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सीट बचाने के लिए भाजपा ने बदला चेहरा
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भाजपा ने वैश्य, कांग्रेस और बसपा ने
कुर्मी-सैंथवार को मैदान में उतारा
हाटा (कुशीनगर)। हाटा विधानसभा पर भाजपा ने इस बार चेहरा बदल दिया है। वर्तमान विधायक का टिकट काटकर पार्टी ने नगर पालिका के चेयरमैन मोहन वर्मा को मैदान में उतारा है।
हाटा विधानसभा क्षेत्र में सैंथवार-कुर्मी की संख्या अधिक है। इस सीट के राजनीतिक इतिहास की बात की जाए तो सबसे अधिक समय तक भाजपा की जीत होती रही है। सुरक्षित सीट रहने के दौरान हाटा विधानसभा सीट पर चार बार भाजपा के रमापति उर्फ रमाकांत ने कमल खिलाया था। जबकि एक बार जनता दल के रामनक्षत्र ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 2012 में सीट सामान्य होने के बाद सपा के राधेश्याम सिंह ने यहां से जीत दर्ज कर भाजपा से सीट छीन ली थी। लेकिन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वापसी की। यहां से भाजपा के पवन केडिया ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। हालांकि, इस बार वह पार्टी की पसंद नहीं बन पाए। कांग्रेस से अमरेंद्र प्रताप मल्ल और बसपा कसे शिवांग सिंह भी मैदान में उतर चुके हैं। सपा ने अब तक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।
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कुर्मी-सैंथवार को मैदान में उतारा
हाटा (कुशीनगर)। हाटा विधानसभा पर भाजपा ने इस बार चेहरा बदल दिया है। वर्तमान विधायक का टिकट काटकर पार्टी ने नगर पालिका के चेयरमैन मोहन वर्मा को मैदान में उतारा है।
हाटा विधानसभा क्षेत्र में सैंथवार-कुर्मी की संख्या अधिक है। इस सीट के राजनीतिक इतिहास की बात की जाए तो सबसे अधिक समय तक भाजपा की जीत होती रही है। सुरक्षित सीट रहने के दौरान हाटा विधानसभा सीट पर चार बार भाजपा के रमापति उर्फ रमाकांत ने कमल खिलाया था। जबकि एक बार जनता दल के रामनक्षत्र ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 2012 में सीट सामान्य होने के बाद सपा के राधेश्याम सिंह ने यहां से जीत दर्ज कर भाजपा से सीट छीन ली थी। लेकिन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वापसी की। यहां से भाजपा के पवन केडिया ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। हालांकि, इस बार वह पार्टी की पसंद नहीं बन पाए। कांग्रेस से अमरेंद्र प्रताप मल्ल और बसपा कसे शिवांग सिंह भी मैदान में उतर चुके हैं। सपा ने अब तक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।
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