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मिल चलने की संभावनाएं तलाशने पहुंचे अफसर
kushinagar
Updated Mon, 18 Dec 2017 11:25 PM IST
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सीईओ से मिलने पहुंचे मजदूर और किसान।
- फोटो : amar ujala
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पडरौना।
बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल की नीलामी के दौरान सर्वाधिक बोली लगाने वाली शोभित शुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के दो अफसर सोमवार को मिल में पहुंचे। उन्होंने चीनी मिल के कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों से वार्ता की। उन्होंने मिल चलवाने के लिए सहमति मांगी। इन अफसरों ने बकाया भुगतान दिलाने और आगे चीनी मिल के चलने पर नकद या एक सप्ताह के अंदर बैंक में धनराशि भेजने का भरोसा दिलाया, जिस पर चीनी मिल से जुड़े 187 कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों ने हस्ताक्षरयुक्त सहमति पत्र सौंप दिया।
13 दिसंबर को नीलामी के दिन आईं चार कंपनियों में लखनऊ की शोभित शुुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के अफसरों ने सर्वाधिक 28 करोड़ रुपये की बोली लगाकर नीलामी का फैसला अपने पक्ष में कर लिया था। इससे पहले भी शोभित शुुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के अफसर आकर चीनी मिल का मुआयना कर चुके हैं। बोली अपने पक्ष में लगने और नीलामी के लिए हाईकोर्ट की तरफ से किसानों, मिल कर्मचारियों और मजदूरों का सहमति पत्र लाने का निर्देश मिलने के बाद सोमवार को लखनऊ से कंपनी के जीएम पीएसपी सिंह और सिविल केन इंजीनियर रीतेश उपाध्याय पडरौना चीनी मिल में पहुंचे। उनके साथ पडरौना केन यूनियन के चेयरमैन जयप्रकाश गुप्ता थे। उनकी मौजूदगी में वार्ता हुई।
चीनी मिल के कर्मचारियों और मजदूरों ने उनके समक्ष शर्त रखी कि मिल संचालन के समय सेवारत और रिटायर्ड कर्मचारियों के पिछला बकाया लगभग पांच करोड़ रुपये का भुगतान कराया जाए। जो कर्मचारी जिस पद पर थे, उसे बरकरार रखा जाए। मौजूद किसानों से यह समझौता हुआ कि पिछले बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाए। इन शर्तों को पूरा करने का आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों ने हस्ताक्षरयुक्त सहमति पत्र सौंप दिया। पडरौना चीनी मिल पर गन्ना किसानों और चीनी मिल के कर्मचारियों और मजदूरों के भुगतान को लेकर 19 दिसंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई है। इसमें गन्ना विभाग के अफसरों के अलावा शासन और प्रशासन के जिम्मेदार लोगों को भी शामिल होना है। सोमवार को चीनी मिल में वार्ता के दौरान ओमप्रकाश श्रीवास्तव, प्रभुनाथ, मनोज कुमार श्रीवास्तव, अब्दुल लतीफ, अयूब अली, रामबदल मिश्रा, सुनील मोदनवाल, होसिला दुबे, छट्ठू यादव, मदन यादव, विरेंद्र यादव, परमेश दीक्षित, भिखारी, उमेश श्रीवास्तव, मोतीलाल, समशुल हक, दीनानाथ मद्धेशिया, छोटेलाल पाठक, बरसादी, खाजे, धनेश, धनराज लुहार, रघुवर आदि उपस्थित रहे।
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शोभित शुुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के जीएम और सिविल केन इंजीनियर पडरौना चीनी मिल में मिल कर्मचारियों और किसानों से वार्ता के लिए गए थे। वार्ता सकारात्मक रही। उन लोगों ने चीनी मिल संचालन के लिए अपनी सहमति जताई है। पडरौना चीनी मिल पर कुल 22 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि हमने बोली उससे बढ़ाकर 28 करोड़ रुपये की लगाई है। किसान और कर्मचारी हमारे साथ हैं। अगर न्यायालय का फैसला पक्ष में आता है तो 45 दिनों में मिल की मरम्मत कराकर उसे इसी सत्र में कम से कम डेढ़-दो महीने चलाने का प्रयास किया जाएगा।
-विजय कुमार मिश्र, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)
शोभित शुुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ।
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बंद पड़ी पडरौना चीनी मिल की नीलामी के दौरान सर्वाधिक बोली लगाने वाली शोभित शुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के दो अफसर सोमवार को मिल में पहुंचे। उन्होंने चीनी मिल के कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों से वार्ता की। उन्होंने मिल चलवाने के लिए सहमति मांगी। इन अफसरों ने बकाया भुगतान दिलाने और आगे चीनी मिल के चलने पर नकद या एक सप्ताह के अंदर बैंक में धनराशि भेजने का भरोसा दिलाया, जिस पर चीनी मिल से जुड़े 187 कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों ने हस्ताक्षरयुक्त सहमति पत्र सौंप दिया।
13 दिसंबर को नीलामी के दिन आईं चार कंपनियों में लखनऊ की शोभित शुुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के अफसरों ने सर्वाधिक 28 करोड़ रुपये की बोली लगाकर नीलामी का फैसला अपने पक्ष में कर लिया था। इससे पहले भी शोभित शुुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के अफसर आकर चीनी मिल का मुआयना कर चुके हैं। बोली अपने पक्ष में लगने और नीलामी के लिए हाईकोर्ट की तरफ से किसानों, मिल कर्मचारियों और मजदूरों का सहमति पत्र लाने का निर्देश मिलने के बाद सोमवार को लखनऊ से कंपनी के जीएम पीएसपी सिंह और सिविल केन इंजीनियर रीतेश उपाध्याय पडरौना चीनी मिल में पहुंचे। उनके साथ पडरौना केन यूनियन के चेयरमैन जयप्रकाश गुप्ता थे। उनकी मौजूदगी में वार्ता हुई।
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चीनी मिल के कर्मचारियों और मजदूरों ने उनके समक्ष शर्त रखी कि मिल संचालन के समय सेवारत और रिटायर्ड कर्मचारियों के पिछला बकाया लगभग पांच करोड़ रुपये का भुगतान कराया जाए। जो कर्मचारी जिस पद पर थे, उसे बरकरार रखा जाए। मौजूद किसानों से यह समझौता हुआ कि पिछले बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाए। इन शर्तों को पूरा करने का आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों ने हस्ताक्षरयुक्त सहमति पत्र सौंप दिया। पडरौना चीनी मिल पर गन्ना किसानों और चीनी मिल के कर्मचारियों और मजदूरों के भुगतान को लेकर 19 दिसंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई है। इसमें गन्ना विभाग के अफसरों के अलावा शासन और प्रशासन के जिम्मेदार लोगों को भी शामिल होना है। सोमवार को चीनी मिल में वार्ता के दौरान ओमप्रकाश श्रीवास्तव, प्रभुनाथ, मनोज कुमार श्रीवास्तव, अब्दुल लतीफ, अयूब अली, रामबदल मिश्रा, सुनील मोदनवाल, होसिला दुबे, छट्ठू यादव, मदन यादव, विरेंद्र यादव, परमेश दीक्षित, भिखारी, उमेश श्रीवास्तव, मोतीलाल, समशुल हक, दीनानाथ मद्धेशिया, छोटेलाल पाठक, बरसादी, खाजे, धनेश, धनराज लुहार, रघुवर आदि उपस्थित रहे।
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शोभित शुुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के जीएम और सिविल केन इंजीनियर पडरौना चीनी मिल में मिल कर्मचारियों और किसानों से वार्ता के लिए गए थे। वार्ता सकारात्मक रही। उन लोगों ने चीनी मिल संचालन के लिए अपनी सहमति जताई है। पडरौना चीनी मिल पर कुल 22 करोड़ रुपये की देनदारी है, जबकि हमने बोली उससे बढ़ाकर 28 करोड़ रुपये की लगाई है। किसान और कर्मचारी हमारे साथ हैं। अगर न्यायालय का फैसला पक्ष में आता है तो 45 दिनों में मिल की मरम्मत कराकर उसे इसी सत्र में कम से कम डेढ़-दो महीने चलाने का प्रयास किया जाएगा।
-विजय कुमार मिश्र, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)
शोभित शुुगर एंड पॉवर डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ।