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इंसेफेलाइटिस से बच्ची की मौत
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Wed, 23 Dec 2015 11:51 PM IST
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पिपरा बाजार। विशुनपुरा ब्लॉक के सरपतही खुर्द गांव में एक माह में इंसेफेलाइटिस के कारण चार बच्चों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को चार वर्षीया सांवली ने मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई।
गांव के लोग बच्चों की मौत से लोग फिक्रमंद हैं, डॉक्टर बीमारी की वजह गांव में फैली गंदगी बता रहे हैं। सरपतही खुर्द गांव के सिंहासन की बेटी सांवली की तबीयत पांच दिनों से खराब थी। घरवालों ने पहले स्थानीय स्तर पर ही इलाज कराया और सोमवार को उसे जिला अस्पताल ले गए।
वहां डॉक्टर ने सांवली की स्थिति चिंताजनक देख मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। मंगलवार को दिन के लगभग तीन बजे इलाज के दौरान सांवली ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया। गांव के रामवृक्ष, गेंना, सूरजन, मिश्री, सत्तन आदि कहते हैं कि एक महीने के अंतराल में गांव के रमेश की पांच वर्षीया बेटी प्रीति, रविप्रसाद का छह वर्षीय बेटा बबलू और रामभवन के तीन वर्षीय बेटे पप्पू की इंसेफेलाइटिस से जान जा चुकी है।
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रमेश सिंह और सतीश कुशवाहा के मुताबिक उन्होंने बच्चों की बीमारी के संबंध में लगभग दो सप्ताह पूर्व सीएमओ को लिखित रूप से सूचना दी थी। प्रार्थनापत्र में डॉक्टर का विशेष दल भेजने और गांव की सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराए जाने का आग्रह किया गया था।
इसके बावजूद कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। गांववालों का कहना है कि डॉक्टर बीमारी की वजह गंदगी बताते हैं, जबकि गांव में तैनात सफाई कर्मचारी आते ही नहीं।
किसी मासूम की मौत की खबर के बाद हेल्थ टीम आती भी है तो ठोस कार्रवाई की बजाय जांच और दवाओं का वितरण भी औपचारिक किया जाता है। इस संबंध में सीएमओ डॉक्टर अखिलेश कुमार का कहना है कि शीघ्र हेल्थ टीम भेजी जाएगी। गांवों में सफाई कर्मचारियों की लापरवाही के विषय में डीपीआरओ से कई बार बताया जा चुका है।
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गांव के लोग बच्चों की मौत से लोग फिक्रमंद हैं, डॉक्टर बीमारी की वजह गांव में फैली गंदगी बता रहे हैं। सरपतही खुर्द गांव के सिंहासन की बेटी सांवली की तबीयत पांच दिनों से खराब थी। घरवालों ने पहले स्थानीय स्तर पर ही इलाज कराया और सोमवार को उसे जिला अस्पताल ले गए।
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वहां डॉक्टर ने सांवली की स्थिति चिंताजनक देख मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। मंगलवार को दिन के लगभग तीन बजे इलाज के दौरान सांवली ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया। गांव के रामवृक्ष, गेंना, सूरजन, मिश्री, सत्तन आदि कहते हैं कि एक महीने के अंतराल में गांव के रमेश की पांच वर्षीया बेटी प्रीति, रविप्रसाद का छह वर्षीय बेटा बबलू और रामभवन के तीन वर्षीय बेटे पप्पू की इंसेफेलाइटिस से जान जा चुकी है।
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रमेश सिंह और सतीश कुशवाहा के मुताबिक उन्होंने बच्चों की बीमारी के संबंध में लगभग दो सप्ताह पूर्व सीएमओ को लिखित रूप से सूचना दी थी। प्रार्थनापत्र में डॉक्टर का विशेष दल भेजने और गांव की सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराए जाने का आग्रह किया गया था।
इसके बावजूद कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। गांववालों का कहना है कि डॉक्टर बीमारी की वजह गंदगी बताते हैं, जबकि गांव में तैनात सफाई कर्मचारी आते ही नहीं।
किसी मासूम की मौत की खबर के बाद हेल्थ टीम आती भी है तो ठोस कार्रवाई की बजाय जांच और दवाओं का वितरण भी औपचारिक किया जाता है। इस संबंध में सीएमओ डॉक्टर अखिलेश कुमार का कहना है कि शीघ्र हेल्थ टीम भेजी जाएगी। गांवों में सफाई कर्मचारियों की लापरवाही के विषय में डीपीआरओ से कई बार बताया जा चुका है।