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जारी है गंडक की कटान, लोग उजाड़ रहे खुद का मकान
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गंडक की लगातार कटान से सहमे लोग उजाड़ रहे मकान
यही हाल रहा तो एक सप्ताह में मिट जाएगा नोनियापट्टी का अस्तित्व
तमकुहीरोड। गंडक नदी की कटान जारी है। अहिरौलीदान के नोनियापट्टी में हो रही लगातार कटान और लोगों के पलायन से गांव के वजूद और एपी बांध की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण बाढ़ खंड के जरिए कराए जा रहे बचाव कार्यों को नाकाफी बता रहे हैं। इधर लोग कटान की जद में आने की आशंका से भयभीत होकर अपने ही घर उजाड़ रहे हैं।
गंडक नदी ने पिछले साल अहिरौलीदान के कचहरी टोला को निशाना बनाया था। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका था। तीन चौथाई हिस्सा नदी में विलीन हो गया था। इस बार भी नोनियापट्टी में वही स्थिति उत्पन्न हो गई है। नदी ने तीन तरफ से इस गांव को घेरे में ले लिया है। हालांकि बाढ़ खंड विभाग ईसी और जियो बैग से कटान रोकने के कोशिश कर रहा है, लेकिन कटान रुकने का नाम नहीं ले रही है। इस कटान के चलते राघव राम, अमावश राम, लालबाबू बैठा, प्रहलाद राम, जयप्रकाश, रमेश, अमेरिका, देवीलाल, चंद्रिका, धर्मनाथ, संतोष, सुकई सहित लगभग 20 से अधिक लोग अपने पक्के और कच्चे मकानों को तोड़कर गांव से पलायन कर चुके हैं। जो हैं, उनकी नीद उड़ गई है। कटान से भयभीत संजय सिंह, ललन बैठा, भगवान पासवान, जगतराम, बबलू प्रसाद, प्रदीप सिंह आदि ने बताया कि रोज बाढ़ खंड के अभियंता लाखों के ईसी और जियो बैग पानी में डलवाकर सरकारी धन की बंदरबाट में लगे हैं, लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है और कटान बदस्तूर जारी है। अगर यही स्थिति रही तो एक सप्ताह में नोनियापट्टी का वजूद मिट जाएगा। तब एपी बांध को गंडक नदी के कटान से बचाना मुश्किल हो जाएगा, जबकि बाढ़ खंड के जेई रमेशधर दूबे ने बताया कि बचाव कार्य जारी है और कटान रोकने के सभी इंतजाम किए जा रहे हैं।
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यही हाल रहा तो एक सप्ताह में मिट जाएगा नोनियापट्टी का अस्तित्व
तमकुहीरोड। गंडक नदी की कटान जारी है। अहिरौलीदान के नोनियापट्टी में हो रही लगातार कटान और लोगों के पलायन से गांव के वजूद और एपी बांध की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण बाढ़ खंड के जरिए कराए जा रहे बचाव कार्यों को नाकाफी बता रहे हैं। इधर लोग कटान की जद में आने की आशंका से भयभीत होकर अपने ही घर उजाड़ रहे हैं।
गंडक नदी ने पिछले साल अहिरौलीदान के कचहरी टोला को निशाना बनाया था। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका था। तीन चौथाई हिस्सा नदी में विलीन हो गया था। इस बार भी नोनियापट्टी में वही स्थिति उत्पन्न हो गई है। नदी ने तीन तरफ से इस गांव को घेरे में ले लिया है। हालांकि बाढ़ खंड विभाग ईसी और जियो बैग से कटान रोकने के कोशिश कर रहा है, लेकिन कटान रुकने का नाम नहीं ले रही है। इस कटान के चलते राघव राम, अमावश राम, लालबाबू बैठा, प्रहलाद राम, जयप्रकाश, रमेश, अमेरिका, देवीलाल, चंद्रिका, धर्मनाथ, संतोष, सुकई सहित लगभग 20 से अधिक लोग अपने पक्के और कच्चे मकानों को तोड़कर गांव से पलायन कर चुके हैं। जो हैं, उनकी नीद उड़ गई है। कटान से भयभीत संजय सिंह, ललन बैठा, भगवान पासवान, जगतराम, बबलू प्रसाद, प्रदीप सिंह आदि ने बताया कि रोज बाढ़ खंड के अभियंता लाखों के ईसी और जियो बैग पानी में डलवाकर सरकारी धन की बंदरबाट में लगे हैं, लेकिन प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है और कटान बदस्तूर जारी है। अगर यही स्थिति रही तो एक सप्ताह में नोनियापट्टी का वजूद मिट जाएगा। तब एपी बांध को गंडक नदी के कटान से बचाना मुश्किल हो जाएगा, जबकि बाढ़ खंड के जेई रमेशधर दूबे ने बताया कि बचाव कार्य जारी है और कटान रोकने के सभी इंतजाम किए जा रहे हैं।
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