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ओपीडी में कोविड गाइडलाइन तार-तार
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ओपीडी में कोविड गाइडलाइन तार-तार
पडरौना। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का भयावह मंजर देखने के बाद भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं। सबसे अधिक लापरवाही जिला अस्पताल में देखने को मिल रही है, जहां इमरजेंसी से लेकर पर्ची काउंटर, एक्सरे व अल्ट्रासाउंड कक्ष और ओपीडी में लोग मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की जगह धक्का-मुक्की करते देखे जा रहे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में ऐसा ही नजारा था।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अब तक जिले में 747541 लोगों की कोरोना जांच कराई जा चुकी है। इनमें 15572 लोग संक्रमित मिल चुके हैं। इन मरीजों में 224 लोगों की मौत हुई है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर इतनी घातक रही कि न केवल संक्रमण तेजी से फैला, बल्कि मौतें भी अधिक हुईं। जिला अस्पताल में भी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए थे।
कोरोना महामारी के संक्रमण में कमी और मरीजों की समस्या को देखते हुए जिला अस्पताल की ओपीडी खुलने के बाद लापरवाही फिर सामने आने लगी है। न तो इसे लेकर मरीज और उनके परिवारीजन गंभीर दिख रहे हैं और न ही जिला अस्पताल प्रशासन। सोमवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कक्ष, पर्ची काउंटर और ओपीडी में भीड़ काफी अधिक थी। पर्ची काउंटर, एक्सरे कक्ष और अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नहीं दिखे। सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति ओपीडी में दिखी। वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ए. सोनकर, महिला चिकित्साधिकारी डॉ. रीता बर्नवाल, दंत चिकित्सक डॉ. शाकीब आलम सहित के कक्ष में मरीज तो इक्का-दुक्का थे, लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ फिजिशियन के कक्ष के बाहर मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगी थी। आलम यह था कि पहले इलाज कराने के लिए लोग धक्का-मुक्की कर रहे थे। दो गज की दूरी की बात कौन कहे, कई लोग तो बिना मास्क के ही नजर आ रहे थे। फिर भी जिला अस्पताल प्रशासन की तरफ से भीड़ नियंत्रित करने अथवा कोविड गाइडलाइन का पालन कराने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया था। इसके अलावा नेत्र रोग विशेषज्ञ वार्ड में भर्ती मरीजों को देखने गए थे।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि कोविड महामारी का संक्रमण कम हो गया है। इस वजह से लोग इसका पालन करते नहीं कर रहे हैं। जिला अस्पताल में संक्रमण न फैले, इस पर पूरा ध्यान दिया जाएगा और कोविड गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा।
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पडरौना। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का भयावह मंजर देखने के बाद भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं। सबसे अधिक लापरवाही जिला अस्पताल में देखने को मिल रही है, जहां इमरजेंसी से लेकर पर्ची काउंटर, एक्सरे व अल्ट्रासाउंड कक्ष और ओपीडी में लोग मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की जगह धक्का-मुक्की करते देखे जा रहे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में ऐसा ही नजारा था।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अब तक जिले में 747541 लोगों की कोरोना जांच कराई जा चुकी है। इनमें 15572 लोग संक्रमित मिल चुके हैं। इन मरीजों में 224 लोगों की मौत हुई है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर इतनी घातक रही कि न केवल संक्रमण तेजी से फैला, बल्कि मौतें भी अधिक हुईं। जिला अस्पताल में भी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए थे।
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कोरोना महामारी के संक्रमण में कमी और मरीजों की समस्या को देखते हुए जिला अस्पताल की ओपीडी खुलने के बाद लापरवाही फिर सामने आने लगी है। न तो इसे लेकर मरीज और उनके परिवारीजन गंभीर दिख रहे हैं और न ही जिला अस्पताल प्रशासन। सोमवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कक्ष, पर्ची काउंटर और ओपीडी में भीड़ काफी अधिक थी। पर्ची काउंटर, एक्सरे कक्ष और अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नहीं दिखे। सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति ओपीडी में दिखी। वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ए. सोनकर, महिला चिकित्साधिकारी डॉ. रीता बर्नवाल, दंत चिकित्सक डॉ. शाकीब आलम सहित के कक्ष में मरीज तो इक्का-दुक्का थे, लेकिन हड्डी रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और वरिष्ठ फिजिशियन के कक्ष के बाहर मरीजों और तीमारदारों की भीड़ लगी थी। आलम यह था कि पहले इलाज कराने के लिए लोग धक्का-मुक्की कर रहे थे। दो गज की दूरी की बात कौन कहे, कई लोग तो बिना मास्क के ही नजर आ रहे थे। फिर भी जिला अस्पताल प्रशासन की तरफ से भीड़ नियंत्रित करने अथवा कोविड गाइडलाइन का पालन कराने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं किया गया था। इसके अलावा नेत्र रोग विशेषज्ञ वार्ड में भर्ती मरीजों को देखने गए थे।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि कोविड महामारी का संक्रमण कम हो गया है। इस वजह से लोग इसका पालन करते नहीं कर रहे हैं। जिला अस्पताल में संक्रमण न फैले, इस पर पूरा ध्यान दिया जाएगा और कोविड गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा।