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आशा कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया
kushinagar
Updated Fri, 09 Sep 2016 10:35 PM IST
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ध्रना
- फोटो : santosh verma
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पडरौना। मानदेय और राज्य कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने की मांग को लेकर आशा कार्यकर्ताआें ने भी जगह-जगह धरना प्रदर्शन किया। हाटा में धरना प्रदर्शन के बाद आशा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह को ज्ञापन सौंपा।
आशा कार्यकर्ताओं ने निश्चित मानदेय और राज्य कर्मचारियों की सुविधाएं दिए जाने सहित कई मांगाें को लेकर शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इनकी मांग थी 30 अगस्त 2013 को उत्तर प्रदेश शासन की ओर से घोषित रिजवी कमेटी की संस्तुति को जल्द लागू किया जाए, आउट सोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक, एमसीटीएस ऑपरेटर एवं अन्य कर्मियों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित किया जाए, भविष्य में इस भर्ती पर रोक लगाई जाए तथा एनएचएम से निष्कासित एमबीडब्ल्यू एक्सरे टेकिभनशियन की सेवाएं बहाल की जाएं। इस धरना प्रदर्शन में काफी संख्या में आशा कार्यकर्ता शामिल रहीं। आशा कार्यकर्ताओं के साथ उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के लोगों ने भी सीएमओ कार्यालय पर धरना दिया। इनके धरना को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष प्रभुनंद उपाध्याय ने भी सीएमओ कार्यालय पहुंचकर समर्थन किया। धरना प्रदर्शन में डॉ. शिप्रा, डॉ. सुभाष यादव, डॉ. पूनम यादव, डॉ. प्रशांत कुमार सिंह, विनोद कुमार, अमित कुमार श्रीवास्तव, राकेश कुमार, डॉ. प्रमोद नारायण, मुहम्मद फारुक हाशमी, डॉ. दिलीप कुमार गुप्त, बृजेश कुमार, डॉ. धनंजय मिश्र, रवि प्रकाश, दुर्गेश पांडेय, प्रवीण पांडेय सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।में
हाटा प्रतिनिधि के अनुसार सुकरौली पीएचसी के अंतर्गत गांवों में काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने निश्चित मानदेय और राज्य कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने की मांगों को लेकर शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। वे सुकरौली पीएचसी परिसर से नारेबाजी करती हुई ब्लॉक गेट पर पहुंची और गेट को जाम कर दिया। यह गेट ब्लॉक कार्यालय, पीएचसी और अन्य कई सरकारी विभागों के दफ्तरों में जाने का एक मात्र रास्ता है। गेट जाम के दौरान पीएचसी पर जा रही एंबुलेंस को भी आशाओं ने रोक दिया, जिससे मरीजों को उतार कर ले जाना पड़ा। इनका कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं में वह अहम योगदान दे रही हैं, लेकिन मानदेय नहीं दिया जा रहा है। कार्य करने के बाद भी सरकार उपेक्षा कर रही है। मौके पर पहुंचे पुलिस वालों ने धरना पर बैठी आशाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन इन लोगों ने किसी सक्षम अधिकारी या राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह को बुलाने की मांग किया। शाम करीब चार बजे राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह धरनास्थन पर पहुंचे और आशाओं को आश्वासन दिया कि उनकी बात वह मुख्यमंत्री तक पहुंचाऐंगे। इसके बाद आशाओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर अपना धरना समाप्त किया। इस मौके पर बिंदु जायसवाल, रीता देवी, आरती देवी, सुनीता सिंह, रंभा, फूलमती, रेनू तिवारी, मंजू उपाध्याय पुनिता, बिंदु, मंजू, सुमित्रा सहित काफी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद थीं।
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कप्तानगंज प्रतिनिधि के अनुसार उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर कप्तानगंज स्वास्थ्य केंद्र की आशा कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। इनका कहना था कि प्रदेश की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं में संविदा कर्मचारी और आशा कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है, लेकिन इनसे जुड़े 225 लाख परिवारों के साथ सरकार अन्याय कर रही है। इस धरना प्रदर्शन में आशा कार्यकर्ताओं के साथ साथ संविदाकर्मी आशुतोष पटेल, संदीप गोंड, विनीता मौर्य, पूनम देवी, डॉ. रेशमी सिंह, डॉ. निलेंद्र प्रताप, शीतल प्रसाद, गौरव, आनंद, हीरामणि देवी, हजरुन नेशा, रीता यादव, सरोज पासवान, विंद्रावती देवी, फूलमती आदि मौजूद थीं।
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आशा कार्यकर्ताओं ने निश्चित मानदेय और राज्य कर्मचारियों की सुविधाएं दिए जाने सहित कई मांगाें को लेकर शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इनकी मांग थी 30 अगस्त 2013 को उत्तर प्रदेश शासन की ओर से घोषित रिजवी कमेटी की संस्तुति को जल्द लागू किया जाए, आउट सोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक, एमसीटीएस ऑपरेटर एवं अन्य कर्मियों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित किया जाए, भविष्य में इस भर्ती पर रोक लगाई जाए तथा एनएचएम से निष्कासित एमबीडब्ल्यू एक्सरे टेकिभनशियन की सेवाएं बहाल की जाएं। इस धरना प्रदर्शन में काफी संख्या में आशा कार्यकर्ता शामिल रहीं। आशा कार्यकर्ताओं के साथ उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के लोगों ने भी सीएमओ कार्यालय पर धरना दिया। इनके धरना को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष प्रभुनंद उपाध्याय ने भी सीएमओ कार्यालय पहुंचकर समर्थन किया। धरना प्रदर्शन में डॉ. शिप्रा, डॉ. सुभाष यादव, डॉ. पूनम यादव, डॉ. प्रशांत कुमार सिंह, विनोद कुमार, अमित कुमार श्रीवास्तव, राकेश कुमार, डॉ. प्रमोद नारायण, मुहम्मद फारुक हाशमी, डॉ. दिलीप कुमार गुप्त, बृजेश कुमार, डॉ. धनंजय मिश्र, रवि प्रकाश, दुर्गेश पांडेय, प्रवीण पांडेय सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।में
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हाटा प्रतिनिधि के अनुसार सुकरौली पीएचसी के अंतर्गत गांवों में काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने निश्चित मानदेय और राज्य कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने की मांगों को लेकर शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। वे सुकरौली पीएचसी परिसर से नारेबाजी करती हुई ब्लॉक गेट पर पहुंची और गेट को जाम कर दिया। यह गेट ब्लॉक कार्यालय, पीएचसी और अन्य कई सरकारी विभागों के दफ्तरों में जाने का एक मात्र रास्ता है। गेट जाम के दौरान पीएचसी पर जा रही एंबुलेंस को भी आशाओं ने रोक दिया, जिससे मरीजों को उतार कर ले जाना पड़ा। इनका कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं में वह अहम योगदान दे रही हैं, लेकिन मानदेय नहीं दिया जा रहा है। कार्य करने के बाद भी सरकार उपेक्षा कर रही है। मौके पर पहुंचे पुलिस वालों ने धरना पर बैठी आशाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन इन लोगों ने किसी सक्षम अधिकारी या राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह को बुलाने की मांग किया। शाम करीब चार बजे राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह धरनास्थन पर पहुंचे और आशाओं को आश्वासन दिया कि उनकी बात वह मुख्यमंत्री तक पहुंचाऐंगे। इसके बाद आशाओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर अपना धरना समाप्त किया। इस मौके पर बिंदु जायसवाल, रीता देवी, आरती देवी, सुनीता सिंह, रंभा, फूलमती, रेनू तिवारी, मंजू उपाध्याय पुनिता, बिंदु, मंजू, सुमित्रा सहित काफी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद थीं।
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कप्तानगंज प्रतिनिधि के अनुसार उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर कप्तानगंज स्वास्थ्य केंद्र की आशा कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। इनका कहना था कि प्रदेश की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं में संविदा कर्मचारी और आशा कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है, लेकिन इनसे जुड़े 225 लाख परिवारों के साथ सरकार अन्याय कर रही है। इस धरना प्रदर्शन में आशा कार्यकर्ताओं के साथ साथ संविदाकर्मी आशुतोष पटेल, संदीप गोंड, विनीता मौर्य, पूनम देवी, डॉ. रेशमी सिंह, डॉ. निलेंद्र प्रताप, शीतल प्रसाद, गौरव, आनंद, हीरामणि देवी, हजरुन नेशा, रीता यादव, सरोज पासवान, विंद्रावती देवी, फूलमती आदि मौजूद थीं।