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महिलाआें और बच्चाें में पुलिस का खौफ
कुशीनगर
Updated Sat, 26 Mar 2016 11:05 PM IST
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रामकोला क्षेत्र के खोटहीं गांव में पुलिस की कार्रवाई के भय से लोगों के पलायन करने से कई घरों पर ताला लगा रहा और गांव में सन्नाटा छाया रहा। गांव में कई घरों में चूल्हे भी नहीं जले।
- फोटो : अमर उजाला
रामकोला। होली के दिन रामकोला क्षेत्र के खोटहीं में दो पक्षों में मारपीट के बाद पुलिस के साथ भी संघर्ष हो गया था। उस घटना में एसओ और एक अन्य व्यक्ति की तरफ से तहरीर देने के बाद पुलिस ने 550 लोगों पर केस दर्ज किया था।
इनमें आधे से अधिक लोगों पर हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है। पुलिस पकड़कर थाने न लेती जाए, इस भय से गांव के पुरुष तो घर छोड़ दिए हैं, महिलाआें और बच्चाें पर भी पुलिस की कार्रवाई का भय दिख रहा था।
न दुकानें खुलीं और न ही पशुपालक मवेशियाें के लिए चारा ला सके। महिलाआें और बच्चों के चेहरे पर पुलिस का भय साफ तौर पर दिख रहा था। कई घरों में चूल्हे नहीं जले। इस मामले में आरोपी बनाए गए प्रधान के घर पर भी ताला लटकता रहा है।
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गांव की प्रधान किरन साहनी के जेठ ओमप्रकाश साहनी का निर्भया गांव में महाविद्यालय है। महाविद्यालय के आगे रवींद्र खटिक ने अपनी जमीन बताकर कब्जा कर रखा है। इसे लेकर दोनाें पक्षों में कई बार मारपीट हो चुकी है। दोनों तरफ से मुकदमा भी दर्ज है। होली के दिन शाम के समय ओमप्रकाश साहनी और रवींद्र खटिक के बीच विवाद हो गया था।
उनके बीच जमकर मारपीट हुई थी। इसमें 12 से अधिक महिलाआें सहित कई पुरुष घायल हो गए थे। मौके पर खोटहीं चौकी के इंचार्ज जगधारी प्रसाद पुलिस बल के साथ पहुंचे, उनके सामने भी दोनों पक्षाें में मारपीट होती रही।
एसओ सौदागर राय भी पुलिस बल के साथ पहुंचे, जहां मारपीट हुई। नेबुआ नौरंगिया थाने की गाड़ी का शीशा टूट गया। पुलिस ने रवींद्र खटिक और एसओ ने वादी बनकर दो मुकदमे दर्ज कराए, जिसमें हत्या के प्रयास सहित गंभीर मामले दर्ज हुए। उसके बाद पुलिस ने दबिश की कार्रवाई शुरू की।
पुरुष गांव से पलायित होते गए। प्रधान के घर भी ताला लग गया। अन्य टोलाें में भी पुलिस की कार्रवाई के भय से लोगाें ने घर छोड़ दिया। देवीपुर की रहने वाली देवंती, मालती, लाची, कौशिल्या ने कहा विवाद के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए।
निर्दोष लोगाें के ऊपर कार्रवाई नाइंसाफी है। खोटहीं के खैरटिया, देवीपुर, फ कीराछपरा, धोबिया टोले के लोग पुलिस के भय से घर छोड़कर चले गए हैं। दरवाजे पर बांधे गए पशु चारा न मिलने से छटपटाते रहे।
खोटहीं की जिला पंचायत सदस्य अर्चना चौधरी ने घटना की निंदा की। उनका भी कहना था कि पुलिस को दोषियाें के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए, न कि निर्दोषों को प्रताड़ित किया जाए।
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इनमें आधे से अधिक लोगों पर हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है। पुलिस पकड़कर थाने न लेती जाए, इस भय से गांव के पुरुष तो घर छोड़ दिए हैं, महिलाआें और बच्चाें पर भी पुलिस की कार्रवाई का भय दिख रहा था।
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न दुकानें खुलीं और न ही पशुपालक मवेशियाें के लिए चारा ला सके। महिलाआें और बच्चों के चेहरे पर पुलिस का भय साफ तौर पर दिख रहा था। कई घरों में चूल्हे नहीं जले। इस मामले में आरोपी बनाए गए प्रधान के घर पर भी ताला लटकता रहा है।
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गांव की प्रधान किरन साहनी के जेठ ओमप्रकाश साहनी का निर्भया गांव में महाविद्यालय है। महाविद्यालय के आगे रवींद्र खटिक ने अपनी जमीन बताकर कब्जा कर रखा है। इसे लेकर दोनाें पक्षों में कई बार मारपीट हो चुकी है। दोनों तरफ से मुकदमा भी दर्ज है। होली के दिन शाम के समय ओमप्रकाश साहनी और रवींद्र खटिक के बीच विवाद हो गया था।
उनके बीच जमकर मारपीट हुई थी। इसमें 12 से अधिक महिलाआें सहित कई पुरुष घायल हो गए थे। मौके पर खोटहीं चौकी के इंचार्ज जगधारी प्रसाद पुलिस बल के साथ पहुंचे, उनके सामने भी दोनों पक्षाें में मारपीट होती रही।
एसओ सौदागर राय भी पुलिस बल के साथ पहुंचे, जहां मारपीट हुई। नेबुआ नौरंगिया थाने की गाड़ी का शीशा टूट गया। पुलिस ने रवींद्र खटिक और एसओ ने वादी बनकर दो मुकदमे दर्ज कराए, जिसमें हत्या के प्रयास सहित गंभीर मामले दर्ज हुए। उसके बाद पुलिस ने दबिश की कार्रवाई शुरू की।
पुरुष गांव से पलायित होते गए। प्रधान के घर भी ताला लग गया। अन्य टोलाें में भी पुलिस की कार्रवाई के भय से लोगाें ने घर छोड़ दिया। देवीपुर की रहने वाली देवंती, मालती, लाची, कौशिल्या ने कहा विवाद के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करना चाहिए।
निर्दोष लोगाें के ऊपर कार्रवाई नाइंसाफी है। खोटहीं के खैरटिया, देवीपुर, फ कीराछपरा, धोबिया टोले के लोग पुलिस के भय से घर छोड़कर चले गए हैं। दरवाजे पर बांधे गए पशु चारा न मिलने से छटपटाते रहे।
खोटहीं की जिला पंचायत सदस्य अर्चना चौधरी ने घटना की निंदा की। उनका भी कहना था कि पुलिस को दोषियाें के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए, न कि निर्दोषों को प्रताड़ित किया जाए।