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हियुवा ने प्रदर्शनकर ज्ञापनदिया
kushinagar
Updated Tue, 30 Aug 2016 11:14 PM IST
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ध्रना
- फोटो : santosh verma
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कप्तानगंज। सोमवार को खड्डा में हुए बवाल से नाराज हियुवा कार्यकर्ताओं ने एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार को कप्तानगंज तहसील पर विरोध प्रदर्शन करते हुए ज्ञापन सौंपा। हियुवा नेताओं ने कार्रवाई न होने पर वृहद आंदोलन की चेतावनी दी।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हियुवा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह मुन्ना ने कहा कि एसडीएम खड्डा का कृत्य घोर निंदनीय है। रिश्वत लेने के आरोपी लिपिक पर कानूनी कार्रवाई की बजाय विरोध करने वाले युवक की ही निर्मम पिटाई करना कत्तई उचित नहीं कहा जा सकता। इसके बाद भी पुलिस व प्रशासनिक अफसरों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की बजाय आम लोगों पर ही लाठीचार्ज करवा दिया। जिलाध्यक्ष ने मांग की कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
हियुवा कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार बीएन सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान तहसील अध्यक्ष बैजनाथ गुप्त, रामू राव, विशाल सिंह, रमेश मोदनवाल, विजय सिंह, विजय कन्नौजिया, मणिंद्र अग्रहरि, उमेश प्रसाद समेत तमाम लोग मौजूद थे।
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पहले भी लग चुके हैं एसडीएम पर कई आरोप
खड्डा। सोमवार को प्रमाण पत्र के लिए धनउगाही को लेकर खड्डा में हुए बवाल से पूर्व भी यहां के एसडीम पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। दो बार स्थानांतरण के बावजूद उन्हें यहां से अब तक कार्यमुक्त भी नहीं किया गया है। एसडीएम के स्थानांतरण की मांग को लेकर यहां के अधिवक्ता करीब तीन सप्ताह से कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।
मार्च 2015 में ही अस्तित्व में आई खड्डा तहसील में अरुण कुमार राय ने मई में दूसरे एसडीएम के तौर पर कार्य भार संभाला था। लंबे समय से खड्डा में तहसील की मांग कर रहे लोगों को उम्मीद थी कि राजस्व संबंधी उनकी शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उल्टा। एसडीएम के रूप में अरुण कुमार राय का कार्यकाल शुरू से ही विवादों के साए में रहा। इनके कार्यकाल के दौरान ही जमीन विवाद के एक मामले में मीरा कुशवाहा नाम की महिला ने तहसील परिसर में ही आत्मदाह का प्रयास किया। इस महिला ने एसडीएम पर कई गंभीर आरोप लगाए। बाद में एसडीएम ने इस महिला को शांति भंग की आशंका में जेल भेजा दिया। 14 दिन बाद जब जेलर ने इस मामले को लेकर पत्र लिखा तब जाकर मीरा कुशवाहा को जमानत मिली। इसके अलावा बुजुर्ग सोमारी को भी जमीन संबंधी मामले को लेकर ही कई दिन तक तहसील परिसर में अनशन करना पड़ा। सोमारी ने तो सोमवार को बवाल के बाद खड्डा पहुंचे एडीएम रामकेवल तिवारी के सामने ही इस बात का पर्दाफाश किया कि सही काम के लिए भी उसे खेत गिरवी रखकर 50 हजार और भैंस बेचकर 20 हजार रुपये रिश्वत देनी पड़ी थी। इसके अलावा महदेवा गांव की एक महिला ने भी तहसील परिसर में ही आत्मदाह का प्रयास किया था। खेमन छपरा गांव की शोभा देवी समेत कई अन्य लोग भी तहसील प्रशासन पर रिश्वत लेने समेत कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं। खड्डा तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ता तो बीते छह अगस्त से ही एसडीएम और पेशकार के स्थानांतरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उल्लेखनीय हैं कि अरुण कुमार राय पहले इसी जनपद में नायब तहसीलदार और तहसीलदार के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
सत्ता पक्ष पर भी लग रहा आरोप
भाजपा नेता निलेश मिश्रा, हियुवा के जिला प्रभारी अजय गोविन्द राव शिशु, राजू तुलस्यान सहित कई नेताओं ने एसडीएम अरुण कुमार की शिकायत खड्डा गए एडीएम रामकेवल तिवारी से की। इन लोगों का आरोप था कि सामान्य काम के बदले भी रुपये देने पड़ते हैं। तमाम छात्रों का प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है, इससे उनका भविष्य खतरे में है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के दबाव में ही स्थानांतरण के बाद भी एसडीएम को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है।
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कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए हियुवा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह मुन्ना ने कहा कि एसडीएम खड्डा का कृत्य घोर निंदनीय है। रिश्वत लेने के आरोपी लिपिक पर कानूनी कार्रवाई की बजाय विरोध करने वाले युवक की ही निर्मम पिटाई करना कत्तई उचित नहीं कहा जा सकता। इसके बाद भी पुलिस व प्रशासनिक अफसरों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की बजाय आम लोगों पर ही लाठीचार्ज करवा दिया। जिलाध्यक्ष ने मांग की कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
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हियुवा कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार बीएन सिंह को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान तहसील अध्यक्ष बैजनाथ गुप्त, रामू राव, विशाल सिंह, रमेश मोदनवाल, विजय सिंह, विजय कन्नौजिया, मणिंद्र अग्रहरि, उमेश प्रसाद समेत तमाम लोग मौजूद थे।
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पहले भी लग चुके हैं एसडीएम पर कई आरोप
खड्डा। सोमवार को प्रमाण पत्र के लिए धनउगाही को लेकर खड्डा में हुए बवाल से पूर्व भी यहां के एसडीम पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। दो बार स्थानांतरण के बावजूद उन्हें यहां से अब तक कार्यमुक्त भी नहीं किया गया है। एसडीएम के स्थानांतरण की मांग को लेकर यहां के अधिवक्ता करीब तीन सप्ताह से कार्य बहिष्कार कर रहे हैं।
मार्च 2015 में ही अस्तित्व में आई खड्डा तहसील में अरुण कुमार राय ने मई में दूसरे एसडीएम के तौर पर कार्य भार संभाला था। लंबे समय से खड्डा में तहसील की मांग कर रहे लोगों को उम्मीद थी कि राजस्व संबंधी उनकी शिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उल्टा। एसडीएम के रूप में अरुण कुमार राय का कार्यकाल शुरू से ही विवादों के साए में रहा। इनके कार्यकाल के दौरान ही जमीन विवाद के एक मामले में मीरा कुशवाहा नाम की महिला ने तहसील परिसर में ही आत्मदाह का प्रयास किया। इस महिला ने एसडीएम पर कई गंभीर आरोप लगाए। बाद में एसडीएम ने इस महिला को शांति भंग की आशंका में जेल भेजा दिया। 14 दिन बाद जब जेलर ने इस मामले को लेकर पत्र लिखा तब जाकर मीरा कुशवाहा को जमानत मिली। इसके अलावा बुजुर्ग सोमारी को भी जमीन संबंधी मामले को लेकर ही कई दिन तक तहसील परिसर में अनशन करना पड़ा। सोमारी ने तो सोमवार को बवाल के बाद खड्डा पहुंचे एडीएम रामकेवल तिवारी के सामने ही इस बात का पर्दाफाश किया कि सही काम के लिए भी उसे खेत गिरवी रखकर 50 हजार और भैंस बेचकर 20 हजार रुपये रिश्वत देनी पड़ी थी। इसके अलावा महदेवा गांव की एक महिला ने भी तहसील परिसर में ही आत्मदाह का प्रयास किया था। खेमन छपरा गांव की शोभा देवी समेत कई अन्य लोग भी तहसील प्रशासन पर रिश्वत लेने समेत कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं। खड्डा तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ता तो बीते छह अगस्त से ही एसडीएम और पेशकार के स्थानांतरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उल्लेखनीय हैं कि अरुण कुमार राय पहले इसी जनपद में नायब तहसीलदार और तहसीलदार के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
सत्ता पक्ष पर भी लग रहा आरोप
भाजपा नेता निलेश मिश्रा, हियुवा के जिला प्रभारी अजय गोविन्द राव शिशु, राजू तुलस्यान सहित कई नेताओं ने एसडीएम अरुण कुमार की शिकायत खड्डा गए एडीएम रामकेवल तिवारी से की। इन लोगों का आरोप था कि सामान्य काम के बदले भी रुपये देने पड़ते हैं। तमाम छात्रों का प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है, इससे उनका भविष्य खतरे में है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के दबाव में ही स्थानांतरण के बाद भी एसडीएम को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है।