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Kushinagar News: तीमारदारों की मजबूरी पर खून का साैदा

Fri, 30 May 2025 11:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Fri, 30 May 2025 11:44 PM IST
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Blood trade due to compulsion of relatives
पडरौना। मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में खून देने में खेल किया जा रहा है। नौ कैंप के जरिए 142 यूनिट ब्लड इकट्ठा करने वाले मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपने स्टॉक से ही निजी अस्पतालों के लिए 809 यूनिट ब्लड जारी कर दिया है।
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सूत्रों की मानें तो दलाल निजी अस्पतालों से साठगांठ बनाए रखते हैं। मरीजों को जरूरत होने पर तीमारदार से मोलभाव शुरू हो जाता है। पांच से सात हजार के बीच में तीमारदार के बजट के हिसाब से रकम तय होती है। सब कुछ तय होने के बाद दलाल किसी ऐसे आदमी को पकड़ता है, जिसका संबंध जिला अस्पताल में डॉक्टरों से होता है।
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ब्लड बैंक में काफी दिनों से तैनात कर्मचारियों और निजी अस्पताल संचालकों की सांठगांठ से यह खेल चल रहा है। यह हाल तब है जब यहां पर डायलिसिस यूनिट होने के साथ ही गंभीर मरीज भी आते हैं। ब्लड की कमी होने से उन्हें काफी परेशान होना पड़ता है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 40 प्रतिशत खून निजी अस्पतालों में दिया गया है। नियम के मुताबिक प्राथमिकता सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए होनी चाहिए।
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असल खेल यहीं से शुरू होता है। जिला अस्पताल प्रशासन को इसकी न भनक लगे, इसे देखते हुए दलाल हमेशा नए चेहरे की तलाश करते हैं। इसमें नेता समेत प्रभावशाली व्यक्ति शामिल होते हैं। उनके फोन जाने पर अस्पताल में बगैर डोनर के रक्त देने की व्यवस्था हो जाती है।
दलालों को इसके एवज में मोटी रकम आसानी से मिल जाती है। इस खेल को अधिकारी समझ नहीं पाते हैं। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए बगैर डोनर के रक्त की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए विनोद गुप्त कहते हैं कि इसमें अधिकारियों को स्वयं विवेक से काम लेने की जरूरत है। जांच परख के बाद रक्त दिया जाए तो दलालों की व्यवस्था फेल हो जाएगी।
127 यूनिट ब्लड बचा : ब्लड बैंक के आंकड़े के अनुसार बीते एक साल में ब्लड बैंक ने 2785 यूनिट खून विभिन्न कैंपों के जरिए इकट्ठा किए हैं। इसमें कई लोग स्वेक्षा से रक्तदान करने वाले भी शामिल हैं। इसके अलावा नौ कैंप में सिर्फ 142 यूनिट ही खून इकट्ठा किया जा सका है, जबकि 127 यूनिट इस समय खून ब्लड बैंक में बचा है। इसमें तैनात कर्मचारी काफी दिनों से पांव जमाए हुए हैं।

इसके चलते दलालों और निजी अस्पताल संचालकों से इनका साठगांठ है। दोपहर में रविंद्र नगर के सौभिक के परिजन एक यूनिट ब्लड के लिए पहुंचे थे, डोनर नहीं होने से परेशान थे, बाद में इनको एक यूनिट सीएमएस के आदेश पर खून दिया गया। पुरैना के जयश्री अपने रिश्तेदार से खून दिलवाया, इसके बाद एक यूनिट खून मिला। इसके अलावा पडरौना में दो और दो कुशीनगर में प्राइवेट ब्लड बैंक संचालित होता है।
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