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Kushinagar News: करोड़ों भरपूर फिर भी पनियहवा-छितौनी-तमकुही रेल परियोजना की रफ्तार सुस्त
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तमकुहीरोड स्टेशन, जहां परियोजना को जुड़ना है।संवाद
- फोटो : samvad
खड्डा/तमकुहीरोड। करोड़ों रुपये का बजट जारी होने के बावजूद बहुप्रतीक्षित पनियहवा-छितौनी-तमकुहीरोड रेल परियोजना रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। रेलवे की ओर से 477.60 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी होने और टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी निर्माण कार्य ठप है। पनियहवा से छितौनी के बीच बिछाई जाने वाली प्रस्तावित रेल लाइन के हिस्से में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं। बताया जा रहा है कि मुआवजा वितरण में सुस्ती से परियोजना मेंं देरी हो रही है। यूपी और बिहार के सीमावर्ती ग्रामीणों की रेलवे ट्रैक से जुड़ने की उम्मीद पूरी होने में समय लगेगा।
पनियहवा-छितौनी-तमकुहीरोड परियोजना की कुल लंबाई 67.96 किलोमीटर है। यह परियोजना 895 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो चरणों में पूरी की जानी है। परियोजना के पहले चरण में पनियहवा-छितौनी से मधुबनी (बिहार) तक लगभग 28.35 किमी रेल लाइन का काम होना है। सिविल, सिग्नलिंग और विद्युतीकरण कार्य का टेंडर 24 महीने की कार्यावधि के साथ हो चुका है। दूसरे चरण में मधुबनी से तमकुही तक 35.84 किमी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। पनियहवा से छितौनी के बीच पूर्व में बने ट्रैक को नए सिरे से तैयार करने के लिए कुछ जगहों पर स्लीपर रखे गए थे लेकिन अचानक काम बंद कर दिया गया।
रेल परियोजना के लिए बिहार प्रांत के पिपरासी (नैनहा सरेह) व धनहा के अधिकतर गांवों में मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है, लेकिन कुशीनगर में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सुस्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन के रुचि न लेने के कारण जमीन के हस्तांतरण में देरी हो रही है। इससे ठेकेदार काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। मुकेश वर्मा, मनीष रौनियार, सुनील कुमार वर्मा, गोविंद सिंह, अभिषेक शुक्ला आदि ने भी कार्य में तेजी लाने की मांग की है।
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कोट:-
तमकुहीरोड-छितौनी रेल मार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि की जद में आए किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है। सभी किसानों को मुआवजा वितरित होने के बाद परियोजना का कार्य तेज दिखेगा। -वैभव मिश्र, एडीएम, कुशीनगर।
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रेल परियोजना को लेकर बोले लोग
18 साल के लंबे इंतजार और बजट मिलने के बाद पनियहवा-छितौनी-तमकुही रेल परियोजना के जल्द पूरा होने की आस जगी थी लेकिन मौके की स्थिति निराशाजनक है। प्रशासन को जल्द मुआवजा दिलाकर निर्माण शुरू कराना चाहिए। -हरिशंकर गुप्ता, छितौनी
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रेल लाइन बनने से दोनों राज्यों के बीच आवागमन और व्यापार बढ़ेगा। यह परियोजना दियारा क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि से सीधी जुड़ी है। इसलिए रफ्तार दिलाने के लिए प्रशासन को कार्रवाई तेज करने की जरूरत है। -दिनेश पांडेय,मंझरिया
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2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने रखी थी आधारशिला
इस रेल परियोजना को वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने यूपी-बिहार के बाढ़ प्रभावित दियारा क्षेत्र के विकास के लिए इस 67.96 किमी लंबी रेल लाइन की आधारशिला रखी थी। परियोजना के तहत छितौनी और तमकुहीरोड के बीच जटहा, मधुबनी, धनहा, खैरा टोला में नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण, 35.70 लाख घन मीटर मिट्टी का कार्य, 10 बड़े पुल और 47 छोटे पुल बनाए जाने हैं। इस परियोजना के लिए 17 सालों तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद वर्ष 2024 के बजट में 10 करोड़ और 2025-26 के बजट में 477 करोड़ रुपये का आवंटन कर इसे पुनर्जीवित किया गया। तमकुही क्षेत्र के सुनील कुमार वर्मा, गोविंद सिंह, अभिषेक शुक्ल, राहुल सोनी, विनोद कुमार ने कहा कि लाइन के बनने से दियारा क्षेत्र को हर साल गंडक नदी की तबाही और भीषण बाढ़ से भी सुरक्षा मिलेगी। दियरा क्षेत्र में आवागमन की सुविधा हो जाने से रोजगार व विकास को गति मिलेगी।
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पनियहवा-छितौनी-तमकुहीरोड परियोजना की कुल लंबाई 67.96 किलोमीटर है। यह परियोजना 895 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो चरणों में पूरी की जानी है। परियोजना के पहले चरण में पनियहवा-छितौनी से मधुबनी (बिहार) तक लगभग 28.35 किमी रेल लाइन का काम होना है। सिविल, सिग्नलिंग और विद्युतीकरण कार्य का टेंडर 24 महीने की कार्यावधि के साथ हो चुका है। दूसरे चरण में मधुबनी से तमकुही तक 35.84 किमी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। पनियहवा से छितौनी के बीच पूर्व में बने ट्रैक को नए सिरे से तैयार करने के लिए कुछ जगहों पर स्लीपर रखे गए थे लेकिन अचानक काम बंद कर दिया गया।
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रेल परियोजना के लिए बिहार प्रांत के पिपरासी (नैनहा सरेह) व धनहा के अधिकतर गांवों में मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है, लेकिन कुशीनगर में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सुस्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन के रुचि न लेने के कारण जमीन के हस्तांतरण में देरी हो रही है। इससे ठेकेदार काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं। मुकेश वर्मा, मनीष रौनियार, सुनील कुमार वर्मा, गोविंद सिंह, अभिषेक शुक्ला आदि ने भी कार्य में तेजी लाने की मांग की है।
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कोट:-
तमकुहीरोड-छितौनी रेल मार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि की जद में आए किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है। सभी किसानों को मुआवजा वितरित होने के बाद परियोजना का कार्य तेज दिखेगा। -वैभव मिश्र, एडीएम, कुशीनगर।
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रेल परियोजना को लेकर बोले लोग
18 साल के लंबे इंतजार और बजट मिलने के बाद पनियहवा-छितौनी-तमकुही रेल परियोजना के जल्द पूरा होने की आस जगी थी लेकिन मौके की स्थिति निराशाजनक है। प्रशासन को जल्द मुआवजा दिलाकर निर्माण शुरू कराना चाहिए। -हरिशंकर गुप्ता, छितौनी
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रेल लाइन बनने से दोनों राज्यों के बीच आवागमन और व्यापार बढ़ेगा। यह परियोजना दियारा क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि से सीधी जुड़ी है। इसलिए रफ्तार दिलाने के लिए प्रशासन को कार्रवाई तेज करने की जरूरत है। -दिनेश पांडेय,मंझरिया
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2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने रखी थी आधारशिला
इस रेल परियोजना को वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने यूपी-बिहार के बाढ़ प्रभावित दियारा क्षेत्र के विकास के लिए इस 67.96 किमी लंबी रेल लाइन की आधारशिला रखी थी। परियोजना के तहत छितौनी और तमकुहीरोड के बीच जटहा, मधुबनी, धनहा, खैरा टोला में नए रेलवे स्टेशनों का निर्माण, 35.70 लाख घन मीटर मिट्टी का कार्य, 10 बड़े पुल और 47 छोटे पुल बनाए जाने हैं। इस परियोजना के लिए 17 सालों तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद वर्ष 2024 के बजट में 10 करोड़ और 2025-26 के बजट में 477 करोड़ रुपये का आवंटन कर इसे पुनर्जीवित किया गया। तमकुही क्षेत्र के सुनील कुमार वर्मा, गोविंद सिंह, अभिषेक शुक्ल, राहुल सोनी, विनोद कुमार ने कहा कि लाइन के बनने से दियारा क्षेत्र को हर साल गंडक नदी की तबाही और भीषण बाढ़ से भी सुरक्षा मिलेगी। दियरा क्षेत्र में आवागमन की सुविधा हो जाने से रोजगार व विकास को गति मिलेगी।