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अब नहीं लौटेगी आसिफ की ‘मुस्कान’
Updated Thu, 26 Apr 2018 11:39 PM IST
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कुशीनगर के दुदही में ट्रेन दुर्घटना में मेराज और मुस्कान की मौत की सूचना के बाद विलाप करते परिजन ।
- फोटो : amar ujala
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दुुदही (पड़रौना)। रेल हादसे के बाद दुदही (मइहरवा टोले) का आसिफ गुमसुम है। अपने टोले के सहपाठियों के साथ वह भी उसी वैन से स्कूल पढ़ने जाता था जो गुुरुवार की सुबह दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में अपने सबसे खास दोस्त मुस्कान को खो देने का सदमा है तो रोज शाम को बगीचे में खेलने वाली अपने दोस्त के अब नहीं रहने का गम। बहुत कुरेदने पर बस इतना ही कहता है, अम्मी ने बताया कि अब मुस्कान खुदा के पास चली गई। इतना कहते ही वह सुबकने लगता है। यह संयोग ही था कि वैन में इस टोले के तीन और बच्चे जाते थे जो घटना के दिन सुबह ही परिवार के साथ तमकुहीराज में मस्तान के बाबा के मजार पर चादर चढ़ाने गए थे। वहीं एलकेजी में पढ़ने वाले नसीरुद़दीन के बेटे सलमान अपने साथी सेराज को देखने उसके घर पहुंचे थे। भीड़ में सेराज भी बेसुध खड़ा था। हादसे का जिक्र होते ही उसकी आंखें नम हो गईं। सलमान ने तोतली जबान में बताया कि सेराज और मुस्कान के साथ उसकी बहुत अच्छी दोस्ती थी। इतना कहते ही वह सेराज के पास ले जाने की जिद कर रोने लगा। बोला, अब किसके साथ मैं रोज शाम को खेलूंगा। यह मर्माहत करने वाला दृश्य जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं।
ट्रेन में सवार थी नुसरत, बच्चों को तड़पते देखा
नुुसरत शायद यह जख्म जीवन भर नहीं भूला पाएगी, जिन बच्चों के साथ वह रोजाना पढ़ने जाती थी उसे अपनी आंखों के सामने तड़पता देखा। दरअसल, नुसरत अपने पिता के साथ मेला देखने गई थी और स्कूल नहीं जा सकी। वह सीवान-बढ़नी पैसेंजर से घर लौट रही थी कि दुधई गांव के पहले ही हादसा हो गया। कक्षा पांच में पढ़ने वाली नुसरत के आंखों में जहां अपने प्रिय अनस और सेराज को खोने गम था तो उससे कहीं ज्यादा वैन के चालक पर गुस्सा थी। यह कहकर वह सुबक पड़ती है कि कई बार उसने चालक को ईयरफोन चलाकर गाड़ी न चलाने के लिए मना किया था।
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ट्रेन में सवार थी नुसरत, बच्चों को तड़पते देखा
नुुसरत शायद यह जख्म जीवन भर नहीं भूला पाएगी, जिन बच्चों के साथ वह रोजाना पढ़ने जाती थी उसे अपनी आंखों के सामने तड़पता देखा। दरअसल, नुसरत अपने पिता के साथ मेला देखने गई थी और स्कूल नहीं जा सकी। वह सीवान-बढ़नी पैसेंजर से घर लौट रही थी कि दुधई गांव के पहले ही हादसा हो गया। कक्षा पांच में पढ़ने वाली नुसरत के आंखों में जहां अपने प्रिय अनस और सेराज को खोने गम था तो उससे कहीं ज्यादा वैन के चालक पर गुस्सा थी। यह कहकर वह सुबक पड़ती है कि कई बार उसने चालक को ईयरफोन चलाकर गाड़ी न चलाने के लिए मना किया था।
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