्ग, रेलवे, नाला, नवीन परती, ड्रेन और माइनर सहित अन्य सरकारी जमीनों को चिन्हित कर सरकारी खाते में दर्ज कराने और कब्जा मुक्त कराने की मांग की गई।
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इस दौरान कानूनगो यशवंत सिंह, लेखपाल अमित गोड, लेखपाल अरविंद चौरसिया, न्यायालय पेशकार आदि मौजूद रहे।