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Kushinagar News: श्रद्धालुओं ने नारायणी में लगाई डुबकी
Sun, 13 Apr 2025 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 13 Apr 2025 01:17 AM IST
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भैसहा घाट पर गंडक नदी में स्नान करते श्रद्धालु।संवाद
खड्डा। चैत्रवरणी पर्व पर शनिवार को क्षेत्र के भैसहां स्थित नारायणी घाट पर श्रद्धालुओं ने नदी में स्नान कर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। इस दौरान नदी घाट पर मेला भी लगा।
चैत्र पूर्णिमा पर शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु गंडक नदी में स्नान करने लगे। इसके बाद कड़ाही चढ़ाकर अपने परिवार के सुख की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने यहां मुंडन सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया। इस दौरान नदी घाट पर मेला लगा रहा, जहां लोगों ने बच्चे और परिवार के लोगों के साथ मेला का लुफ्त उठाया।
नेपाल व बिहार से भी पहुंचे श्रद्धालु : खड्डा। क्षेत्र के भैंसही घाट पर बिहार और नेपाल तक के श्रद्धालु आते हैं। मेला में नेपाल के नवल परासी और पालपा आदि जगहों से आए गौतम श्रेष्ठ, सुमित्रा श्रेष्ठ, किशोर गुरूंग, रामचंद्र उपाध्याय और देवरिया से आए महंत कुशवाहा, मालती देवी, नंदनी, बालेश्वर, बगहा से आए बृजकिशोर शाह, नथुनी प्रसाद, लक्ष्मण उरांव, गोपालगंज के विश्वनाथ महतो, केसरी महतो, जयप्रकाश विश्वकर्मा, गोरखपुर के सुरेश दास, जयंती देवी, सुखराजी आदि बताया कि मन्नत मांगी थी, जो पूरी हो गई। यह सब मां नारायणी व दुर्गा की महिमा है।
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चैत्र पूर्णिमा पर शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु गंडक नदी में स्नान करने लगे। इसके बाद कड़ाही चढ़ाकर अपने परिवार के सुख की कामना की। कई श्रद्धालुओं ने यहां मुंडन सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया। इस दौरान नदी घाट पर मेला लगा रहा, जहां लोगों ने बच्चे और परिवार के लोगों के साथ मेला का लुफ्त उठाया।
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नेपाल व बिहार से भी पहुंचे श्रद्धालु : खड्डा। क्षेत्र के भैंसही घाट पर बिहार और नेपाल तक के श्रद्धालु आते हैं। मेला में नेपाल के नवल परासी और पालपा आदि जगहों से आए गौतम श्रेष्ठ, सुमित्रा श्रेष्ठ, किशोर गुरूंग, रामचंद्र उपाध्याय और देवरिया से आए महंत कुशवाहा, मालती देवी, नंदनी, बालेश्वर, बगहा से आए बृजकिशोर शाह, नथुनी प्रसाद, लक्ष्मण उरांव, गोपालगंज के विश्वनाथ महतो, केसरी महतो, जयप्रकाश विश्वकर्मा, गोरखपुर के सुरेश दास, जयंती देवी, सुखराजी आदि बताया कि मन्नत मांगी थी, जो पूरी हो गई। यह सब मां नारायणी व दुर्गा की महिमा है।
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