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Kushinagar News: वर्षों से लगा रहे थे बैंकों का चक्कर, लोक अदालत में हो गया समाधान
Sun, 14 Jul 2024 03:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sun, 14 Jul 2024 03:49 AM IST
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पडरौना। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को दीवानी न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें कुल 91853 वादों का निस्तारण किया। वर्षों से समस्याओं का समाधान कराने दौड़ रहे लोगों की समस्या लोक अदालत में एक ही दिन में सुलझ जाने से उनके चेहरे खिल गए।
राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों कुल 91853 वादों का निस्तारण किया गया। इसमें फौजदारी के 7895, जुर्माने के रूप में 1,93,350 रुपये की धनराशि वसूल कर राजकीय कोष में जमा कराई गई। राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना से संबंधित 76 क्लेम वादों का निस्तारण करते हुए मृतकों एवं घायलों के आश्रितों को 5,33,70,000 रुपये मुआवजा दिलवाया गया। पारिवारिक न्यायालय की तरफ से 38 वादों का निस्तारण किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऋण से संबंधित वादों का प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंकों की तरफ से कुल 1416 बैंक ऋण वादों का निस्तारण करते हुए 7,93,82,960 रुपये टोकन मनी के रूप में ऋण धारियों से वसूली गई। इसके अलावा 641 राजस्व वादों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज अशोक कुमार सिंह ने किया।
इस दौरान भगवान दयाल भारती, मोहम्मद रिजवान अहमद, सुनील कुमार यादव, मोहम्मद आजाद, ज्योत्सना सिंह, शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, सत्यपाल सिंह प्रेमी, दिनेश कुमार, कविता सिंह, विजय कुमार वर्मा, मयंक प्रकाश, रामेश्वर दयाल आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचे विशुनपुरा ब्लॉक क्षेत्र के पंचफेड़ा निवासी इंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि वे बैंक से 40 हजार रुपये ऋण लिए थे। समय से ऋण नहीं देने पर उसका ब्याज बढ़कर 49234 रुपये हो गया था। बैंक वाले बार-बार उन्हें परेशान कर रहे थे। शनिवार को आयोजित लोक अदालत में आवेदन किया तो बैंक कर्मचारी और उनके बीच समझौते के आधार पर 30 हजार रुपये देने पर बात बनी।
शिवपुर निवासी उमेश राय ने बताया कि उनकी सास नदनी देवी के नाम से बैंक में 80 हजार रुपये जाम थे। दो वर्ष पहले उनका निधन हो गया है। उनके निधन के बाद इस रुपये का दो लोग उत्तराधिकारी हैं। रुपये निकालने के लिए दो वर्ष से हम लोग दौड़ रहे थे। शनिवार को यह मामला लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर निपट गया।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों कुल 91853 वादों का निस्तारण किया गया। इसमें फौजदारी के 7895, जुर्माने के रूप में 1,93,350 रुपये की धनराशि वसूल कर राजकीय कोष में जमा कराई गई। राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना से संबंधित 76 क्लेम वादों का निस्तारण करते हुए मृतकों एवं घायलों के आश्रितों को 5,33,70,000 रुपये मुआवजा दिलवाया गया। पारिवारिक न्यायालय की तरफ से 38 वादों का निस्तारण किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक ऋण से संबंधित वादों का प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंकों की तरफ से कुल 1416 बैंक ऋण वादों का निस्तारण करते हुए 7,93,82,960 रुपये टोकन मनी के रूप में ऋण धारियों से वसूली गई। इसके अलावा 641 राजस्व वादों का निस्तारण किया गया। लोक अदालत का शुभारंभ जिला जज अशोक कुमार सिंह ने किया।
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इस दौरान भगवान दयाल भारती, मोहम्मद रिजवान अहमद, सुनील कुमार यादव, मोहम्मद आजाद, ज्योत्सना सिंह, शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, सत्यपाल सिंह प्रेमी, दिनेश कुमार, कविता सिंह, विजय कुमार वर्मा, मयंक प्रकाश, रामेश्वर दयाल आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचे विशुनपुरा ब्लॉक क्षेत्र के पंचफेड़ा निवासी इंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि वे बैंक से 40 हजार रुपये ऋण लिए थे। समय से ऋण नहीं देने पर उसका ब्याज बढ़कर 49234 रुपये हो गया था। बैंक वाले बार-बार उन्हें परेशान कर रहे थे। शनिवार को आयोजित लोक अदालत में आवेदन किया तो बैंक कर्मचारी और उनके बीच समझौते के आधार पर 30 हजार रुपये देने पर बात बनी।
शिवपुर निवासी उमेश राय ने बताया कि उनकी सास नदनी देवी के नाम से बैंक में 80 हजार रुपये जाम थे। दो वर्ष पहले उनका निधन हो गया है। उनके निधन के बाद इस रुपये का दो लोग उत्तराधिकारी हैं। रुपये निकालने के लिए दो वर्ष से हम लोग दौड़ रहे थे। शनिवार को यह मामला लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर निपट गया।