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Kushinagar News: रात के आठ बजते ही थम जाते हैं रोडवेज बसों के पहिए
Tue, 31 Mar 2026 01:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 31 Mar 2026 01:35 AM IST
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पडरौना शहर के सुभाष चौक सवारी भरते प्राईवेट बस चालक। संवाद
- फोटो : गोली लगने से घायल किशोर।
पडरौना। शहर के रोडवेज बस स्टेशन से सूरज ढलते ही परिवहन व्यवस्था दम तोड़ने लगती है। रात के आठ बजते ही बस स्टेशन पर सन्नाटा पसर जाता है। उसके बाद कसया या गोरखपुर की ओर जाने वाले यात्रियों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। रोडवेज बसों के नदारद होने से यात्री घंटों सुभाषचौक व मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के पास खड़े होकर वाहनों के इंतजार करने को मजबूर होते हैं।
बस स्टेशन पर आलम यह है कि जैसे ही घड़ी की सूई आठ पर पहुंचती हैं, सरकारी बसों का संचालन लगभग ठप हो जाता है। गोरखपुर और कसया जैसे शहरों को जाने वाले यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बचती। इसका सबसे बड़ा खामियाजा लंबी दूरी से आने वाले या देर शाम काम खत्म कर घर लौटने वाले यात्रियों के लिए यह समय किसी परीक्षा से कम नहीं होता। सरकारी बसों की अनुपलब्धता का सीधा फायदा निजी टेंपो और डग्गामार वाहन संचालक उठाते हैं। यात्री मजबूरी में असुरक्षित और ओवरलोड वाहनों में बैठने को विवश हैं। वहीं, हर घंटे पर यहां भाड़ा भी निजी वाहनों का बढ़ता है। रात के समय निजी वाहन चालक मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।सुनसान बस स्टेशन और डग्गामार वाहनों का सहारा लेना खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए असुरक्षित साबित होता है। यात्रियों का कहना है कि डिपो प्रशासन को कम से कम रात्रि 10 बजे तक मुख्य मार्गों पर बसों का फेरा सुनिश्चित करना चाहिए ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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बस स्टेशन पर आलम यह है कि जैसे ही घड़ी की सूई आठ पर पहुंचती हैं, सरकारी बसों का संचालन लगभग ठप हो जाता है। गोरखपुर और कसया जैसे शहरों को जाने वाले यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बचती। इसका सबसे बड़ा खामियाजा लंबी दूरी से आने वाले या देर शाम काम खत्म कर घर लौटने वाले यात्रियों के लिए यह समय किसी परीक्षा से कम नहीं होता। सरकारी बसों की अनुपलब्धता का सीधा फायदा निजी टेंपो और डग्गामार वाहन संचालक उठाते हैं। यात्री मजबूरी में असुरक्षित और ओवरलोड वाहनों में बैठने को विवश हैं। वहीं, हर घंटे पर यहां भाड़ा भी निजी वाहनों का बढ़ता है। रात के समय निजी वाहन चालक मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।सुनसान बस स्टेशन और डग्गामार वाहनों का सहारा लेना खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए असुरक्षित साबित होता है। यात्रियों का कहना है कि डिपो प्रशासन को कम से कम रात्रि 10 बजे तक मुख्य मार्गों पर बसों का फेरा सुनिश्चित करना चाहिए ताकि लोगों को परेशानी न हो।

पडरौना शहर के सुभाष चौक सवारी भरते प्राईवेट बस चालक। संवाद- फोटो : गोली लगने से घायल किशोर।
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